बस्ती समेत 11 कोरोना प्रभावित जिलों के नोडल अधिकारियों को सीएम योगी ने दिये यह निर्देश

बस्ती समेत 11 कोरोना प्रभावित जिलों के नोडल अधिकारियों को सीएम योगी ने दिये यह निर्देश
Yogi Adityanath3

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 प्रभावित 11 जनपदों के लिए नवनियुक्त नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि कोविड-19 प्रभावित 11 जनपदों, आगरा, मेरठ, कानपुर नगर, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, बुलन्दशहर, झांसी व बस्ती में टीम भेजी जा रही है. यह ऐसे जनपद हैं, जहां कोरोना संक्रमण के ज्यादा केसेज़ सामने आ रहे हैं. वहां पर एक प्रशासनिक अधिकारी/एक चिकित्सक की टीम भेजी जा रही है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टीम के सदस्य सम्बन्धित जनपदों में संक्रमण तथा मृत्यु दर की अधिकता के कारकों का आकलन करके 05 दिन के अंदर जनपद के सम्बन्ध में अपनी समग्र रिपोर्ट उपलब्ध कराए, जिससे योजना बनाकर इन जनपदों में विभिन्न गतिविधियों के संचालन के सम्बन्ध में निर्देश दिया जा सके. उन्होंने यह निर्देश भी दिए कि जनपदों में भेजी जा रही टीम कोविड-19 के संक्रमण की चेन तोड़ने, इसके प्रसार पर नियंत्रण के लिए गम्भीरता से प्रयास करे. उन्होंने कहा कि पूरी सावधानी बरतकर कोविड-19 के संक्रमण व मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोविड अस्पताल में चिकित्सक द्वारा नियमित राउण्ड लिया जाए. पैरामेडिकल स्टाफ निरन्तर उपस्थित रहे. मरीजों को निश्चित समय से नाश्ता, दोपबप का भोजन, रात का भोजन उपलब्ध कराया जाए. साफ-सफाई की व्यवस्था अच्छी रहे. बेड शीट नियमित बदली जाए. शौचालय साफ रहे.उन्होंने कहा कि वॉर्ड इंचार्ज द्वारा मरीज के अटेन्डेन्ट को उपचार की स्थिति के सम्बन्ध में नियमित जानकारी दी जाए.उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में जनपद में उपलब्ध सभी चिकित्सा सुविधाओं का उपयोग किया जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपदों में भेजी जा रही टीम द्वारा वहां पर कोविड-19 के सम्बन्ध में सर्विलांस सिस्टम तथा विभिन्न स्तरों के चिकित्सालयों की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करे. उन्होंने कहा कि बेहतर सर्विलांस सिस्टम तथा चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करके पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में होने वाले इंसेफेलाइटिस के प्रकोप को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत 3 वर्षों में विभिन्न स्तरों पर सावधानी बरतने से इंसेफेलाटिस के संक्रमण में 60 प्रतिशत तथा इससे होने वाली मृत्यु में 90 प्रतिशत की कमी आयी है. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का संचालन कराया गया. स्वास्थ्य विभाग को नोडल विभाग बनाया गया. इसके अलावा, चिकित्सा शिक्षा, नगर विकास, पंचायतीराज, बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार आदि विभागों द्वारा कार्यवाहियां की गईं. इसके तहत स्वच्छता, जागरूकता, खुले में शौच के खिलाफ अभियान, पुष्टाहार की उपलब्धता, प्राथमिक, सामुदायिक तथा जिला चिकित्सालयों को सुदृढ़ करने के लिए कार्य किया गया. सभी गतिविधियों का माइक्रो मैनेजमेन्ट किया गया.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा, सर्विलांस की व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों तथा आशा वर्क र्स द्वारा किसी भी बच्चे को बुखार आने पर प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भेजा गया. इसके लिए एम्बुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया. चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग करायी गयी, जिससे लक्षण के आधार पर मरीजों का तत्काल उपचार प्रारम्भ किया जा सके. इससे इंसेफेलाइटिस से बीमार बच्चों को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई, जिससे संक्रमण का प्रसार तथा मृत्यु दर नियंत्रित हुई.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण में भी ऐसी ही प्रभावी व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है.उन्होंने कहा कि आपदा का यह समय, एक ऐसा अवसर है, जिसमें प्रशासनिक मशीनरी तथा हेल्थ वॉरियर्स अपनी कार्य कुशलता का प्रदर्शन कर अपने प्रति जनविश्वास को दृढ़ कर सकते हैं.उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को हर हाल में रोका जाना है. ऐसे में, कोविड-19 संक्रमित लक्षणरहित व्यक्ति को भी घर में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे संक्रमण के प्रसार की आशंका बनी रहती है. राज्य में एल-1, एल-2 व एल-3 के कोविड अस्पतालों में 01 लाख से अधिक बेड उपलब्ध हैं. संक्रमण को रोकने के लिए कोविड-19 संक्रमित लक्षणरहित व्यक्ति को भी अस्पताल में रखा जाना चाहिए.

इस अवसर पर मुख्य सचिव आर0के0 तिवारी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ0 रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस0पी0 गोयल एवं संजय प्रसाद, सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित थे.

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भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
15 Jun 2020 By Bhartiya Basti

बस्ती समेत 11 कोरोना प्रभावित जिलों के नोडल अधिकारियों को सीएम योगी ने दिये यह निर्देश

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 प्रभावित 11 जनपदों के लिए नवनियुक्त नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने कहा कि कोविड-19 प्रभावित 11 जनपदों, आगरा, मेरठ, कानपुर नगर, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, बुलन्दशहर, झांसी व बस्ती में टीम भेजी जा रही है. यह ऐसे जनपद हैं, जहां कोरोना संक्रमण के ज्यादा केसेज़ सामने आ रहे हैं. वहां पर एक प्रशासनिक अधिकारी/एक चिकित्सक की टीम भेजी जा रही है. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि टीम के सदस्य सम्बन्धित जनपदों में संक्रमण तथा मृत्यु दर की अधिकता के कारकों का आकलन करके 05 दिन के अंदर जनपद के सम्बन्ध में अपनी समग्र रिपोर्ट उपलब्ध कराए, जिससे योजना बनाकर इन जनपदों में विभिन्न गतिविधियों के संचालन के सम्बन्ध में निर्देश दिया जा सके. उन्होंने यह निर्देश भी दिए कि जनपदों में भेजी जा रही टीम कोविड-19 के संक्रमण की चेन तोड़ने, इसके प्रसार पर नियंत्रण के लिए गम्भीरता से प्रयास करे. उन्होंने कहा कि पूरी सावधानी बरतकर कोविड-19 के संक्रमण व मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोविड अस्पताल में चिकित्सक द्वारा नियमित राउण्ड लिया जाए. पैरामेडिकल स्टाफ निरन्तर उपस्थित रहे. मरीजों को निश्चित समय से नाश्ता, दोपबप का भोजन, रात का भोजन उपलब्ध कराया जाए. साफ-सफाई की व्यवस्था अच्छी रहे. बेड शीट नियमित बदली जाए. शौचालय साफ रहे.उन्होंने कहा कि वॉर्ड इंचार्ज द्वारा मरीज के अटेन्डेन्ट को उपचार की स्थिति के सम्बन्ध में नियमित जानकारी दी जाए.उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में जनपद में उपलब्ध सभी चिकित्सा सुविधाओं का उपयोग किया जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपदों में भेजी जा रही टीम द्वारा वहां पर कोविड-19 के सम्बन्ध में सर्विलांस सिस्टम तथा विभिन्न स्तरों के चिकित्सालयों की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित करे. उन्होंने कहा कि बेहतर सर्विलांस सिस्टम तथा चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करके पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में होने वाले इंसेफेलाइटिस के प्रकोप को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त हुई है. मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत 3 वर्षों में विभिन्न स्तरों पर सावधानी बरतने से इंसेफेलाटिस के संक्रमण में 60 प्रतिशत तथा इससे होने वाली मृत्यु में 90 प्रतिशत की कमी आयी है. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों का संचालन कराया गया. स्वास्थ्य विभाग को नोडल विभाग बनाया गया. इसके अलावा, चिकित्सा शिक्षा, नगर विकास, पंचायतीराज, बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार आदि विभागों द्वारा कार्यवाहियां की गईं. इसके तहत स्वच्छता, जागरूकता, खुले में शौच के खिलाफ अभियान, पुष्टाहार की उपलब्धता, प्राथमिक, सामुदायिक तथा जिला चिकित्सालयों को सुदृढ़ करने के लिए कार्य किया गया. सभी गतिविधियों का माइक्रो मैनेजमेन्ट किया गया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके अलावा, सर्विलांस की व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों तथा आशा वर्क र्स द्वारा किसी भी बच्चे को बुखार आने पर प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भेजा गया. इसके लिए एम्बुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया. चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग करायी गयी, जिससे लक्षण के आधार पर मरीजों का तत्काल उपचार प्रारम्भ किया जा सके. इससे इंसेफेलाइटिस से बीमार बच्चों को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई, जिससे संक्रमण का प्रसार तथा मृत्यु दर नियंत्रित हुई.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण में भी ऐसी ही प्रभावी व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है.उन्होंने कहा कि आपदा का यह समय, एक ऐसा अवसर है, जिसमें प्रशासनिक मशीनरी तथा हेल्थ वॉरियर्स अपनी कार्य कुशलता का प्रदर्शन कर अपने प्रति जनविश्वास को दृढ़ कर सकते हैं.उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को हर हाल में रोका जाना है. ऐसे में, कोविड-19 संक्रमित लक्षणरहित व्यक्ति को भी घर में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे संक्रमण के प्रसार की आशंका बनी रहती है. राज्य में एल-1, एल-2 व एल-3 के कोविड अस्पतालों में 01 लाख से अधिक बेड उपलब्ध हैं. संक्रमण को रोकने के लिए कोविड-19 संक्रमित लक्षणरहित व्यक्ति को भी अस्पताल में रखा जाना चाहिए.

इस अवसर पर मुख्य सचिव आर0के0 तिवारी, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ0 रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस0पी0 गोयल एवं संजय प्रसाद, सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित थे.

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