उल्लास के साथ मनाया गया बस्ती जनपद का 162 वां स्थापना दिवस

उल्लास के साथ मनाया गया बस्ती जनपद का 162 वां स्थापना दिवस
उल्लास के साथ मनाया गया बस्ती जनपद का 162 वां स्थापना दिवस
बुधवार को वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा कलेक्टेªट परिसर में वरिष्ठ  अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में बस्ती जनपद का 162 वां स्थापना दिवस संगोष्ठी के साथ मनाया गया. मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने  कहा कि बस्ती  सन् 1801 में  तहसील मुख्यालय बना और फिर 6 मई 1865 को जनपद मुख्यालय बनाया गया.  
 
इसके बाद सन् 1988 में उत्तरी हिस्से को काटकर सिद्धार्थनगर जिला बनाया गया जिसे पहले डुमरियागंज नाम से जाना जाता था,  इस जिले में बांसी और नौगढ़ भी आते हैं, यहां कपिलवस्तु भी हैं, जहां बुद्ध ने अपने जीवन के शुरुआती समय व्यतीत किये थे, यहां से 10 किलोमीटर पूर्व लुंबनी में बुद्ध का जन्म हुआ था. यही नहीं बस्ती का एक और विभाजन  1997 में संतकबीर नगर के रूप मं हुआ. कहा कि  मण्डल स्तर पर बस्ती स्वयं में कई संस्कृतियों को समेटे हुये है.  

वरिष्ठ साहित्यकार राम नरेश सिंह मंजुल  ने बस्ती के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला.  कहा कि कभी ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कहा था कि बस्ती को बस्ती कहूं तो काको कहूं उजाड़’ आज यही बस्ती निरन्तर विकास की ओर है. कहा कि बस्ती का इतिहास बहुत समृद्ध है और मखौड़ा, छावनी शहीद स्थली के साथ ही अनेक पौराणिक स्थल हैं जो इसकी पहचान है. कहा कि सन् 1997 में पूर्वी हिस्से को काटकर संतकबीरनगर जिला बनाया जिसे खलीलाबाद के नाम से भी जाना जाता है, यहां महात्मा कबीर ने प्राण त्यागे थे.  इसके बाद जुलाई 1997 में बस्ती मंडल मुख्यालय बना दिया गया.  फिलहाल इस मंडल में बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर जनपद आते हैं.

कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि बस्ती का इतिहास जहां समृद्ध है वहीं वर्तमान प्रगति की ओर है. प्राचीन काल में बस्ती को भगवान राम के गुरु वशिष्ठ ऋषि के नाम पर वाशिष्ठी के नाम से जाना जाता रहा.  कहा जाता है कि उनका यहां आश्रम था, अंग्रेजों के जमाने में जब यह जिला बना तो निर्जन, वन और झाड़ियों से घिरा था, लोगों के प्रयास से यह धीरे-धीरे बसने योग्य बन गया.  अध्यक्षता करते हुये बटुकनाथ शुक्ल ने कहा कि नयी पीढी अपने इतिहास को जानते रहने की जरूरत है जिसे नयी पीढी अपनी जड़ों से जुड़े.  

बस्ती जनपद के 161 वां स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी मंें त्रिभुवन प्रसाद वर्मा,  बी.के. मिश्र,  डा. वाहिद सिद्दीकी,  अजीत श्रीवास्तव,  डा. राजेन्द्र सिंह राही, आचार्य छोटेलाल वर्मा, अर्चना श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, राजेन्द्र प्रसाद अरनवाल, संजीव पाण्डेय, सामईन फारूकी आदि ने बस्ती के इतिहास पर रोशनी डाली.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से गणेश प्रसाद, दीनानाथ यादव, अजमत अली सिद्दीकी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, नेबूलाल, लालजी पाण्डेय, मेहीलाल यादव  के साथ ही अनेक लोग उपस्थित रहे.
भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
06 May 2026 By Bhartiya Basti

उल्लास के साथ मनाया गया बस्ती जनपद का 162 वां स्थापना दिवस

बुधवार को वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा कलेक्टेªट परिसर में वरिष्ठ  अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा के संयोजन में बस्ती जनपद का 162 वां स्थापना दिवस संगोष्ठी के साथ मनाया गया. मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने  कहा कि बस्ती  सन् 1801 में  तहसील मुख्यालय बना और फिर 6 मई 1865 को जनपद मुख्यालय बनाया गया.  
 
इसके बाद सन् 1988 में उत्तरी हिस्से को काटकर सिद्धार्थनगर जिला बनाया गया जिसे पहले डुमरियागंज नाम से जाना जाता था,  इस जिले में बांसी और नौगढ़ भी आते हैं, यहां कपिलवस्तु भी हैं, जहां बुद्ध ने अपने जीवन के शुरुआती समय व्यतीत किये थे, यहां से 10 किलोमीटर पूर्व लुंबनी में बुद्ध का जन्म हुआ था. यही नहीं बस्ती का एक और विभाजन  1997 में संतकबीर नगर के रूप मं हुआ. कहा कि  मण्डल स्तर पर बस्ती स्वयं में कई संस्कृतियों को समेटे हुये है.  

वरिष्ठ साहित्यकार राम नरेश सिंह मंजुल  ने बस्ती के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला.  कहा कि कभी ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने कहा था कि बस्ती को बस्ती कहूं तो काको कहूं उजाड़’ आज यही बस्ती निरन्तर विकास की ओर है. कहा कि बस्ती का इतिहास बहुत समृद्ध है और मखौड़ा, छावनी शहीद स्थली के साथ ही अनेक पौराणिक स्थल हैं जो इसकी पहचान है. कहा कि सन् 1997 में पूर्वी हिस्से को काटकर संतकबीरनगर जिला बनाया जिसे खलीलाबाद के नाम से भी जाना जाता है, यहां महात्मा कबीर ने प्राण त्यागे थे.  इसके बाद जुलाई 1997 में बस्ती मंडल मुख्यालय बना दिया गया.  फिलहाल इस मंडल में बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर जनपद आते हैं.

कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि बस्ती का इतिहास जहां समृद्ध है वहीं वर्तमान प्रगति की ओर है. प्राचीन काल में बस्ती को भगवान राम के गुरु वशिष्ठ ऋषि के नाम पर वाशिष्ठी के नाम से जाना जाता रहा.  कहा जाता है कि उनका यहां आश्रम था, अंग्रेजों के जमाने में जब यह जिला बना तो निर्जन, वन और झाड़ियों से घिरा था, लोगों के प्रयास से यह धीरे-धीरे बसने योग्य बन गया.  अध्यक्षता करते हुये बटुकनाथ शुक्ल ने कहा कि नयी पीढी अपने इतिहास को जानते रहने की जरूरत है जिसे नयी पीढी अपनी जड़ों से जुड़े.  

बस्ती जनपद के 161 वां स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी मंें त्रिभुवन प्रसाद वर्मा,  बी.के. मिश्र,  डा. वाहिद सिद्दीकी,  अजीत श्रीवास्तव,  डा. राजेन्द्र सिंह राही, आचार्य छोटेलाल वर्मा, अर्चना श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, राजेन्द्र प्रसाद अरनवाल, संजीव पाण्डेय, सामईन फारूकी आदि ने बस्ती के इतिहास पर रोशनी डाली.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से गणेश प्रसाद, दीनानाथ यादव, अजमत अली सिद्दीकी, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, नेबूलाल, लालजी पाण्डेय, मेहीलाल यादव  के साथ ही अनेक लोग उपस्थित रहे.
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