सेना की जाति पर सियासत: नेताओं के विवादित बयान और चंद्रशेखर आज़ाद की दो टूक

सेना की जाति पर सियासत: नेताओं के विवादित बयान और चंद्रशेखर आज़ाद की दो टूक
Politics on Army's caste: Controversial statements of leaders and blunt words of Chandrashekhar Azad

भारतीय सेना, जो देश की सुरक्षा में चौबीसों घंटे डटी रहती है, इन दिनों नेताओं के विवादित बयानों की वजह से सियासी बहस का केंद्र बन गई है। सेना के अफसरों की जाति और धर्म को लेकर कुछ नेताओं द्वारा दिए गए बयानों ने न केवल सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है, बल्कि लोगों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।

बीते दिनों मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने सेना की अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी पर बेहद विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें पाकिस्तानियों और आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। इस बयान ने जबरदस्त विवाद खड़ा कर दिया और विरोध बढ़ने पर उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई।

इसके बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने मंच से भाषण देते हुए इस विवाद को और भड़काने वाला बयान दिया। उन्होंने न सिर्फ विजय शाह के बयान का हवाला दिया, बल्कि विंग कमांडर वमिका सिंह और एयर मार्शल अवधेश कुमार की जाति का उल्लेख कर विवाद को नई दिशा दे दी। रामगोपाल यादव ने वमिका सिंह को जाटव समुदाय से बताया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक अफसर को मुसलमान समझकर गाली दी गई, दूसरे को राजपूत समझकर छोड़ दिया गया, और तीसरे के बारे में जानकारी नहीं होने की वजह से उसे नजरअंदाज किया गया।

रामगोपाल यादव का यह कहना कि "तीनों अफसर तो पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) से थे", इस बात की ओर इशारा करता है कि बयान सिर्फ बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश का हिस्सा हैं।

इन बयानों के बीच आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का जवाब सबसे संतुलित और सटीक रहा। उन्होंने साफ कहा,

> “सेना की कोई जाति नहीं होती, सेना का कोई धर्म नहीं होता। हमें अनजाने में भी सेना का अपमान नहीं करना चाहिए। सेना के जवान हमारे गौरव हैं। वे हमारी सुरक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात हैं और हम उनके बलिदान के कारण ही शांति से जीवन जी पा रहे हैं।”

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या नेताओं को राजनीतिक लाभ के लिए सेना जैसे सम्मानित संस्थान को भी विवादों में घसीटना चाहिए? सेना हमेशा से धर्म, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर सिर्फ देश के लिए काम करती है। अफसर किसी भी जाति, धर्म या वर्ग से हों, उनकी निष्ठा और समर्पण सिर्फ राष्ट्र के प्रति होता है।

जहां एक ओर राजनीतिक बयानबाजी सेना की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, वहीं चंद्रशेखर आज़ाद जैसे नेता समाज को यह याद दिला रहे हैं कि देश पहले है, और सेना हमारे गौरव का प्रतीक है, ना कि वोट बैंक की राजनीति का मोहरा।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या बाकी राजनीतिक दल और नेता भी इस विषय पर संयम बरतेंगे, या फिर जाति और धर्म की चादर में देश की सुरक्षा करने वालों को लपेटने का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।

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