UGC के ‘काले कानून’ पर भड़का सवर्ण समाज, भाजपा सरकार को चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी
. राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा द्वारा भादी बुर्जुग गांव में आयोजित जन जागृति आक्रोश चौपाल में उपस्थित लोगों ने यूजीसी काले कानून एवं शिक्षा में आरक्षण, स्वास्थ्य सेवा की बदहाल व्यवस्था एवं युवाओं के भविष्य तथा विभिन्न जनहित के मुद्दों पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. सभा में मोर्चा अध्यक्ष रामजी पाण्डेय ने कहा कि सरकार यूजीसी काले कानून को जल्द वापस लिया जाए नहीं तो सवर्ण समाज आगामी चुनाव में वोट से इस भाजपा सरकार को उखाड़ कर फेंकने का काम करेगा. अगर सरकारी जन सुविधाओं को नजर अंदाज करती रही और ई-20 पेट्रोल नीति सहित आम जनता को प्रभावित करने वाली विभिन्न नीतियों पर सुधार नहीं हुआ तो चुनाव में सरकार का खुलकर विरोध और वहिष्कार किया जाएगा और वोट मांगने आए प्रत्याशियों को चूडी बिंदी से स्वागत होगा.
अमिततेष प्रताप सिंह ने कहा कि जिन नए प्रावधानों का विरोध किया जा रहा है, उसमे सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य पर खतरा हैं उन्हें बिना व्यापक जनसंवाद और सहमति के लागू किया गया, जिससे छात्रों, अभिभावकों और समाज के एक बड़े वर्ग में असंतोष व्याप्त है. यशवंत सिंह रोलू ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार अनिश्चितता की ओर बढ़ रही है. प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार आरक्षण से योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है . चन्द्रशे सिंह जी ने कहा यूजीसी काले कानून से युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों तथा उच्च शिक्षा में बार-बार किए जा रहे बदलावों ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया है. प्रमोद सिंह जी ने मांग किया कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रयोगों का माध्यम बनाने के बजाय छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
चौपाल में नौकरियों में आरक्षण एवं स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि आम नागरिक को आज भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं. मोर्चा का मानना हैं कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने तथा गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत हैं. देश मे किसी भी बड़े निर्णय को लागू करने से पहले अगर सवर्ण समाज को विश्वास में नहीं लिया गया तो परिणाम भयानक होगा अन्यथा सामाजिक, आर्थिक और व्यावहारिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े.
राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं के भविष्य और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जनभावनाओं की लगातार अनदेखी की गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से ंचुनाव में इसका जवाब देगी. लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च है और सरकारों का भविष्य जनता के विश्वास पर निर्भर करता है. सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो संगठन प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाकर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाएगा. बैठक में सेक्टर प्रभारी जीत नारायण मिश्र, अन्य सेक्टर प्रभारी प्रेम शंकर राठौर, आशीष सिंह राठौर, जयसिंह राठौड़, उदय प्रताप सिंह, सहित रामप्रताप सिंह, नवीन दुबे, रवि सिंह, अभय देव शुक्ल, विनय सिंह, यशवंत सिंह रोलू, अवधेश मिश्रा, प्रमोद सिंह, संजय शुक्ल, साकेत त्रिपाठी, अन्य सेक्टर प्रभारी रवीन्द्र पाण्डेय, उदय प्रताप सिंह, त्रिवेणी पाण्डेय, सिद्धार्थ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे.
UGC के ‘काले कानून’ पर भड़का सवर्ण समाज, भाजपा सरकार को चुनाव में सबक सिखाने की चेतावनी
. राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा द्वारा भादी बुर्जुग गांव में आयोजित जन जागृति आक्रोश चौपाल में उपस्थित लोगों ने यूजीसी काले कानून एवं शिक्षा में आरक्षण, स्वास्थ्य सेवा की बदहाल व्यवस्था एवं युवाओं के भविष्य तथा विभिन्न जनहित के मुद्दों पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया. सभा में मोर्चा अध्यक्ष रामजी पाण्डेय ने कहा कि सरकार यूजीसी काले कानून को जल्द वापस लिया जाए नहीं तो सवर्ण समाज आगामी चुनाव में वोट से इस भाजपा सरकार को उखाड़ कर फेंकने का काम करेगा. अगर सरकारी जन सुविधाओं को नजर अंदाज करती रही और ई-20 पेट्रोल नीति सहित आम जनता को प्रभावित करने वाली विभिन्न नीतियों पर सुधार नहीं हुआ तो चुनाव में सरकार का खुलकर विरोध और वहिष्कार किया जाएगा और वोट मांगने आए प्रत्याशियों को चूडी बिंदी से स्वागत होगा.
अमिततेष प्रताप सिंह ने कहा कि जिन नए प्रावधानों का विरोध किया जा रहा है, उसमे सवर्ण समाज के बच्चों के भविष्य पर खतरा हैं उन्हें बिना व्यापक जनसंवाद और सहमति के लागू किया गया, जिससे छात्रों, अभिभावकों और समाज के एक बड़े वर्ग में असंतोष व्याप्त है. यशवंत सिंह रोलू ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार अनिश्चितता की ओर बढ़ रही है. प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार आरक्षण से योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है . चन्द्रशे सिंह जी ने कहा यूजीसी काले कानून से युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों तथा उच्च शिक्षा में बार-बार किए जा रहे बदलावों ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया है. प्रमोद सिंह जी ने मांग किया कि शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रयोगों का माध्यम बनाने के बजाय छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
चौपाल में नौकरियों में आरक्षण एवं स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि आम नागरिक को आज भी गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं. मोर्चा का मानना हैं कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने तथा गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत हैं. देश मे किसी भी बड़े निर्णय को लागू करने से पहले अगर सवर्ण समाज को विश्वास में नहीं लिया गया तो परिणाम भयानक होगा अन्यथा सामाजिक, आर्थिक और व्यावहारिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े.
राष्ट्रीय सवर्ण शक्ति मोर्चा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, युवाओं के भविष्य और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जनभावनाओं की लगातार अनदेखी की गई, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से ंचुनाव में इसका जवाब देगी. लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च है और सरकारों का भविष्य जनता के विश्वास पर निर्भर करता है. सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो संगठन प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाकर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाएगा. बैठक में सेक्टर प्रभारी जीत नारायण मिश्र, अन्य सेक्टर प्रभारी प्रेम शंकर राठौर, आशीष सिंह राठौर, जयसिंह राठौड़, उदय प्रताप सिंह, सहित रामप्रताप सिंह, नवीन दुबे, रवि सिंह, अभय देव शुक्ल, विनय सिंह, यशवंत सिंह रोलू, अवधेश मिश्रा, प्रमोद सिंह, संजय शुक्ल, साकेत त्रिपाठी, अन्य सेक्टर प्रभारी रवीन्द्र पाण्डेय, उदय प्रताप सिंह, त्रिवेणी पाण्डेय, सिद्धार्थ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे.
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