बस्ती के दरोगा पर मनरेगा में मजदूरी लेने का आरोप, अधिकारियों से शिकायत

बस्ती के दरोगा पर मनरेगा में मजदूरी लेने का आरोप, अधिकारियों से शिकायत
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कुदरहा विकास खण्ड क्षेत्र के पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि आसमान सिंह ने पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव भारत सरकार, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के साथ ही अनेक सम्बंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर  उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात एक उपनिरीक्षक पर सरकारी सेवा में रहते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी भुगतान प्राप्त करने का आरोप लगाते हुये प्रभावी कार्यवाही की मांग किया है. पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि आसमान सिंह ने शिकायती पत्र में कहा है कि  कलवारी थाना क्षेत्र के  थन्हवा मुडियारी निवासी अमरनाथ वर्तमान में रायबरेली जनपद के थाना लालगंज में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं. शिकायत में दावा किया गया है कि अमरनाथ की वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश पीएसी में आरक्षी पद पर नियुक्ति हुई थी और वर्ष 2023 में उपनिरीक्षक पद पर नियुक्तिध्पदोन्नति के बाद वह पुलिस सेवा में कार्यरत हैं.


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति के बाद भी वर्ष 2019 से 2020 के बीच मनरेगा योजना में स्वयं को मजदूर दर्शाकर कथित रूप से मजदूरी का भुगतान प्राप्त किया गया. प्रार्थना-पत्र में इस संबंध में फर्जी या कूटरचित अभिलेखों के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की गई है. शिकायत में मनरेगा के मस्टर रोल, जॉब कार्ड, उपस्थिति पंजिका, भुगतान विवरण और बैंक खाते समेत संबंधित अभिलेखों का मिलान पुलिस विभाग के नियुक्ति एवं सेवा अभिलेखों से कराने की मांग की गई है. शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई और कथित रूप से प्राप्त धनराशि की नियमानुसार वसूली की जाए.

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने मनरेगा से जुड़े ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत सचिव अथवा अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान कूटरचना, फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी अथवा अन्य दंडनीय कृत्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए.
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. मामले में संबंधित अभिलेखों की जांच और सक्षम स्तर से जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.

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bhartiyabasti.com
13 Aug 2026 By Bhartiya Basti

बस्ती के दरोगा पर मनरेगा में मजदूरी लेने का आरोप, अधिकारियों से शिकायत

कुदरहा विकास खण्ड क्षेत्र के पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि आसमान सिंह ने पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव भारत सरकार, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक के साथ ही अनेक सम्बंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर  उत्तर प्रदेश पुलिस में तैनात एक उपनिरीक्षक पर सरकारी सेवा में रहते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी भुगतान प्राप्त करने का आरोप लगाते हुये प्रभावी कार्यवाही की मांग किया है. पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि आसमान सिंह ने शिकायती पत्र में कहा है कि  कलवारी थाना क्षेत्र के  थन्हवा मुडियारी निवासी अमरनाथ वर्तमान में रायबरेली जनपद के थाना लालगंज में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं. शिकायत में दावा किया गया है कि अमरनाथ की वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश पीएसी में आरक्षी पद पर नियुक्ति हुई थी और वर्ष 2023 में उपनिरीक्षक पद पर नियुक्तिध्पदोन्नति के बाद वह पुलिस सेवा में कार्यरत हैं.


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस सेवा में नियुक्ति के बाद भी वर्ष 2019 से 2020 के बीच मनरेगा योजना में स्वयं को मजदूर दर्शाकर कथित रूप से मजदूरी का भुगतान प्राप्त किया गया. प्रार्थना-पत्र में इस संबंध में फर्जी या कूटरचित अभिलेखों के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की गई है. शिकायत में मनरेगा के मस्टर रोल, जॉब कार्ड, उपस्थिति पंजिका, भुगतान विवरण और बैंक खाते समेत संबंधित अभिलेखों का मिलान पुलिस विभाग के नियुक्ति एवं सेवा अभिलेखों से कराने की मांग की गई है. शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई और कथित रूप से प्राप्त धनराशि की नियमानुसार वसूली की जाए.

इसके अलावा शिकायतकर्ता ने मनरेगा से जुड़े ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत सचिव अथवा अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है. शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच के दौरान कूटरचना, फर्जीवाड़ा, धोखाधड़ी अथवा अन्य दंडनीय कृत्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाए.
हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. मामले में संबंधित अभिलेखों की जांच और सक्षम स्तर से जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी.

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