बस्ती में “व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो”, उद्योग व्यापार मंडल ने उठाई 12 बड़ी मांगें

बस्ती में “व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो”, उद्योग व्यापार मंडल ने उठाई 12 बड़ी मांगें
बस्ती में “व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो”, उद्योग व्यापार मंडल ने उठाई 12 बड़ी मांगें

गुरूवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल उ. प्र. ने खाद्य विभाग द्वारा गुणवत्ता एवं सेम्पलिंग से जुड़ी विसंगतियों को लेकर मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ग्रेड - 2  को 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा. जिला अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य समस्या सेम्पलिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और व्यापारी व निर्माता की जिम्मेदारियां समझते हुए कार्यवाही का निर्धारण किया जाना है.  

प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मण्डल अध्यक्ष हरिमूर्ति सिंह ‘मनोज’ ने बताया कि उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल उ. प्र. के 12 सूत्रीय ज्ञापन में  खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम प्रदेश में कहीं भी सेंपल भरे जाते समय रिटेलर के साथ-साथ निर्माता को भी पार्टी बनाया जाता है परंतु निर्माता को सैंपल भरे जाते समय जारी किया गया फॉर्म 5 क नहीं भेजा जाता. सेम्पल भरते समय निर्माता को पार्टी बनाए जाने की दशा में फार्म 5 क निर्माता के पते पर पंजीकृत डाक द्वारा तुरंत भेज जाना आवश्यक है. दूसरा बिंदु में  नकली व डुप्लीकेट सामान के समाचार रोजाना समाचार पत्रों से प्राप्त होते हैं इसलिए आग्रह है कि रिटेलर या होलसेलर द्वारा बिल प्रस्तुत करने पर ही निर्माता को सैंपल भरते समय पार्टी बनाये जाने की मांग की गई.

प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया एवं सुनीत पाण्डेय ने कहा कि तीसरे बिन्दु में सैंपल की जांच रिपोर्ट जो महीनों में प्राप्त होती है जबकि खाद्य सुरक्षा में मानक अधिनियम में जांच कर 14 दिन में सैपल की रिपोर्ट भेजे जाने का प्रावधान किया गया है. इसे प्रदेश की सभी राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला द्वारा नमूना प्राप्त होने के बाद 14 दिन के अंदर जांब रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था कराये जाने की मांग की गई है. चौथे में अभिहित अधिकारियों द्वारा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के लंबे समय बाद केंद्रीय प्रयोगशाला द्वारा पुनः जांच के लिए भेजे जा रहे पत्र जहां से रिपोर्ट प्राप्त होने के महीना भर बाद भेजे जा रहे है जिससे जांच किए जाने वाले खाद्य पदार्थ की एक्सपायरी डेट निकल जाती है और पुनः जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाता. इसके लिए अभिहित  अधिकारियों को सैंपल भरे जाने के बाद राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला से शीघ्र रिपोर्ट प्राप्त कर नमूना फेल आने की दशा में पुनः जांच के लिए धारा 46 (4) का पत्र तुरन्त जारी करने के निर्देश दिये जाने की मांग की गई है.

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जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता बबलू ने बताया कि 5वें बिंदु में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों को नष्ट करने या जब्त करने की कार्रवाई केंद्रीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद करें क्योंकि केंद्रीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला से नमूना पास आने के बाद व्यापारी की नुकसान की भरपाई करने की कोई व्यवस्था विभाग द्वारा निधारित नहीं की गई है. जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने कहा कि छठें बिंदु में राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशालाओं द्वारा नमूने में कोई भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तु प्राप्त न होने के बाद भी नमूनों को मनमर्जी तरीके से असुरक्षित घोषित किया जा रहा है मानकों में कमी पाई जाने पर नमूने को अधोमानक घोषित किया जाए नमूने में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तु पाए जाने पर नमूने को असुरक्षित घोषित किये जाने की मांग की गई हैं.

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नगर अध्यक्ष राना महेन्द्र प्रताप ने बताया कि 7वें बिंदु में तुरंत न्याय के लिए खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम की धारा 69 के अंतर्गत मामूली वादों के लिए शमन की व्यवस्था लागू की जाने की मांग की गई है, जिससे व्यापारियों को न्याय मिल सकेगा तथा अनावश्यक वादों का भार भी सरकार पर नहीं पड़ेगा. नगर महामंत्री धीरेन्द्र चौधरी ने कहा कि 8वें बिंदु में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा में मानक अधिनियम में अधोमानक पाए जाने पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति न्याय निर्धारण अधिकारी के तौर पर की गई है, प्रशासनिक अधिकारी के अन्य राजकीय कामों में व्यस्त रहने के कारण न्याय निर्धारण में हो रही देरी को रोकने के लिए पूर्ण कालिक न्याय निर्धारण अधिकारी (जिसे खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की पूरी जानकारी हो)  की नियुक्ति किए जाने की व्यवस्था की जाए.

उद्योग मंच जिलाध्यक्ष कमलेश चौधरी ने कहा कि 9वें बिंदु में कहा गया है कि सभी निर्माताओं द्वारा प्रत्येक 6 माह में खाद्य पदार्थ की जांच सरकार द्वारा निर्धारित एनएवीएल लैब द्वारा कराकर पोर्टल पर अपलोड की जाती है, जिसकी पूर्ण सूचना विभाग के पास उपलब्ध होती है. इसलिए निर्माता के सील बंद पैकिंग के लिए की जारी होनी चाहिए. छापेमारी कार्रवाई बंद किये जाने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है. युवा मोर्चा अध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह एवं युवा संगठन मंत्री सत्य प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि 10वें बिंदु में कहा गया है कि नमूने भरे जाने के बाद प्राइवेट लैब से जांच कराकर निर्माता के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो बिल्कुल गलत है. ऐसी कार्रवाई को समाप्त करने के आदेश पारित करने की मांग की गई है. नगर संगठन महेन्द्र गुप्ता ने कहा कि ग्यारहवें बिंदु में कहा गया कि खेतों में रासायनिक खाद में कीटनाशक डालने की मानक तय नहीं है,

अंधाधुंध रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग रोकने का कोई साधन नहीं है. इसलिए खाद्य पदार्थों के मानक नए सिरे से तय किये जाएं. आखिरी और बारहवें बिंदु में कहा गया है कि पिछले काफी समय से विभाग द्वारा सर्वे सैंपल भरे गए है. इसके लिए मांग की गई है कि सर्वे सैम्पलों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा सर्वे सैंपलों के आधार पर नए सिरे से मानक तय किये जाएं, जिससे व्यापारियों का अन्यथा उत्पीड़न ना हो और दुकानदार निर्भय होकर व्यापार कर सकें.

ज्ञापन देने वालों में  महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष वंदना वर्मा, जितेंद्र सिंह गुड्डू, राजेश सिंह, प्रवीण सिंह, विवेक सिंह, अजय कन्नौजिया, नितिन श्रीवास्तव, सुजीत कुमार गुप्ता, रजत सिंह, राजकुमार चौधरी, सुनील मिश्र, अश्विन कुमार सहित अनेक  लोग शामिल रहे.

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14 May 2026 By Bhartiya Basti

बस्ती में “व्यापारियों का उत्पीड़न बंद हो”, उद्योग व्यापार मंडल ने उठाई 12 बड़ी मांगें

गुरूवार को उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल उ. प्र. ने खाद्य विभाग द्वारा गुणवत्ता एवं सेम्पलिंग से जुड़ी विसंगतियों को लेकर मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ग्रेड - 2  को 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा. जिला अध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य समस्या सेम्पलिंग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और व्यापारी व निर्माता की जिम्मेदारियां समझते हुए कार्यवाही का निर्धारण किया जाना है.  

प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मण्डल अध्यक्ष हरिमूर्ति सिंह ‘मनोज’ ने बताया कि उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल उ. प्र. के 12 सूत्रीय ज्ञापन में  खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम प्रदेश में कहीं भी सेंपल भरे जाते समय रिटेलर के साथ-साथ निर्माता को भी पार्टी बनाया जाता है परंतु निर्माता को सैंपल भरे जाते समय जारी किया गया फॉर्म 5 क नहीं भेजा जाता. सेम्पल भरते समय निर्माता को पार्टी बनाए जाने की दशा में फार्म 5 क निर्माता के पते पर पंजीकृत डाक द्वारा तुरंत भेज जाना आवश्यक है. दूसरा बिंदु में  नकली व डुप्लीकेट सामान के समाचार रोजाना समाचार पत्रों से प्राप्त होते हैं इसलिए आग्रह है कि रिटेलर या होलसेलर द्वारा बिल प्रस्तुत करने पर ही निर्माता को सैंपल भरते समय पार्टी बनाये जाने की मांग की गई.

प्रदेश उपाध्यक्ष परमात्मा प्रसाद मद्धेशिया एवं सुनीत पाण्डेय ने कहा कि तीसरे बिन्दु में सैंपल की जांच रिपोर्ट जो महीनों में प्राप्त होती है जबकि खाद्य सुरक्षा में मानक अधिनियम में जांच कर 14 दिन में सैपल की रिपोर्ट भेजे जाने का प्रावधान किया गया है. इसे प्रदेश की सभी राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला द्वारा नमूना प्राप्त होने के बाद 14 दिन के अंदर जांब रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था कराये जाने की मांग की गई है. चौथे में अभिहित अधिकारियों द्वारा जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के लंबे समय बाद केंद्रीय प्रयोगशाला द्वारा पुनः जांच के लिए भेजे जा रहे पत्र जहां से रिपोर्ट प्राप्त होने के महीना भर बाद भेजे जा रहे है जिससे जांच किए जाने वाले खाद्य पदार्थ की एक्सपायरी डेट निकल जाती है और पुनः जांच का कोई औचित्य नहीं रह जाता. इसके लिए अभिहित  अधिकारियों को सैंपल भरे जाने के बाद राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला से शीघ्र रिपोर्ट प्राप्त कर नमूना फेल आने की दशा में पुनः जांच के लिए धारा 46 (4) का पत्र तुरन्त जारी करने के निर्देश दिये जाने की मांग की गई है.

जिला संगठन महामंत्री भरत राम गुप्ता बबलू ने बताया कि 5वें बिंदु में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों को नष्ट करने या जब्त करने की कार्रवाई केंद्रीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद करें क्योंकि केंद्रीय जन विश्लेषण प्रयोगशाला से नमूना पास आने के बाद व्यापारी की नुकसान की भरपाई करने की कोई व्यवस्था विभाग द्वारा निधारित नहीं की गई है. जिला कोषाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने कहा कि छठें बिंदु में राजकीय जन विश्लेषण प्रयोगशालाओं द्वारा नमूने में कोई भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तु प्राप्त न होने के बाद भी नमूनों को मनमर्जी तरीके से असुरक्षित घोषित किया जा रहा है मानकों में कमी पाई जाने पर नमूने को अधोमानक घोषित किया जाए नमूने में मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तु पाए जाने पर नमूने को असुरक्षित घोषित किये जाने की मांग की गई हैं.

नगर अध्यक्ष राना महेन्द्र प्रताप ने बताया कि 7वें बिंदु में तुरंत न्याय के लिए खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम की धारा 69 के अंतर्गत मामूली वादों के लिए शमन की व्यवस्था लागू की जाने की मांग की गई है, जिससे व्यापारियों को न्याय मिल सकेगा तथा अनावश्यक वादों का भार भी सरकार पर नहीं पड़ेगा. नगर महामंत्री धीरेन्द्र चौधरी ने कहा कि 8वें बिंदु में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा में मानक अधिनियम में अधोमानक पाए जाने पर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति न्याय निर्धारण अधिकारी के तौर पर की गई है, प्रशासनिक अधिकारी के अन्य राजकीय कामों में व्यस्त रहने के कारण न्याय निर्धारण में हो रही देरी को रोकने के लिए पूर्ण कालिक न्याय निर्धारण अधिकारी (जिसे खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की पूरी जानकारी हो)  की नियुक्ति किए जाने की व्यवस्था की जाए.

उद्योग मंच जिलाध्यक्ष कमलेश चौधरी ने कहा कि 9वें बिंदु में कहा गया है कि सभी निर्माताओं द्वारा प्रत्येक 6 माह में खाद्य पदार्थ की जांच सरकार द्वारा निर्धारित एनएवीएल लैब द्वारा कराकर पोर्टल पर अपलोड की जाती है, जिसकी पूर्ण सूचना विभाग के पास उपलब्ध होती है. इसलिए निर्माता के सील बंद पैकिंग के लिए की जारी होनी चाहिए. छापेमारी कार्रवाई बंद किये जाने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है. युवा मोर्चा अध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह एवं युवा संगठन मंत्री सत्य प्रकाश द्विवेदी ने बताया कि 10वें बिंदु में कहा गया है कि नमूने भरे जाने के बाद प्राइवेट लैब से जांच कराकर निर्माता के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो बिल्कुल गलत है. ऐसी कार्रवाई को समाप्त करने के आदेश पारित करने की मांग की गई है. नगर संगठन महेन्द्र गुप्ता ने कहा कि ग्यारहवें बिंदु में कहा गया कि खेतों में रासायनिक खाद में कीटनाशक डालने की मानक तय नहीं है,

अंधाधुंध रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग रोकने का कोई साधन नहीं है. इसलिए खाद्य पदार्थों के मानक नए सिरे से तय किये जाएं. आखिरी और बारहवें बिंदु में कहा गया है कि पिछले काफी समय से विभाग द्वारा सर्वे सैंपल भरे गए है. इसके लिए मांग की गई है कि सर्वे सैम्पलों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा सर्वे सैंपलों के आधार पर नए सिरे से मानक तय किये जाएं, जिससे व्यापारियों का अन्यथा उत्पीड़न ना हो और दुकानदार निर्भय होकर व्यापार कर सकें.

ज्ञापन देने वालों में  महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष वंदना वर्मा, जितेंद्र सिंह गुड्डू, राजेश सिंह, प्रवीण सिंह, विवेक सिंह, अजय कन्नौजिया, नितिन श्रीवास्तव, सुजीत कुमार गुप्ता, रजत सिंह, राजकुमार चौधरी, सुनील मिश्र, अश्विन कुमार सहित अनेक  लोग शामिल रहे.

https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/%E2%80%9Cthe-harassment-of-traders-should-stop%E2%80%9D-in-basti-industry-trade/article-25647
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