यूपी में हर गाँव में होगा यह काम, सरकार ने की व्यवस्था
हर जिले में हज़ारों इकाइयों का लक्ष्य
राज्य का खाद्य प्रसंस्करण विभाग अब गांव–गांव छोटी उद्योग इकाइयां बसाने की योजना बना रहा है. खेती से मिलने वाली उपज को वहीं पर प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य दिलाना, जिससे किसान और गांव के युवाओं को गांव छोड़कर बाहर न जाना पड़े.
गांवों में लगेगे प्रोत्साहन शिविर
सरकार की दो प्रमुख योजनाएं:-
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023
- प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME)
इन दोनों के लाभों को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. गांवों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों को बताया जाएगा कि इकाई कैसे लगाएं, कैसे ऋण मिलेगा और कैसे सरकार आर्थिक मदद देगी.
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विभाग अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बड़ा करने जा रहा है. पंचायत स्तर पर 3 दिन के त्वरित शिविर और सरकारी प्रशिक्षण केंद्रों में एक महीने का गहन प्रशिक्षण. इससे ग्रामीणों को तकनीकी जानकारी भी मिलेगी और व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास भी.
एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का रास्ता
राज्य की अर्थव्यवस्था को ऊंचाई देने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है. इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीति में बड़े प्रोत्साहन जोड़े गए हैं.
कुछ ही समय पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हर गांव में कम से कम एक प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने का आदेश दिया है. इसी के बाद विभाग ने विस्तृत रोडमैप तैयार करना शुरू किया है. गांवों में संदेश लिखकर, पोस्टर लगाकर और कैंप आयोजित कर ग्रामीणों को प्रेरित किया जाएगा कि वे छोटे उद्योगों की ओर कदम बढ़ाएं. अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा के अनुसार, यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सबसे मजबूत आधार देने की क्षमता रखता है और सरकार उसी दिशा में तेज़ी से काम कर रही है.
प्रदेश में 75 हज़ार इकाइयों का जाल
वर्तमान में प्रदेश में करीब 75,000 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां चल रही हैं. नई नीति के अंतर्गत अब तक 428 नई इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं, जो आगे इस संख्या को कई गुना बढ़ाने का संकेत देती हैं.
मशीनरी पर 35% तक अनुदान
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत
- संयंत्र और मशीनरी पर 35% पूंजीगत अनुदान, अधिकतम 5 करोड़
- इकाई के विस्तार या आधुनिक बनाने पर 35% अनुदान, अधिकतम 1 करोड़
- सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर भी आर्थिक मदद
- इसके अतिरिक्त PMFME योजना के अंतर्गत
- 35% ऋण आधारित सहायता
- व्यक्तिगत इकाइयों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक का लाभ
- स्वयं सहायता समूहों को शुरुआती पूंजी सहायता
सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को गांवों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाया जाए. नई नीति में मशीनरी और विस्तार पर 35% अनुदान, PMFME में 10 लाख रुपये तक की सहायता, और गांवों में प्रशिक्षण व शिविर इन सभी कदमों का उद्देश्य गांवों में रोजगार, किसानों को ज्यादा मूल्य और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार देना है.
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शोभित पांडेय एक समर्पित और अनुभवशील पत्रकार हैं, जो बीते वर्षों से डिजिटल मीडिया और ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। खबरों की समझ, तथ्यों की सटीक जांच और प्रभावशाली प्रेज़ेंटेशन उनकी विशेष पहचान है। उन्होंने न्यूज़ राइटिंग, वीडियो स्क्रिप्टिंग और एडिटिंग में खुद को दक्ष साबित किया है। ग्रामीण मुद्दों से लेकर राज्य स्तरीय घटनाओं तक, हर खबर को ज़मीनी नजरिए से देखने और उसे निष्पक्षता के साथ प्रस्तुत करने में उनकी विशेष रुचि और क्षमता है।