Siddhartha Nagar के ज्यादातर मुहल्ले में आंगन बाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय

Siddhartha Nagar के ज्यादातर मुहल्ले में आंगन बाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय
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संवाददाता सिद्धार्थ नगर . शहर के ज्यादातर मुहल्ले में आंगन बाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय है.
इसमे कांशीराम आवास क्षेत्र के लगभग 15 सेंटरों को लेकर वार्ड न 19 आफिसर्स कालोनी के सभासद प्रतिनिधि सतीश रस्तोगी नें जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कुछ दिन पहले शिकायत भी किया है . पत्र में केंद्रों पर पोषण माह में पोषण सामग्री के वितरण न होने, केंद्रों के बंद रहने, आदि कुव्यवस्था की शिकायत की गई हैं.
 
सभासद प्रतिनिधि सतीश रस्तोगी की शिकायत को लेकर जब भारतीय बस्ती संवाददाता ने धरातल पर जाकर हकीकत जानने की कोशिश की तो पता चला कि दो से तीन महीने के अंतराल पर पोषण सामग्री का वितरण होता हैं. केंद्रों के खुलने और बंद होने को लेकर आसपास के लोगों ने बताया कि कभी खुलता हैं कभी नहीं खुलता हैं सब मन मर्जी से चलता है.
 
आंगनबाड़ी केंद्रों के इस हालत के बारे जब अधिकारियों से बात करने के लिए शहरी क्षेत्र के कार्यालय का रुख किया. विभागीय सूत्रों के अनुसार कार्यालय भीमापार मुहल्ले में रेलवे क्रासिंग से आगे हैं उस मुहल्ले काफी पूछताछ के बाद पता चला कि एक प्राइवेट भवन में कार्यालय चलता है जिसे देखकर य़ह नहीं लगता कि यहां कोई कार्यालय भी हो सकता है क्योंकि आंगनबाड़ी से जुड़ा कोई बोर्ड वहां ढूढ़ने से भी नहीं मिला .
 
कार्यालय में कार्यरत अधिकतम महिला कर्मचारी हैं जिनके उपयोग के लिए एक अदद बाथरूम हैं जो खुद को अस्वच्छता का शिकार है ऐसे में जब आंगनबाड़ी केंद्रों को क्रियाशील करने वाले कार्यालय ही व्यवस्था शून्य है तो केंद्रों की व्यवस्था राम भरोसे ही होगी.
भारतीय बस्ती
bhartiyabasti.com
09 Oct 2023 By Jitendra Kaushal Singh

Siddhartha Nagar के ज्यादातर मुहल्ले में आंगन बाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय

संवाददाता सिद्धार्थ नगर . शहर के ज्यादातर मुहल्ले में आंगन बाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय है.
इसमे कांशीराम आवास क्षेत्र के लगभग 15 सेंटरों को लेकर वार्ड न 19 आफिसर्स कालोनी के सभासद प्रतिनिधि सतीश रस्तोगी नें जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कुछ दिन पहले शिकायत भी किया है . पत्र में केंद्रों पर पोषण माह में पोषण सामग्री के वितरण न होने, केंद्रों के बंद रहने, आदि कुव्यवस्था की शिकायत की गई हैं.
 
सभासद प्रतिनिधि सतीश रस्तोगी की शिकायत को लेकर जब भारतीय बस्ती संवाददाता ने धरातल पर जाकर हकीकत जानने की कोशिश की तो पता चला कि दो से तीन महीने के अंतराल पर पोषण सामग्री का वितरण होता हैं. केंद्रों के खुलने और बंद होने को लेकर आसपास के लोगों ने बताया कि कभी खुलता हैं कभी नहीं खुलता हैं सब मन मर्जी से चलता है.
 
आंगनबाड़ी केंद्रों के इस हालत के बारे जब अधिकारियों से बात करने के लिए शहरी क्षेत्र के कार्यालय का रुख किया. विभागीय सूत्रों के अनुसार कार्यालय भीमापार मुहल्ले में रेलवे क्रासिंग से आगे हैं उस मुहल्ले काफी पूछताछ के बाद पता चला कि एक प्राइवेट भवन में कार्यालय चलता है जिसे देखकर य़ह नहीं लगता कि यहां कोई कार्यालय भी हो सकता है क्योंकि आंगनबाड़ी से जुड़ा कोई बोर्ड वहां ढूढ़ने से भी नहीं मिला .
 
कार्यालय में कार्यरत अधिकतम महिला कर्मचारी हैं जिनके उपयोग के लिए एक अदद बाथरूम हैं जो खुद को अस्वच्छता का शिकार है ऐसे में जब आंगनबाड़ी केंद्रों को क्रियाशील करने वाले कार्यालय ही व्यवस्था शून्य है तो केंद्रों की व्यवस्था राम भरोसे ही होगी.
https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/siddharthnagar/condition-of-anganwadi-centers-in-most-of-the-localities-of-siddharth-nagar-is-pathetic/article-13298
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जितेंद्र कौशल सिंह भारतीय बस्ती के पत्रकार हैं. शुरुआती शिक्षा दीक्षा बस्ती जिले से ही करने वाले  जितेंद्र  खेती, कृषि, राजनीतिक और समसामयिक विषयों पर खबरें लिखते हैं.