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                <title>priyanka gandhi vadra प्रियंका गांधी वाड्रा - Bhartiya Basti</title>
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                <title>इस्तीफे के बाद आजाद का बड़ा बयान- कांग्रेस छोडऩे के लिए किया गया मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[Congress, congress - कांग्रेस की खबर, rahul gandhi राहुल गांधी की खबर, priyanka gandhi vadra प्रियंका गांधी वाड्रा, ghulam nabi Azad big statement after resignation Forced to leave Congress, ghulam nabi azad,इस्तीफे के बाद आजाद का बड़ा बयान- कांग्रेस छोडऩे के लिए किया गया मजबूर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/india-news/ghulam-nabi-azad-big-statement-after-resignation-forced-to-leave-congress/article-10902"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2022-08/ghulam-nabi-azad.jpg" alt=""></a><br /><p>कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पार्टी व राहुल के भविष्य पर चिंता जाहिर करते हुए गुलाम नबी आजाद के कहा कि, घर वालों नें घर छोडऩे के लिए मजबूर किया, वहीं पार्टी के लिए मैं बस दुआ ही कर सकता हूं लेकिन मेरी दुआ से कुछ ठीक होने वाला नहीं है. पार्टी के लिए दवा चाहिए और उसके लिए जो डॉक्टर है वह कंपाउंडर है. जबकि सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर चाहिए.</p>
<p>गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को शुक्रवार को 5 पन्नों का त्यागपत्र भेजा और पार्टी छोड़ दी. अपने पत्र में उन्होंने राहुल गांधी व पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए. पार्टी से इस्तीफा देने के बाद गुलाम नबी आजाद ने पार्टी छोड़े जाने पर कहा कि, घर वालों ने ही घर छोडऩे को मजबूर कर दिया. जब घरवालों को लगे ये आदमी नहीं चाहिए और आदमी को लगे कि हमको पराया समझने लगे हैं तो व्यक्ति घर छोड़ कर चला जाता है.</p>
<p>हालांकि भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगाए जाने पर गुलाम नबी आजाद नें कहा, नरेंद्र मोदी या बीजेपी से वो मिले हैं जो मोदी जी का सपना पूरा कर रहे हैं, मोदी जी ने कहा था 'कांग्रेस मुक्त भारतÓ, जिन लोगों नें कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में उनकी सहायता की, वो मोदी जी से मिले हुए हैं. लोकसभा में स्पीच देने के बाद, जो लोग उनसे गले मिलते हैं वो मिले है, मैं नहीं.</p>
<p>हाल ही में कांग्रेस नेता जयराम रमेश के मोदी-फाइड और डीएनए वाले बयान पर आजाद ने कहा कि, उनका क्या डीएनए है? किसी को नहीं मालूम, किस स्टेट से हैं? किसी को नहीं मालूम, किस डिस्ट्रिक्ट से हैं? यह नहीं मालूम. पहले वो अपना डीएनए चेक कराएं. वह तो कुछ साल पहले फ्रीलांसर थे? वह किस सरकार में काम कर रहे थे? किस-किस पार्टी में उनका क्या डीएनए रहा? जो हाउस में बैठ कर बीजेपी को स्लिप भेजते रहे.</p>
<p>हाउस में बीजेपी और उनके बीच में 100 स्लिपों का आदान-प्रदान होता था, अब वह चेक करेंगे हमारा डीएनए क्या है? सिर्फ चापलूसी करके या ट्वीट करने के लिए पद मिले हैं वो हमारे ऊपर आरोप लगाए तो हमें बहुत दुख होता है.<br />राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निकले आंसू पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी मेरे लिए नहीं रोये थे, वह एक घटना का जिक्र कर रहे थे. मैं उन्हें क्रूर समझता था लेकिन उन्होंने इंसानियत दिखाई. हम एक दूसरे के लिए नहीं बल्कि हम उस घटना को लेकर रोए थे.</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, मोदी तो बहाना है, इनकी आंखों में खटकते हैं. जिस दिन से हमने जी-23 का एक पत्र लिखा था. यह कहते थे कि हमको कोई पत्र लिखना नहीं चाहिए. जब हमने उनकी कार्यप्रणाली को लेकर चुनौती दी, तो उनकी आंखों में खटक रहे थे. उसके बाद कई बैठकें हुईं, हमसे एक सुझाव नहीं लिया गया.</p>
<p>हमने एक बैठक में कहा था, हमें कोई पद नहीं चाहिए, चुनाव को लेकर कैम्पेन कमिटी बनाइए, लेकिन ये कमिटी तब बनाते हैं जब चुनाव खत्म हो जाता है. हम जी-23 वाले कैम्पेन खुद करना चाहते थे, हम पार्टी से कोई सुविधा नहीं लेना चाहते थे, हमने मुफ्त काम करने के लिए कहा तो क्या यह कांग्रेस को बनाने के लिए मैंने कहा था या मोदी को बनाने के लिए?</p>
<p>होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव और संगठन को लेकर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि, कांग्रेस पार्टी का बैंक लुट गया है, बैंक में कुछ नहीं है. अब जनरल मैनेजर बदलने से क्या? वो खिड़की दरवाजे अलमारियों का मैनेजर होगा. कांग्रेस की भी यही हालत है. कांग्रेस में कुछ नहीं है, सब दूसरी पार्टी में भाग गए, यह हमसे कहते हैं कि पार्टी के बड़े जा रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुष्मिता देव, आर.पी.एन. सिंह .. राहुल गांधी गुजरात से नए लड़के लेकर आए, वो भी चले गए. क्यों भाग गए? यह सब तो राहुल की टीम थे.</p>
<p>नई पार्टी बनाने को लेकर उन्होंने कहा, हमें पूरे देश से संदेश आते हैं कि राष्ट्रीय पार्टी बनाओ, मैंने उसपर अभी कोई ध्यान नहीं दिया है. लेकिन मांग है कि पार्टी बनाई जाए और यह वह लोग बोल रहे हैं जो भाजपा, रिजनल पार्टी में नहीं जाना चाहते. हमने कांग्रेस पार्टी छोड़ी है लेकिन विचाधारा नहीं छोड़ी है. कांग्रेस पार्टी हर दिन सिकुड़ती जा रही है. कांग्रेस से लोग इतना फस्र्टटेड हैं कि छोटे विकल्प में भी जाना चाहते हैं. राष्ट्रीय पार्टी बनाने में अभी वक्त है उसके लिए बहुत चीजों की जरूरत होती है. जम्मू-कश्मीर का हम तुरंत दौरा शुरू करेंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Aug 2022 21:52:07 +0530</pubDate>
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                <title>नजरिया: महिलाओं को कितना लुभाएगी प्रियंका की मुहिम</title>
                                    <description><![CDATA[How much will Priyanka gandhi vadra campaign woo women,नजरिया: महिलाओं को कितना लुभाएगी प्रियंका की मुहिम,congress - कांग्रेस की खबर, priyanka gandhi vadra प्रियंका गांधी वाड्रा, india news - भारत की खबर, opinion - नज़रिया, Ayodhya VidhanSabha Chunav 2022, basti sadar vidhan sabha chunav 2022, uttar pradesh assembly election 2022, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022, यूपी विधानसभा चुनाव 2022, विधानसभा चुनाव 2022, ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/india-news/how-much-will-priyanka-gandhi-vadra-campaign-woo-women/article-9074"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2021-10/priyanka-gandhi-vadra-in-gorakhpur.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>क्षमा शर्मा</strong><br />लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कांग्रेस की नेता, प्रियंका गांधी ने कहा कि अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव में, चालीस प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिए जाएंगे. बैक ग्राउंड में लिखा था-लड़की हूं, लड़ सकती हूं. सुनने में नारा बहुत आकर्षित करता है. लड़कियों को संघर्ष और अपने अधिकारों के लिए लडऩे की प्रेरणा भी दे सकता है. जब से देश में शिक्षित, नौकरीपेशा मध्य वर्ग की महिलाओं की संख्या बढ़ी है, वे बड़ी संख्या में वोट देने लगी हैं. उनकी राय का मायने भी समझा जाने लगा है, तब से जैसे हर राजनीतिक दल उन्हें अपने पाले में खींचना चाहता है.</p>
<p>अतीत में जो लोग 33 प्रतिशत महिला रिजर्वेशन बिल का संसद में विरोध कर चुके हैं, कह चुके हैं कि अगर ऐसा हुआ तो परकटी आ जाएंगी, वे इस बिल में विभिन्न धर्मों और जातियों की महिलाओं को अलग से प्रतिनिधित्व देने की मांग कर चुके हैं, वे महिलाओं को भी जाति और धर्म के चश्मे से ही देखते हैं. जबकि अनुभव कहता है कि जिस तरह गरीब का कोई जाति–धर्म नहीं होता, महिलाओं का भी नहीं होता. वे हर जाति–धर्म में सताई जाती हैं. लेकिन प्रियंका गांधी की इस घोषणा के बाद, ऐसे ही एक दल के प्रवक्ता ने टीवी पर कहा कि वे तो हमेशा से ही इस बिल का समर्थन कर रहे थे, भाजपा और कांग्रेस ने ही इसे पास नहीं होने दिया.</p>
<p>इन दिनों अपना ही बोला हुआ आज का सच, कल का झूठ हो सकता है. जिसने कल जो बात कही थी, आज वही उसे झुठला सकता है. इन दिनों हर बात पर महिलाओं का नाम जपने वाले महिलाओं के ये नए हितू, सचमुच उनके लिए क्या करेंगे. या कि चुनाव के बाद सब भूल जाएंगे. आने वाले दिनों में जब कांग्रेस में टिकटों का बंटवारा होगा तो हो सकता है कि इसी दल के पुरुष अपने-अपने घर की महिलाओं के लिए टिकट की मांग करें, तब उनसे कैसे निपटा जाएगा. यदि उन्हें टिकट दिया गया तो सत्ता पुरुष से खिसक कर महिला के हाथ में आ जाएगी, मगर परिवार के पास ही रहेगी. क्योंकि प्रियंका गांधी ने कहा भी है कि जिन महिलाओं को लोग जानते होंगे, जो अपने क्षेत्र में लोकप्रिय होंगी, पार्टी का टिकट उन्हें ही मिलेगा.</p>
<p>हम जानते ही हैं कि एक साधारण औरत को लोकप्रिय होने के कितने मौके मिलते हैं. अक्सर ही लोकप्रियता की सारी ताकत साधन सम्पन्नों के पास ही पहुंचती है. फिर मान लीजिए यदि तमाम पुराने नेताओं के परिवारों की महिलाओं को टिकट नहीं मिला, तो क्या वे प्रियंका के खिलाफ मोर्चा नहीं खोल देंगे. जिसे टिकट नहीं मिलता है, वह फौरन पुराने दल को छोड़, टिकट मिलने की आस में नए दल में चला जाता है.</p>
<p>आखिर प्रियंका भी ऐसे ही परिवार से आती हैं. क्या उनकी जगह कांग्रेस की कोई साधारण महिला ले सकती है. उसे यह पद मिल सकता है. इसके अलावा एक दिलचस्प बात यह भी है कि जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ा था, तो अध्यक्ष उनके सुपुत्र राहुल गांधी को ही बनाया गया था. चलिए तब तो प्रियंका राजनीति में इतनी एक्टिव नहीं थीं. मगर पिछले दिनों कांग्रेस की जो मीटिंग हुई, उसमें कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से बहुत से वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाने की मांग की. आखिर उन्होंने प्रियंका को अध्यक्ष बनाने की मांग क्यों नहीं की. वह भी तब, जब मां सोनिया गांधी यानी कि एक महिला ही से यह मांग की जानी थी. यानी कि परिवार या दल की सत्ता में जब चुनो, तब पुरुष को ही चुनो. प्रियंका की यह प्रतिज्ञा अच्छी है कि वे लड़कियों को एमपावर्ड करना चाहती हैं, तो पहले यह बदलाव घर से ही शुरू क्यों नहीं किया जाता. उन्हें कुछ संकोच हो तो राहुल गांधी या सोनिया गांधी खुद उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने का निर्णय ले सकते हैं. या कि लड़कियों के प्रति इतनी संवेदना सिर्फ चुनाव जीतने का स्टंट भर है.</p>
<p>वैसे भी पूरे देश में लड़कियों के प्रति तरह-तरह के अपराध होते हैं. एनसीआरबी के आंकड़े इसकी गवाही भी दे सकते हैं. मगर नेताओं को उन्हें उठाने की याद वहीं आती है, जहां विपक्षियों की सरकार हो और चुनाव होने वाले हों. इस तरह की रणनीति बनाने में कोई भी दल कम नहीं है. प्रेस कानफ्रेंस में जब पत्रकारों ने प्रियंका से पूछा कि अन्य जिन राज्यों में चुनाव होंगे, क्या वहां भी कांग्रेस यही नीति अपनाएगी, तो उन्होंने बहुत चतुराई से कहा कि वह उत्तर प्रदेश की इंचार्ज हैं. वहीं के बारे में बता सकती हैं.</p>
<p>कई बार यह भी लगता है कि सरकारें अपने कामों का ढोल पीटने के लिए अरबों रुपए खर्च करती हैं. अगर सचमुच जमीनी स्तर पर काम हों तो लोग खुद उनका ढोल पीटते हैं, चर्चा करते हैं. और ऐसे नेताओं को बारंबार चुनते हैं.</p>
<p>दरअसल नेता अपनी गद्दी सुरक्षित करने, सत्ता प्राप्त करने के लिए तरह-तरह के नारे उछालते हैं, जो जनता के एक वर्ग को लुभाएं और वोटों से उनकी झोली भर दें. लेकिन मीडिया का बड़ा वर्ग इस स्ट्रेटेजी को ही सही मान, ले उड़ता है और कभी इसे गेम चेंजर कहता है, कभी मास्टर स्ट्रोक. अजीब-सी बात यह है कि जिसे मास्टर स्ट्रोक कहा जाता है, कई बार वही चुनाव हरवा देता है.</p>
<p>पिछले चुनावों में राहुल और अखिलेश ने मिलकर चुनाव लड़ा था . नारा था- लोगों को यह साथ पसंद है. उनके बारे में मीडिया में स्लोगन छाया हुआ था-यूपी के लड़के. इसे युवाओं को लुभाने का बहुत अच्छा नारा माना गया था. लड़कियों की बात यहां कहीं नहीं थी. हालांकि राहुल और अखिलेश युवा होने की उम्र कब की पार कर चुके थे. लेकिन इस तरह के नारे कांग्रेस या समाजवादी पार्टी के कुछ काम नहीं आए थे. आने वाले चुनावों में देखना होगा कि जिसे प्रियंका का औरतों का दिल जीतने वाला नारा बताया जा रहा है, वह कितना कारगर होता है. औरतों को वह कितना लुभा पाती हैं.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 08 Nov 2021 22:49:35 +0530</pubDate>
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