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                <title>independence day india स्वतंत्रता दिवस - Bhartiya Basti</title>
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                <description>independence day india स्वतंत्रता दिवस RSS Feed</description>
                
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                <title>Independence day 2023: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इन सिनेमा हॉल्स में दिखाई जाएंगी फ्री फिल्म, जानें- कैेसे मिलेगी सीट</title>
                                    <description><![CDATA[independence day 2023: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इन सिनेमा हॉल्स में दिखाई जाएंगी फ्री फिल्म, देखें लिस्ट,independence day 2023 Free movie will be screened in these cinema halls on the occasion of Independence Day see list,independence day india स्वतंत्रता दिवस, Lucknow news, entertainment news, uttar pradesh news उत्तर प्रदेश की खबर, ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/lucknow/independence-day-2023-free-movie-will-be-screened-in-these-cinema-halls-on-the-occasion-of-independence-day-see-list/article-13191"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2023-08/free-movie-list.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Independence day 2023: </strong>स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को लेकर प्रशासन ने खास तैयारी कर दी है. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिलाधिकारी ने सिनेमाघरों में फ्री मूवी दिखाने का आदेश जारी किया है.</p>
<p style="text-align:justify;">डीएम सूर्यपाल गंगवार की ओर से जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय पर्व "स्वतन्त्रता दिवस-2023" पर विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी जनपद में संचालित मल्टीप्लेक्सेज में देशभक्ति फिल्मों का निःशुल्क प्रदर्शन किया जाना प्रस्तावित है. उक्त के क्रम में जनपद के मल्टीप्लेक्सेज में, निम्न विवरण के अनुसार, स्कूल के बच्चों एवं जन-सामान्य हेतु हिन्दी फीचर फिल्म का निःशुल्क प्रदर्शन, प्रथम-आगत-प्रथम-पावत (First come first serve) के आधार पर किया जायेगा.</p>
<p style="text-align:justify;"></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>खबरों से अपडेट रहने के लिए आप Bhartiya Basti से Whatsapp से भी जुड़ सकते हैं-  <a href="https://chat.whatsapp.com/EZdHDnqtH4B0ALvJ3CAAAm">https://chat.whatsapp.com/EZdHDnqtH4B0ALvJ3CAAAm</a></strong></p>
<p style="text-align:justify;">यहां देखें लिस्ट</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/2023-08/free-movie-list.jpeg" alt="free movie list"></img></p>
<p style="text-align:justify;"></p>
<p><a href="https://news.google.com/publications/CAAqBwgKMJyqpgswhLW-Aw?r=11&amp;amp;oc=1&amp;amp;hl=en-IN&amp;amp;gl=IN&amp;amp;ceid=IN:en"><strong>गूगल पर बस्ती की खबरों से अपडेट रहने के लिए Subsribe करें भारतीय बस्ती</strong></a><br /><a href="https://news.google.com/publications/CAAqBwgKMJyqpgswhLW-Aw?r=11&amp;amp;oc=1&amp;amp;hl=en-IN&amp;amp;gl=IN&amp;amp;ceid=IN:en"><strong>https://news.google.com/publications/CAAqBwgKMJyqpgswhLW-Aw?r=11&amp;oc=1&amp;hl=en-IN&amp;gl=IN&amp;ceid=IN:en</strong></a></p>
<p style="text-align:justify;">15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है जो ब्रिटिश शासन से देश की आजादी का प्रतीक है.</p>
<p style="text-align:justify;">स्वतंत्रता दिवस पर उन स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता और भावना को याद करता है जिन्होंने ब्रिटिश शासन से देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी. यह दिन राष्ट्रीय गौरव और सम्मान के रूप में पहचाना जाता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Aug 2023 22:53:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Bhartiya Basti]]></dc:creator>
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                <title>OPINION: स्वाधीनता की अंतर्निहित शक्ति को आत्मसात कर वैश्विक नेतृत्व की जिजीविषा करें पैदा</title>
                                    <description><![CDATA[OPINION Cultivate the spirit of global leadership by imbibing the inherent power of freedom]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/india-news/opinion-cultivate-the-spirit-of-global-leadership-by-imbibing-the-inherent-power-of-freedom/article-12175"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2022-08/independence-day-2022.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong><br />हमें स्वतंत्रता प्राप्ति के 76 वां वर्ष माना रहे हैं . हम स्वाधीनता का अमृत महोत्सव वर्ष मना चुके हैं पर इस अमृत महोत्सव के पीछे हमें यह नहीं भूलना है कि भारत देश अब एक स्वतंत्र, आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुका है. अब समय आ गया है कि भारत के तमाम बुद्धिजीवियों,नौजवानों के वैज्ञानिकों और शिक्षित देशवासियों को वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर होने की क्षमता को द्विगुणित करना होगा और विश्व के एक प्रबल नेता की तरह हमें अपनी शक्ति प्रदर्शित करनी होगी. कई वर्षों की परतंत्रता के बाद अनेको जीवन का बलिदान देने और विभिन्न कठोर संघर्षों के बाद हमें स्वतंत्रता प्राप्त हुई है. इस स्वतंत्रता और स्वाधीनता के मूल्य और इसकी अंतर्निहित शक्ति को देश के नौजवानों,शिक्षित नागरिकों को आत्मसात कर इसे पहचानना होगाl समाज के हर वर्ग की खून पसीने और पीढीयों के संघर्ष के बाद प्राप्त स्वतंत्रता को हमें देश की एकता, अखंडता एवं सामाजिक समरसता की शक्ति से चिरकाल तक स्थाई रूप से बनाए रखना है. स्वतंत्रता के महत्व को समझ कर भारत को वैश्विक स्तर पर श्रेष्ठतम मुकाम पर पहुंचाना होगा तब जाकर स्वाधीनता के सही मायने फलीभूत होंगे. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमें स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और बलिदान को किसी भी क्षणों में नहीं भुलाना चाहिए, हमें हाथ में रखकर किसी ने परोस के स्वतंत्रता नहीं दी है, इसके लिए बहाये हुए खून पसीने को विश्मृत न कर के इस की आन बान शान को हमेशा ऊंचा रखना होगा. कभी स्वतंत्रता पर खतरा ना आए इसके लिए यह हमारे देश के दिग्दर्शकों को अपनी कर्मठ जिजीविषा से बनाए रखना होगा. स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद हमारी एकता, अखंडता एवं एकरूपता मजबूत हुई है, पर कतिपय राजनैतिक मंसूबों के कारण आज हम सांप्रदायिकता, क्षेत्रीयता, जातीयता और अलग-अलग भाषाओं के संघर्षों से गुजर रहे हैं. हम आज मंदिर ,मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च के विवाद को लेकर विवाद ग्रस्त हो जाते हैं . कभी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी,मराठी,तेलगु,और कभी असमी भाषा के असमंजस में फंस कर एक दूसरे का विरोध जताना शुरू कर देते हैं. मूलतः हमें राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए सांप्रदायिकता के विद्वेष, ईर्ष्या, जलन और सीमा तथा भाषाई विवाद से परे हटकर देश में अखंडता, सांप्रदायिक सद्भावना का एक शुद्ध वातावरण समाज में तैयार करना होगा, जिसके फलस्वरूप हम विकास की मुख्यधारा में अपना व्यक्तिगत योगदान राष्ट्र के प्रति दे संके. डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा था कि "भारत संपूर्ण विश्व में एक अकेला ऐसा राष्ट्र है जहां मंदिरों ,मस्जिदों, गिरजाघरों और गुरुद्वारों का एक एकात्मक सह अस्तित्व कायम है".</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर आतंकवाद शांति सद्भावना एवं किसी भी राष्ट्र की अखंडता एकता एकरूपता के लिए सबसे बड़ा खतरा है. आतंकवादी कभी अमेरिका और कभी भारत के दिल्ली, मुंबई और अनेक प्रदेशों को अपना निशाना बनाकर आतंक फैलाने का प्रयास करते हैं और आतंकवाद ने कई राज्यों में अपार जनहानि तथा संपत्ति की क्षति पहुंचाई है. इसके अतिरिक्त अलगाववादियों ने भी राष्ट्रीय एकता अखंडता को भंग करने का पुरजोर प्रयास किया है. राजनीतिक पार्टियों के मंसूबों तथा उनकी महत्वाकांक्षाओं के कारण भी अलग-अलग जातियों संप्रदाय तथा पूजा के पवित्र स्थानों को लेकर समाज को अलग करने का बीजारोपण भी किया है. राजनीतिक पार्टियों के चंद राजनेता वोट बैंक बनाने के लिए कभी अल्पसंख्यकों में अलगाव के बीच बोलने का प्रयास करते हैं. कभी आरक्षण के नाम पर पिछड़े वर्गों को देश की मुख्यधारा से बहकाने का प्रयास करते हैं, और कभी किसी विशेष जाति प्रांत या भाषा के हकदार बन कर देश की एकता, अखंडता को खंडित करने का पुरजोर प्रयास करते हैं. यह अत्यंत निंदनीय एवं चिंतनीय सामाजिक पहलू है, जिस संदर्भ में हमें गहन विचार करने की आवश्यकता भी है. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक स्तर पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं अन्य वर्ग सुचारू रूप से भाईचारे में अखंड विश्वास रखते हैं एवं सामान्य जीवन करने में विश्वास रखते हैं. पर राजनैतिक मंसूबों के कारण कुछ राजनेता इन सभी संप्रदायों को आपस में लड़वाकर अपना उल्लू सीधा करने का प्रयास करते हैं. पर यह एक अत्यंत विचारणीय पहलू है कि राष्ट्रीय अखंडता एकता तथा सहयोग को बनाए रखने के लिए केवल राजनेता या प्रशासनिक अधिकारियों का कार्य न होकर हम सबका यह कर्तव्य भी है कि हमें एकजुट होकर राष्ट्र सर्वोपरि की भावना को सदैव बनाए रखने का सतत प्रयास करना चाहिए. हम यदि ऐतिहासिक रूप से देखें की अनेक धर्मो जातियों और अनेक भाषाओं वाला भारत देश पूर्व में अनेक विसंगतियां के बावजूद सदैव एकता के सूत्र में बंधा रहा है. भारत देश में पूर्व में भी अनेक विदेशी जातियां आई और धीरे-धीरे भारत की मूल धारा में समाहित होती गई. भारत में आगमन के साथ इन्हीं जातियों की परंपराएं, विचारधाराएं, संस्कृति, संस्कार भारत की मुख्य धारा में एक रूप हो गई</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और भारत की सांप्रदायिक सौहार्द की भावना आज भी वैसी की वैसी ही है. भारत के जिम्मेदार नागरिक होने के कारण हमारी बड़ी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम इस देश की अखंडता एकता समरूपता और परंपरा को मजबूत बनाकर विश्व के सामने एक मिसाल के रूप में पेश करें. यह सार्वभौमिक सत्य है कि कोई देश यदि संगठित एक रूप और शक्तिमान होता है तो सारा विश्व उसकी इस ऊर्जा शक्ति को चिन्हित कर उसका सम्मान करता है. और उस पर आक्रमण या किसी भी तरह के प्रतिबंध लगाने से भयभीत रहता है. जब तक हम एकता के सूत्र में बंधे तब तक हम मजबूत एवं शक्तिशाली हैं और जब हम खंडित या विघटित हुए तब तब देश कमजोर हुआ है. अब हमें इन विघटनकारी ताकतों और विध्वंस कारी शक्तियों को नियंत्रण में लाकर इन्हें देश से बाहर भगाना होगा और इन पर प्रभावी नियंत्रण कर के देश की संप्रभुता एकता को बनाए रखना होगा. इसके लिए देश के संचार माध्यम, मीडिया, साहित्यकारों, कलाकारों को राष्ट्रीय एकता के लिए अपने को समर्पित भाव से सामने लाकर देश की सेवा करनी होगी.</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 13 Jan 2023 14:27:22 +0530</pubDate>
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