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                <title>बरेली-आगरा-झांसी कॉरिडोर को हरी झंडी, सफर होगा आधा</title>
                                    <description><![CDATA[Bareilly-Agra-Jhansi corridor gets green signal, journey will be halved, बरेली-आगरा-झांसी कॉरिडोर को हरी झंडी, सफर होगा आधा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/bareilly-agra-jhansi-corridor-gets-green-signal-journey-will-be-half/article-24372"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-02/uttar-pradesh-news-_20260204_171113_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में स्थित बरेली जिले में योगी सरकार के ताजा बजट में हाईवे और एक्सप्रेसवे के साथ 6 नए कॉरिडोर को मंजूरी मिलने से रुहेलखंड क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है. प्रस्तावित बरेली-आगरा-झांसी से ललितपुर तक बनने वाला कॉरिडोर उत्तर से दक्षिण की यात्रा को पहले से कहीं अधिक आसान बना सकता है. अगर यह योजना जमीन पर उतरी, तो लंबी दूरी का सफर कम समय में पूरा करना संभव होगा.</p>
<h4><strong>बड़े एक्सप्रेसवे से सीधा कनेक्शन</strong></h4>
<p>इस कॉरिडोर की सबसे खास बात इसका मल्टी-एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी प्लान है. प्रस्ताव के मुताबिक यह मार्ग शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के साथ-साथ गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे से भी सीधे जुड़ जाएगा. इससे माल परिवहन, व्यापार और निजी यात्रा तीनों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी इससे नई गति मिल सकती है.</p>
<h4><strong>बरेली पहले से हाईवे से जुड़ा, एक्सप्रेसवे की थी कमी</strong></h4>
<p>वर्तमान में बरेली, लखनऊ और दिल्ली से नेशनल हाईवे के जरिए सीधे जुड़ा हुआ है. वहीं उत्तराखंड से बेहतर संपर्क के लिए बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे का निर्माण कार्य जारी है, जिसमें बरेली से पीलीभीत तक लगभग आधा काम पूरा हो चुका है.</p>
<p>फिर भी जिले को अब तक किसी बड़े एक्सप्रेसवे का लाभ नहीं मिला था. इसी कमी को दूर करने के लिए शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है.</p>
<h4><strong>नवाबगंज और बहेड़ी से गुजरेगा नया मार्ग</strong></h4>
<p>जानकारी के अनुसार यह नया कॉरिडोर जिले की नवाबगंज और बहेड़ी तहसील से होकर निकाला जा रहा है. प्रस्तावित 5वां कॉरिडोर बनने के बाद बरेली में इसका जुड़ाव शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे से होगा, जबकि बदायूं के पास बिनावर क्षेत्र में यह गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा.</p>
<p>आगे मथुरा में यही मार्ग यमुना एक्सप्रेसवे से मिल जाएगा, जिससे उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों के बीच यात्रा और भी सुगम हो सकती है.</p>
<h4><strong>विभागीय स्तर पर अभी स्पष्टता नहीं</strong></h4>
<p>लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर आधिकारिक स्तर पर कुछ सवाल भी बने हुए हैं. एनएचएएआई के परियोजना निदेशक नवरत्न और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय कुमार ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि यह प्रस्ताव उनके विभाग की ओर से नहीं भेजा गया है. इससे संकेत मिलता है कि योजना अभी शुरुआती या विचार चरण में हो सकती है.</p>
<h4><strong>बजट और अन्य परियोजनाओं की स्थिति</strong></h4>
<p>बीते वर्ष जिले में सड़कों और पुलियों के निर्माण के लिए लगभग 2500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए थे, लेकिन स्वीकृति के तौर पर केवल 318 करोड़ रुपये ही मिले. इस राशि से नई सड़कों के निर्माण के साथ मरम्मत कार्य भी कराया गया.</p>
<p>इस बार प्रशासन ने करीब 2700 करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे हैं. इनमें सैटेलाइट से बैरियर टू तक 6 लेन सड़क के लिए 206 करोड़ रुपये की योजना शामिल है.</p>
<h4><strong>6 लेन से 8 लेन की तैयारी</strong></h4>
<p>यह ध्यान देने योग्य है कि संबंधित मार्ग को अब 6 लेन के बजाय 8 लेन बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इससे भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को संभालने में मदद मिल सकती है.</p>
<h4><strong>नाथ कॉरिडोर और अन्य योजनाएं</strong></h4>
<p>नाथ कॉरिडोर में तपेश्वर नाथ मंदिर को जोड़ने वाले मार्ग के चौड़ीकरण और अंडरपास निर्माण के लिए 54 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है. यह अंडरपास रेलवे यार्ड के पास बनाया जाना प्रस्तावित है.</p>
<p>इसके अतिरिक्त बरेली-बीसलपुर रोड के चौड़ीकरण की लगभग 500 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना भी सूची में शामिल है. विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों को भी प्राथमिकता के आधार पर भेजा गया है.</p>
<h4><strong>रोजगार के अवसर </strong></h4>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरिडोर बनने से जिन जिलों से यह मार्ग गुजरेगा, वहां उद्योग, लॉजिस्टिक्स और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा. इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और आसपास के कस्बों का तेजी से विकास संभव है. कुछ अधिकारियों ने अभी इस योजना पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, इसलिए अंतिम मंजूरी का इंतजार रहेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 10:54:47 +0530</pubDate>
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                <title>यूपी के इस गांव में रक्षा औद्योगिक गलियारे की तैयारी तेज, खेती पर पूरी तरह रोक</title>
                                    <description><![CDATA[Preparations for a defense industrial corridor are underway in this UP village, where farming is completely banned, यूपी के इस गांव में रक्षा औद्योगिक गलियारे की तैयारी तेज, खेती पर पूरी तरह रोक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/preparation-for-defense-industrial-corridor-in-this-village-of-up/article-24353"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-12/up-news-_20251212_135058_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश:</strong> उत्तर प्रदेश में स्थित आगरा जिले के बिझामई गांव में अब खेती से जुड़े नियम पूरी तरह बदलने वाले हैं. उप्र एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने यहां की चिन्हित जमीन पर फसल बोने पर सख्त रोक लगा दी है. रबी की मौजूदा फसल कटने के बाद किसान अब किसी भी तरह की नई बोआई नहीं कर पाएंगे.</p>
<h4><strong>नियम तोड़ा तो जुर्माना और कानूनी कार्रवाई</strong></h4>
<p>प्रशासन ने साफ कर दिया है कि प्रतिबंध के बावजूद अगर कोई किसान इन खेतों में खेती करता पाया गया, तो उसके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा. इसके साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. इस फैसले की जानकारी देने के लिए गांव और आसपास के इलाकों में चेतावनी बोर्ड भी लगा दिए गए हैं.</p>
<h4><strong>रक्षा औद्योगिक गलियारे के लिए हो रहा भूमि अधिग्रहण</strong></h4>
<p>यह पूरी जमीन रक्षा औद्योगिक गलियारे की परियोजना के तहत ली जा रही है. बिझामई गांव में कुल 123 हेक्टेयर भूमि इस योजना में शामिल है, जो करीब 380 किसानों की है. पहले चरण में अधिकांश जमीन खरीदी जा चुकी है और अब बचे हिस्से को अधिग्रहण के माध्यम से लिया जाएगा.</p>
<h4><strong>बचे हिस्से के लिए अधिग्रहण की तैयारी</strong></h4>
<p>दूसरे चरण में जिन खेतों की खरीद बाकी रह गई थी, उनमें से ज्यादातर जमीन पहले ही ली जा चुकी है. अब केवल 7.5 हेक्टेयर भूमि बची है, जिस पर सहमति नहीं बन पाई. प्रशासन ने इसका अधिग्रहण करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही एडीएम भूमि एवं अध्याप्ति कार्यालय भेजा जाएगा. इस प्रक्रिया में लगभग 30 किसान प्रभावित होंगे.</p>
<h4><strong>मुआवजे को लेकर किसानों की मांग</strong></h4>
<p>प्रभावित किसान लखनऊ एक्सप्रेसवे के मानक के अनुसार मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं. प्रशासन की ओर से बताया गया है कि जिन किसानों का मुआवजा तय होगा, वह न्यायालय में जमा कराया जाएगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.</p>
<h4><strong>फिलहाल खेतों में खड़ी हैं फसलें</strong></h4>
<p>अभी बिझामई गांव की जमीन पर सरसों, गेहूं और कुछ अन्य रबी फसलें लगी हुई हैं. अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को केवल रबी फसल तक की ही छूट दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है. अधिकांश किसानों को पहले ही भुगतान किया जा चुका है, इसलिए जमीन अब यूपीडा के नियंत्रण में आ चुकी है.</p>
<h4><strong>प्रशासन का स्पष्ट संदेश</strong></h4>
<p>एसडीएम सदर सचिन राजपूत के अनुसार, 7.5 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी. इसके बाद पूरे क्षेत्र में रक्षा औद्योगिक गलियारे का विकास तेज गति से आगे बढ़ेगा. प्रशासन ने किसानों से नियमों का पालन करने और किसी भी तरह की अवैध खेती से बचने की अपील की है.</p>
<h4><strong>औद्योगिक निवेश की बढ़ी हलचल</strong></h4>
<p>यूपीडा के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में दो से तीन बड़ी कंपनियां इस इलाके का दौरा कर सकती हैं. जमीन का निरीक्षण कर यहां उद्योग लगाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी. इससे क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:54:12 +0530</pubDate>
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