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                <title>durga puja - Bhartiya Basti</title>
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                <title>Basti Durga Pooja: दुर्गा पूजा में बस्ती के ये पंडाल आपने देखे या नहीं? जानें- यहां 6 प्रसिद्ध पंडालों के बारे में, यहां पता करें कैसे जाएं?</title>
                                    <description><![CDATA[Basti Durga Pooja: दुर्गा पूजा में बस्ती के ये पंडाल आपने देखे या नहीं? जानें- यहां 6 प्रसिद्ध पंडालों के बारे में,Basti Durga Puja 2025 6 famous pandals in Basti during Durga Puja]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/basti-durga-puja-2025-6-famous-pandals-in-basti-during-durga-pooja/article-22936"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-10/basti-durga-puja-2025.jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश स्थित बस्ती में दुर्गा पूजा के कई पंडाल लगे हैं. हालांकि इसमें कुछ ऐसे हैं जो काफी ज्यादा प्रसिद्ध हैं. इसमें अस्पताल चौराहे के पास नंदा बाबा का पंडाल, रेलवे स्टेशन स्थित काली मंदिर में सजा पंडाल समेत 4 पंडाल और हैं.</p>
<p>आइए आपको बस्ती के सभी 6 प्रसिद्ध पंडालों के बारे में बताने के साथ ही आपको यह भी बताते हैं कि आप वहां तक कैसे पहुंचेंगे</p>
<h3>1- काली मंदिर रेलवे स्टेशन</h3>
<p>बस्ती रेलवे स्टेशन के पास स्थित शक्तिपीठ काली मंदिर में माता रानी का पंडाल बहुत प्रसिद्ध है. यहां पहुंचने के लिए आपको बस रेलवे स्टेशन पहुंचना है. पास में ही काली मंदिर स्थित है जिसके प्रांगण में मां की प्रतिमा स्थापित है.</p>
<h3>2- नंदा बाबा का पंडाल</h3>
<p>अस्पताल चौराहे पर स्थित नंदा बाबा का पंडाल भी काफी प्रसिद्ध है. यहां पहुंचने के लिए आपको जिला अस्पताल पहुंचना है. अस्पताल रोड से दक्षिण दरवाजा रोड जाने वाली सड़क पर ही मंदिर प्रांगण में माता रानी की प्रतिमा स्थापित है.</p>
<h3>3- गुफा पंडाल</h3>
<p>रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर स्थित सुर्ती हट्टा के पास गुफा कमेटी का पंडाल इस बार अयोध्या में राम मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है. यहां अगर आप जाना चाहते हैं तो सुर्ती हट्टा जाना होगा.</p>
<h3>4- कंपनी बाग पर मातारानी की प्रतिमा</h3>
<p>मां दुर्गा की प्रतिमा कंपनी बाग स्थित शिव मंदिर के सामने स्थापित किया गया है. यहां जाने के लिए आपको कंपनीबाग पहुंचना होगा. चौराह से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित यह प्रतिमा आप देख सकते हैं.</p>
<h3>5- पागल कमेटी</h3>
<p>पागल कमेटी द्वारा स्थापित प्रतिमा देखने के लिए भी आपको रोडवेज या कंपनी बाग के रास्ते आना होगा. गांधी नगर के रास्ते पर ही यह प्रतिमा आपको दिखेगा.</p>
<h3>6-काली माता पंडाल</h3>
<p>बस्ती में ही काली माता का एक पंडाल सजा हुआ है. यह भी पक्के वाले रास्ते पर ही है. </p>
<p>6 अक्टूबर को यह सभी प्रतिमाएं विसर्जित की जाएंगी. उससे पहले आप पंडालों में जाकर माता रानी के दर्शन कर सकते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> Basti News </category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 21:55:03 +0530</pubDate>
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                <title>नवरात्र के सातवें दिन करें काली मां की पूजा-अर्चना, इन मंत्रों का करें जाप, न करें ये गलती</title>
                                    <description><![CDATA[Kalratri Mata ki pooja on 7th day of navratri poojan vidhi in hindi,नवरात्र के सातवें दिन करें काली मां की पूजा-अर्चना, इन मंत्रों का करें जाप, न करें ये गलती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/astrology-today-rashifal/kalratri-mata-ki-pooja-on-7th-day-of-navratri-poojan-vidhi-in-hindi/article-22886"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-09/navratri-seventh-day-kalratri-mata.jpg" alt=""></a><br /><p>नवरात्रि के सातवें दिन कालरात्रि माता की पूजा की जाती है. इन्हें माँ पार्वती का एक अत्यंत उग्र रूप माना जाता है. इनके नाम का अर्थ है: 'काल' - समय/मृत्यु और 'रात्रि' - रात. अपने नाम के अनुसार, इन्हें अंधकार का नाश करने वाली माना जाता है.</p>
<p><strong>कालरात्रि के बारे में</strong><br />देवी कालरात्रि का रंग गहरा काला है. वे गधे पर सवार हैं. देवी के चार हाथ हैं; दोनों दाहिने हाथ अभय और वरद मुद्रा में रहते हैं; और बाएँ दो हाथों में तलवार और अंकुश धारण किए हुए हैं.</p>
<p><strong>कथा</strong><br />जैसा कि कथा है, शुंभ और निशुंभ नामक दो राक्षस थे, जिन्होंने पूरे देवलोक (देवताओं के पवित्र निवास) पर कब्ज़ा कर लिया था. देवताओं के राजा इंद्र बुरी तरह पराजित हुए. अपना घर वापस पाने के लिए, उन्होंने माँ पार्वती से मदद मांगी. जब वे उन्हें पूरी कहानी सुना रहे थे, तब वह अंदर स्नान कर रही थीं. उनकी मदद के लिए, उन्होंने चंडी को उनकी सहायता के लिए भेजा.</p>
<p>जब देवी चंडी दैत्यों से युद्ध करने गईं, तो शुंभ और निशुंभ ने चंड और मुंड को युद्ध के लिए भेजा. इसलिए, उन्होंने उनका वध करने के लिए माँ कालरात्रि की रचना की. उनके वध के बाद, उनका नाम चामुंडा पड़ा. उसके बाद रक्तबीज आया. यह दैत्य अपने रक्त से अपना शरीर पुनः उत्पन्न कर सकता था. जब भी देवी उसे मारतीं और उसका रक्त ज़मीन पर गिरता, तो दैत्य अपने लिए एक नया शरीर बना लेता. इसलिए, कालरात्रि दुर्गा ने उसका सारा रक्त पीने का निश्चय किया, ताकि ज़मीन पर कुछ भी न गिरे; और यह वास्तव में काम कर गया!</p>
<p>कालरात्रि से जुड़ी कई अन्य किंवदंतियाँ हैं. उनमें से एक यह बताती है कि माँ पार्वती कैसे दुर्गा बनीं. उस कथा के अनुसार, दैत्य दुर्गासुर माँ पार्वती की अनुपस्थिति में कैलाश (शिव-पार्वती का पवित्र निवास) पर आक्रमण करने का प्रयास कर रहा था. इसलिए, उन्होंने उससे निपटने के लिए कालरात्रि को भेजा. दैत्यों के रक्षकों ने कालरात्रि पर आक्रमण करने की कोशिश की, लेकिन वह आकार में और भी बड़ी होती गई. अंततः, वह इतनी शक्तिशाली हो गई कि उसे संभालना मुश्किल हो गया. दुर्गासुर को जाना पड़ा, लेकिन माँ कालरात्रि ने उससे कहा कि उसकी मृत्यु निकट है. दूसरी बार जब दुर्गासुर ने कैलाश पर हमला करने की कोशिश की, तो माँ पार्वती ने उससे युद्ध किया और उसे मार डाला. इसलिए उनका नाम दुर्गा पड़ा.</p>
<p><strong>ज्योतिषीय पहलू</strong><br />शनि ग्रह पर कालरात्रि माता का शासन है. इनकी पूजा से इस ग्रह के दुष्प्रभाव को शांत करने में मदद मिलती है.</p>
<p><strong>मंत्र</strong><br />ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥</p>
<p><strong>प्रार्थना मंत्र:</strong><br />एक्वेनि जपाकर्णपूरा नग्ना खरस्थिता.<br />लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥<br />वम्पाडोल्लसललोह लताकान्तकभूषणा.<br />वर्धन मूर्धाध्वज कृष्ण कालरात्रिर्भयङ्करी॥</p>
<p><strong>स्तुति:</strong><br />या देवी सर्वभू‍तेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता.<br />नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥</p>
<p><strong>ध्यान मंत्र:</strong><br />करालवन्दना घोरां मुक्ताकेशी चतुर्भुजम्.<br />कालरात्रिम् करालिना दिव्यम्विद्युतमाला विभूषितम्॥<br />दिव्यम् लोहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व करम्बुजाम्.<br />अभयम् वरदाम् चैव दक्षिणोध्वाघः पर्णिकाम् मम॥<br />महामेघ प्रभाम् श्यामम् तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा.<br />घोरदंश कारालास्यां पीनोनात्र पयोधराम्॥<br />सुख पप्रसन्न वदना स्मेरेन्न सरोरुहाम्.<br />एवम् सचियन्तयेत् कालरात्रिम् सर्वकाम समृद्धिदाम्॥</p>
<p><strong>स्तोत्र:</strong><br />हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती.<br />कालमाता कालिद्रपध्नी कामादिष कुपानविता॥<br />कामबीजपंदा कामबीजसंदर्भिनी.<br />कुमतिघ्नी कुलीनार्तिनाशिनी कुल कामिनी॥<br />क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्रवर्णेन कालकण्टकघातिनी.<br />कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥</p>
<p><strong>कवच मंत्र:</strong><br />ऊँ क्लीं मे हृदयम् पातु पादौ श्रीकालरात्रि.<br />ललते सततम् पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥<br />रसानाम् पातु कौमारी,भैरवी चक्षुषोर्भम्.<br />कटौ पृष्ठे महेशनि, कर्णोश्करभामिनी॥<br />वैलानि तु स्थानाभि अर्थात् च क्वासेन हि.<br />तानि सर्वाणि मे देवीसतन्तपतु स्तम्भिनी॥</p>
<p>इसके साथ ही हम आशा करते हैं कि आप नवरात्रि के सातवें दिन का भरपूर आनंद उठाएंगे. माँ कालरात्रि आपको जीवन की सभी अच्छाइयों का आशीर्वाद प्रदान करें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Astrology In Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 19:07:42 +0530</pubDate>
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