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                <title>योगी सरकार का बड़ा फैसला: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए 895 करोड़ मंजूर, 6 जिलों में भूमि अधिग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[Yogi government's big decision: Rs 895 crore approved for Greenfield Expressway, land acquisition in 6 districts, योगी सरकार का बड़ा फैसला: ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए 895 करोड़ मंजूर, 6 जिलों में भूमि अधिग्रहण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/lucknow/big-decision-of-yogi-government-rs-895-crore-approved-for/article-24226"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-01/uttar-pradesh-news-_20251226_141018_00002.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ने के लिए प्रस्तावित नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर अब काम तेज होने वाला है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सरकार की ओर से भारी-भरकम बजट को मंजूरी दे दी गई है, जिससे कई जिलों में विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है.</p>
<h4><strong>हरदोई से फर्रुखाबाद तक बनेगा नया एक्सप्रेसवे</strong></h4>
<p>प्रस्तावित प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हरदोई से शुरू होकर फर्रुखाबाद तक जाएगा. यह नया रूट न केवल दो बड़े एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा, बल्कि मध्य यूपी के कई जिलों को बेहतर सड़क सुविधा भी देगा. इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से लंबी दूरी का सफर और अधिक सुगम और तेज हो जाएगा.</p>
<h4><strong>जमीन अधिग्रहण के लिए जारी होगी बड़ी राशि</strong></h4>
<p>सरकार ने इस परियोजना के लिए कुल 895 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है. इसमें से अधिकांश रकम जमीन अधिग्रहण पर खर्च की जाएगी. अलग-अलग जिलों के जिलाधिकारियों को उनके क्षेत्र में आने वाली जमीन के अधिग्रहण के लिए राशि जारी की जाएगी, ताकि परियोजना में किसी तरह की देरी न हो.</p>
<h4><strong>जिलावार तय की गई धनराशि</strong></h4>
<p>स्वीकृत बजट के अंतर्गत:-</p>
<ul>
<li>इटावा जिले के लिए 75 करोड़ रुपये</li>
<li>कन्नौज जिले के लिए 63 करोड़ रुपये</li>
<li>मैनपुरी जिले के लिए 300 करोड़ रुपये</li>
<li>फर्रुखाबाद जिले के लिए सबसे अधिक 466.20 करोड़ रुपये</li>
<li>हरदोई जिले को 21 करोड़ रुपये</li>
<li>शाहजहांपुर जिले को 26.50 करोड़ रुपये</li>
</ul>
<h4><strong>पहले ही मिल चुकी है प्रशासनिक मंजूरी</strong></h4>
<p>इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को पिछले वर्ष ही प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति मिल चुकी थी. अब बजट जारी होने के बाद जमीन अधिग्रहण और आगे की प्रक्रियाएं तेज होने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य है कि काम समय पर शुरू हो और तय समयसीमा में पूरा किया जा सके.</p>
<h4><strong>यूपीडा को सौंपी गई जिम्मेदारी</strong></h4>
<p>इस पूरे प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को दी गई है. यूपीडा पहले भी कई बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है, ऐसे में इस योजना को लेकर भी तेजी और गुणवत्ता की उम्मीद जताई जा रही है.</p>
<h4><strong>आवागमन और विकास को मिलेगा बड़ा फायदा</strong></h4>
<p>एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद आगरा, लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा. इससे व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 11:56:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>UP में जमीन मुआवजे का बड़ा खेल! DM की जांच से खुलेंगे करोड़ों के राज</title>
                                    <description><![CDATA[A massive land compensation scam in Uttar Pradesh! A DM's investigation will uncover secrets worth crores, UP में जमीन मुआवजे का बड़ा खेल! DM की जांच से खुलेंगे करोड़ों के राज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/lucknow/big-game-of-land-compensation-in-up-dms-investigation-will/article-23567"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-11/uttar-pradesh-news-_20251028_082544_00001.png" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में स्थित आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे जिसे प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जाता है अब एक ऐसे विवाद में घिर चुका है, जिसने कई दफ्तरों में बेचैनी बढ़ा दी है. भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजों में ऐसी अनियमितताएँ सामने आई हैं, जिनकी परतें खुलते ही कई पुराने फैसलों पर सवाल खड़े हो गए हैं.</p>
<p>राजस्व परिषद के अध्यक्ष अनिल कुमार ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ की जिलाधिकारी विशाखा जी को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है. प्रारंभिक दस्तावेज़ों की जाँच में साफ संकेत मिले हैं कि उस समय के एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की भूमिका संदिग्ध रही है. यह सिर्फ लखनऊ का मसला नहीं है, संकेत हैं कि यह गड़बड़ी कई जिलों में फैली हो सकती है.</p>
<h4><strong>दो हफ्तों में पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश</strong></h4>
<p>जिलाधिकारी को कहा गया है कि मुआवजे से जुड़े हर एक प्रकरण को दुबारा खंगाला जाए और 2 हफ्ते में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. साथ ही, जिन अधिकारियों, कर्मचारियों या लाभार्थियों को गलत तरीके से मुआवजा मिला, उनसे वसूली करने का आदेश भी दे दिया गया है.</p>
<h4><strong>2013 के निर्देश और 302 किलोमीटर की महत्वाकांक्षा</strong></h4>
<p>13 मई 2013 को तत्कालीन मुख्य सचिव ने 10 जिलों के डीएम को यूपीडा के लिए जमीन उपलब्ध कराने को कहा था. उसी समय 302 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की तय संरेखण भी जारी की गई थी. परंतु इसी प्रक्रिया में लखनऊ के सरोसा–भरोसा गांव की भूमि पर ऐसा खेल खेला गया जिसने सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं.</p>
<h4><strong>पुनरीक्षण ने खोली गुत्थी</strong></h4>
<p>2 नवंबर 2022 को एक आवेदन में सवाल उठाया गया कि जिस जमीन पर मुआवजा दिया गया, उसकी चौहद्दी ही स्पष्ट नहीं है. 2024 में यह मामला फिर राजस्व परिषद पहुँचा. परिषद ने यूपीडा से पूरा अधिग्रहण रिकॉर्ड बुलाया, और तभी असली हेराफेरी सामने आई. ग्राम समाज की जमीन को कागजों में ऐसे बदल दिया गया जैसे वह पहले से कुछ व्यक्तियों के कब्जे में थी. और फिर उसी आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया.</p>
<p>जांच में यह भी संकेत मिले कि लखनऊ के सरोसा–भरोसा के अलावा नटकौरा, दोना और 3 अन्य गांवों में भी इसी तरह की गड़बड़ियाँ हो सकती हैं. आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़े 8 जिलों में इस तरह की अनियमितताओं की आशंका जताई गई है.</p>
<h4><strong>कैसे दो बीघा जमीन का बना करोड़ों का खेल</strong></h4>
<p>सरोसा–भरोसा गांव में गाटा संख्या–3 की 68 बीघा भूमि का मामला सबसे पहले शक के घेरे में आया. अधिकारियों ने दिखाया कि इस भूमि के लगभग 2 बीघा हिस्से पर अनुसूचित जाति के दो व्यक्तियों भाई लाल और बनवारी लाल का 2007 से पहले से कब्ज़ा था. इसी आधार पर 1,09,86,415 रुपये का मुआवजा जारी कर दिया गया. तत्कालीन लेखपाल ने पड़ोसियों के बयानों को आधार बनाकर दावा किया कि लाभार्थी पुराने कास्तकार थे. राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार और एसडीएम ने भी उसी रिपोर्ट को सही मानते हुए मुआवजा दे दिया.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 21:10:05 +0530</pubDate>
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