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                <title>UPFarmer - Bhartiya Basti</title>
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                <title>UP में इन 16 चीनी मिलों पर 671 करोड़ बकाया, त्योहार से पहले किसानों की बढ़ी टेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[16 sugar mills in UP owe Rs 671 crore, increasing farmers' tension ahead of the festival season, UP में इन 16 चीनी मिलों पर 671 करोड़ बकाया, त्योहार से पहले किसानों की बढ़ी टेंशन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/671-crore-outstanding-on-these-16-sugar-mills-in-up/article-24704"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-03/uttar-pradesh-news_20260302_125738_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में स्थित बरेली मंडल के खेतों में दिन-रात मेहनत करने वाले गन्ना किसानों के लिए इस बार होली की खुशियां अधूरी रहने की आशंका है. त्योहार नजदीक है, लेकिन किसानों की जेब अभी तक खाली है. वजह यह है कि मंडल की कई चीनी मिलों पर भारी भुगतान अटका हुआ है, जिससे ग्रामीण इलाकों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं.</p>
<p>ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गन्ना भुगतान की अहम भूमिका होती है. जब समय पर पैसा मिलता है तो बाजार में रौनक रहती है, लेकिन भुगतान अटकने से किसान ही नहीं, स्थानीय व्यापार भी प्रभावित होता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही माहौल बनता दिखाई दे रहा है.</p>
<h4><strong>मिलों पर भारी रकम बकाया</strong></h4>
<p>मौजूदा पेराई सत्र में मंडल की 16 चीनी मिलों पर कुल 671.16 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया बताया जा रहा है. सबसे ज्यादा बकाया बरखेड़ा की बजाज शुगर मिल पर है, जिस पर किसानों का 154.24 करोड़ रुपये फंसा हुआ है. इसके बाद मकसूदापुर की बजाज शुगर मिल है, जहां करीब 115 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है.</p>
<p>किसानों का कहना है कि 14 दिन में भुगतान के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आती है. भुगतान में देरी से किसानों की आर्थिक योजना पूरी तरह बिगड़ रही है.</p>
<h4><strong>लाखों किसानों पर असर</strong></h4>
<p>गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार मंडल में 5 लाख से अधिक किसान 16 चीनी मिलों को करीब 13 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति करते हैं. इतनी बड़ी संख्या में किसान इस भुगतान पर निर्भर हैं.</p>
<p>होली नजदीक होने से किसानों की उम्मीदें और बढ़ गई थीं कि इस बार बकाया समय पर मिल जाएगा. मगर अभी तक स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा है. अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो त्योहार पर ग्रामीण इलाकों में खर्च और खरीदारी पर असर पड़ना तय माना जा रहा है.</p>
<h4><strong>जिलेवार बकाया ने बढ़ाई चिंता</strong></h4>
<p>आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा बकाया पीलीभीत जिले के किसानों का है, जहां 285.60 करोड़ रुपये अटके हुए हैं. इसके बाद शाहजहांपुर के किसानों के 216.85 करोड़ रुपये लंबित हैं.</p>
<p>बरेली जिले के किसानों का 120.55 करोड़ और बदायूं के किसानों का 48.16 करोड़ रुपये अभी तक नहीं मिला है. इन आंकड़ों ने किसानों की बेचैनी और बढ़ा दी है, क्योंकि त्योहार से पहले पैसे की जरूरत सबसे ज्यादा होती है.</p>
<h4><strong>ब्याज को लेकर भी किसानों में नाराजगी</strong></h4>
<p>सूत्रों के मुताबिक जब किसान गन्ने की बुवाई करते हैं, तब सहकारी समितियों के जरिए उन्हें खाद और बीज उपलब्ध कराया जाता है. इसकी रकम गन्ना बेचते समय ब्याज सहित काट ली जाती है.</p>
<p>लेकिन जब मिलें भुगतान रोकती हैं तो किसानों को बकाया रकम पर ब्याज नहीं दिया जाता. अक्सर चीनी के दाम कम होने का हवाला देकर देरी को सही ठहराया जाता है. किसानों का आरोप है कि कुछ मिलें वर्षों से यही तरीका अपनाती रही हैं.</p>
<h4><strong>अधिकारियों की चेतावनी</strong></h4>
<p>उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र के मुताबिक <em>"हाल ही में बकाया रखने वाली मिलों के अधिकारियों को बुलाकर बैठक की गई है. उनसे भुगतान का स्पष्ट कार्यक्रम मांगा गया है. यह ध्यान देने योग्य है कि अगर तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी."</em> वर्तमान में किसानों की नजर इसी पर टिकी है कि होली से पहले उनकी मेहनत की कमाई खाते में पहुंचती है या नहीं.</p>
<h4><strong>इन मिलों पर करोड़ों रुपये का बकाया</strong></h4>
<ul>
<li>द्वारिकेश शुगर मिल, फरीदपुर - 27.96 करोड़ रुपये</li>
<li>केसर शुगर मिल, बहेड़ी - 31.68 करोड़ रुपये</li>
<li>धामपुर शुगर मिल, गीरगंज - 24.95 करोड़ रुपये</li>
<li>त्रिवटीनाथ मिल, बहादुरगंज - 1.39 करोड़ रुपये</li>
<li>सहकारी चीनी मिल, सेमीखंडा - 34.57 करोड़ रुपये</li>
<li>एलएच शुगर मिल, पीलीभीत - 55.24 करोड़ रुपये</li>
<li>बजाज शुगर मिल, बरखेड़ा - 154.24 करोड़ रुपये</li>
<li>सहकारी चीनी मिल, बीसलपुर - 23.92 करोड़ रुपये</li>
<li>सहकारी चीनी मिल, पूरनपुर - 52.20 करोड़ रुपये</li>
<li>डालमिया शुगर मिल, निगोही (शाहजहांपुर) - 23.70 करोड़ रुपये</li>
<li>बजाज शुगर मिल, मकसूदापुर (शाहजहांपुर) - 115.40 करोड़ रुपये</li>
<li>बिरला-अवध शुगर मिल, रोजा (शाहजहांपुर) - 16.76 करोड़ रुपये</li>
<li>सहकारी चीनी मिल, तिलहर (शाहजहांपुर) - 35.41 करोड़ रुपये</li>
<li>सहकारी चीनी मिल, पुवांया (शाहजहांपुर) - 25.58 करोड़ रुपये</li>
<li>यदु शुगर मिल, बिसौली (बदायूं) - 27.02 करोड़ रुपये</li>
<li>सहकारी चीनी मिल, बदायूं - 21.24 करोड़ रुपये</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 14:02:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM Yogi ने 2.51 लाख किसानों को दी बड़ी राहत, किसानों के खाते में  पहुंचे 460 करोड़ रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[CM Yogi gave a big relief to 2.51 lakh farmers, Rs 460 crore reached the farmers' accounts, CM Yogi ने 2.51 लाख किसानों को दी बड़ी राहत, किसानों के खाते में  पहुंचे 460 करोड़ रुपए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/cm-yogi-gave-big-relief-to-251-lakh-farmers-rs/article-24543"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-02/uttar-pradesh-news_20260218_153824_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने किसानों और आपदा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहारा देने के लिए शनिवार को बड़े पैमाने पर धनराशि जारी की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों के खातों में सीधे रकम ट्रांसफर कर राहत पहुंचाने का दावा किया.</p>
<p>सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ 2025) के तहत करीब 2.51 लाख किसानों को कुल 285 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई. इसके साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अंतर्गत लगभग 3500 प्रभावित परिवारों को 175 करोड़ रुपये की मदद उपलब्ध कराई गई. सरकार का कहना है कि यह भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके.</p>
<h4><strong>कृषि ढांचे को मजबूत करने की पहल</strong></h4>
<p>कार्यक्रम में कृषि अवसंरचना से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स की भी आधारशिला रखी गई. बागपत, शामली, कासगंज और भदोही में उप कृषि निदेशक कार्यालय तथा मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के निर्माण को मंजूरी दी गई. झांसी के मऊरानीपुर स्थित राजकीय भूमि संरक्षण केंद्र में 50 बेड के छात्रावास भवन का शिलान्यास हुआ, जबकि लखनऊ में स्मार्ट कृषि ब्यूरो स्टूडियो इकाई शुरू करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई.</p>
<p>मुख्यमंत्री ने किसानों को होली की शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य और केंद्र की संयुक्त व्यवस्था खेती-किसानी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि हाल ही में पारित 2026-27 के बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों और कमजोर वर्गों के लिए कई नई योजनाओं को शामिल किया गया है.</p>
<h4><strong>बीमा और दुर्घटना सहायता पर जोर</strong></h4>
<p>सरकार के अनुसार फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर राहत देना है. सूखा, अतिवृष्टि या अन्य कारणों से नुकसान होने पर बीमा भुगतान सुरक्षा कवच का काम करता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले दुर्घटना सहायता का दायरा सीमित था, लेकिन अब किसान के साथ उसके परिवार, बटाईदार और सहकर्मी किसानों को भी योजना में शामिल किया गया है.</p>
<p>राज्य सरकार की मौजूदा व्यवस्था के तहत किसी किसान या उसके परिजन की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि आज जिन 3500 पीड़ित परिवारों को लाभ मिला है, उनसे पहले 16 जून 2025 को 11,690 लाभार्थियों में 561.86 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं. जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत धनराशि समय से खातों में पहुंचना सुनिश्चित करें.</p>
<h4><strong>आपदा मित्रों की भूमिका बढ़ाने पर जोर</strong></h4>
<p>आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए सरकार स्वयंसेवकों के नेटवर्क को भी विस्तार दे रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आपदा मित्र’ स्थानीय स्तर पर पहली प्रतिक्रिया देने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं. प्रधानमंत्री की पहल के अनुरूप प्रदेश में इस अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है.</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक 25 जिलों में एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र और भारत स्काउट एंड गाइड से जुड़े 29,772 युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ा गया है. इन स्वयंसेवकों को 7 दिवसीय प्रशिक्षण, पहचान पत्र और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर किट दी जा रही है. किट में लाइफ जैकेट, सर्च टॉर्च, फर्स्ट-एड बॉक्स, हेलमेट और अन्य जरूरी उपकरण शामिल हैं.</p>
<p>राज्य सरकार ने प्रशिक्षित युवाओं के लिए तीन वर्ष का जीवन और चिकित्सा बीमा कवर भी स्वीकृत किया है. इसके लिए 10 फरवरी को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के बीच समझौता किया गया, जिसके तहत प्रत्येक आपदा मित्र को 5 लाख रुपये का बीमा संरक्षण मिलेगा. अभी तक 2959 स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है और शेष बैचों को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जा रहा है.</p>
<h4><strong>आपदा राहत व्यवस्था को तेज करने की कोशिश</strong></h4>
<p>सरकार का दावा है कि अब लक्ष्य यह है कि बाढ़, बिजली गिरने या आग जैसी घटनाओं में पीड़ितों को 24 घंटे के भीतर आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाए. वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य आपदा मोचक निधि में 876 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.</p>
<p>आधिकारिक जानकारी के अनुसार फसल नुकसान से प्रभावित 5,14,322 किसानों को 260 करोड़ रुपये कृषि निवेश अनुदान के रूप में दिए जा चुके हैं. जनहानि के 5398 मामलों में 216 करोड़ रुपये और मकान क्षति के 27,448 प्रभावित परिवारों को 24 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं.</p>
<p>प्राकृतिक आपदाओं की अग्रिम चेतावनी के लिए प्रदेश के 5 प्रमुख शहरों लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं. इसके अलावा 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ब्लॉक स्तर पर लगभग 2000 ऑटोमेटिक रेन गेज लगाने का काम अंतिम चरण में बताया गया है.</p>
<h4><strong>रोजगार से भी जोड़े जाएंगे आपदा मित्र</strong></h4>
<p>मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि भविष्य में होमगार्ड की प्रस्तावित 45 हजार भर्तियों में प्रशिक्षित आपदा मित्रों को प्राथमिकता मिल सकती है. वर्तमान में उनकी सेवाएं स्वैच्छिक हैं, लेकिन नियमित बल में शामिल होने पर उन्हें मानदेय भी मिलेगा.</p>
<p>कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. सरकार का कहना है कि इन पहलों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तंत्र दोनों मोर्चों पर मजबूती मिलेगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:29:07 +0530</pubDate>
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