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                <title>UP Mega Tree Plantation Campaign - Bhartiya Basti</title>
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                <title>यूपी में इन पेड़ को काटा तो होगी कार्रवाई, सरकार ने बदले नियम</title>
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                        <![CDATA[If these trees are cut in UP, action will be taken; the government has changed the rules, यूपी में इन पेड़ को काटा तो होगी कार्रवाई, सरकार ने बदले नियम]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/if-these-trees-are-cut-in-up-action-will-be/article-24758"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-12/uttar-pradesh-news-_20251217_201732_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई महत्वपूर्ण पेड़ों को काटने पर लगे प्रतिबंध को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इसके अंतर्गत आम, नीम, शीशम, सागौन, पीपल, बरगद और महुआ जैसी प्रमुख प्रजातियों के पेड़ों की कटाई पर रोक को 2 साल के लिए और बढ़ा दिया गया है.</p>
<h4><strong>दो साल और बढ़ाया गया प्रतिबंध</strong></h4>
<p>सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार इन पेड़ों की कटाई पर लगाया गया प्रतिबंध अब 31 दिसंबर 2027 तक लागू रहेगा। इससे पहले यह रोक 31 दिसंबर को समाप्त हो गई थी, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के उद्देश्य से इसे फिर से लागू कर दिया गया है।</p>
<p>पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि बिना वन विभाग की अनुमति के इन पेड़ों को काटना गैरकानूनी माना जाएगा।</p>
<h4><strong>इन पेड़ों को काटने से पहले लेनी होगी अनुमति</strong></h4>
<p>सरकार द्वारा जिन पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें आम (कलमी और तुकमी), नीम, साल, महुआ, पीपल, बरगद, गूलर, पाकड़, अर्जुन, पलाश, बेल, चिरौंजी, खिरनी, कैथा, इमली, जामुन, असना, कुसुम, रीठा, भिलावा, तून, सलई, हल्दू, बाकली/करधई, धौ, खैर, शीशम और सागौन समेत कुल 29 प्रजातियां शामिल हैं।</p>
<p>नियमों के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को निजी या सरकारी जमीन से इन पेड़ों को हटाना है तो इसके लिए पहले वन विभाग से ऑनलाइन अनुमति लेना अनिवार्य होगा।</p>
<h4><strong>एक पेड़ काटने पर लगाने होंगे 10 पौधे</strong></h4>
<p>वन विभाग के नियमों के अनुसार यदि किसी कारण से पेड़ काटने की अनुमति मिलती है तो उसके बदले एक पेड़ के स्थान पर 10 नए पौधे लगाना आवश्यक होगा। इसके लिए आवेदन के साथ एक शपथपत्र देना होगा कि लगाए गए पौधों की देखभाल भी की जाएगी।</p>
<p>यदि कोई व्यक्ति पौधे लगाने में असमर्थ है तो उसे वन विभाग में प्रतिपूर्ति राशि जमा करनी होगी। विभाग एक पौधे के लिए लगभग 100 रुपये जमा कराता है। यानी 10 पौधों के लिए करीब एक हजार रुपये जमा करने होते हैं। इसके अलावा पौधारोपण का खर्च भी अलग से लिया जाता है, जो अलग-अलग प्रभागों में भिन्न हो सकता है।</p>
<h4><strong>नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई</strong></h4>
<p>सरकार ने साफ किया है कि बिना अनुमति पेड़ काटने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और गंभीर मामलों में 6 महीने तक की जेल की सजा भी हो सकती है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों से प्रदेश में हरित क्षेत्र को बढ़ोतरी और पर्यावरण संतुलन बना रहेगा.</p>]]>
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                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 21:32:56 +0530</pubDate>
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                <title>वाराणसी की हवा बदलेगी: डोमरी में बन रहा 4.5 लाख पौधों का मिनी जंगल</title>
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                        <![CDATA[Varanasi's air will change: A mini forest of 4.5 lakh plants is being built in Domri, वाराणसी की हवा बदलेगी: डोमरी में बन रहा 4.5 लाख पौधों का मिनी जंगल]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/mini-forest-of-45-lakh-plants-being-built-in-domri/article-24373"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-02/uttar-pradesh-news_20260216_111011_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी की बिगड़ती आबोहवा को बेहतर बनाने और लोगों को प्रकृति के करीब लाने के लिए नगर निगम ने एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है. इसके अंतर्गत डोमरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिनी जंगल विकसित किया जाएगा. यह परियोजना न केवल शहर की हवा को स्वच्छ बनाने में मदद करेगी, बल्कि नागरिकों को भीड़भाड़ भरी जिंदगी के बीच सुकून भरा प्राकृतिक माहौल भी देगी.</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, यह पहल शहरी पर्यावरण सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. योजना का लक्ष्य कम समय में ज्यादा हरियाली तैयार करना है, जिससे शहर के तापमान और प्रदूषण दोनों पर सकारात्मक असर पड़े.</p>
<h4><strong>मियावाकी तकनीक से तैयार होगा घना वन</strong></h4>
<p>नगर निगम डोमरी में लगभग 39 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 4.5 लाख पौधे लगाने जा रहा है. इसमें से लगभग 3 लाख पौधे मियावाकी तकनीक से रोपे जाएंगे. इस पद्धति की खासियत यह है कि पौधे तेजी से बढ़ते हैं और कम समय में घना जंगल तैयार हो जाता है.</p>
<p>इसके अलावा 50 हजार इमारती लकड़ी के पौधे और करीब 1 लाख फलदार पौधे भी लगाए जाएंगे. इससे भविष्य में हरित संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी और जैव विविधता को भी मजबूती मिलेगी.</p>
<h4><strong>लोगों के लिए बनेगा प्राकृतिक सुकून का केंद्र</strong></h4>
<p>परियोजना को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा गया है. नगर निगम यहां नागरिकों के उपयोग के लिए जॉगिंग ट्रैक भी विकसित करेगा, जिससे सुबह-शाम टहलने और व्यायाम करने वालों को स्वच्छ और हराभरा वातावरण मिल सके.</p>
<p>आगे चलकर इस पूरे क्षेत्र को एक आकर्षक इको-स्पॉट के रूप में विकसित करने की भी योजना है. इसके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से तैयार की जाएंगी, जिससे यह स्थान शहरवासियों के लिए पसंदीदा स्थल बन सके.</p>
<h4><strong>शहर को मिलेगा बड़ा पर्यावरणीय लाभ</strong></h4>
<p>नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद डोमरी का यह मिनी जंगल वाराणसी के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ की तरह काम करेगा. इससे वायु गुणवत्ता में सुधार, तापमान में संतुलन और लोगों को बेहतर पर्यावरण मिलने की उम्मीद है.</p>
<p>यह ध्यान देने योग्य है कि 39 हेक्टेयर में प्रस्तावित यह हरित क्षेत्र आने वाले वर्षों में शहर की पारिस्थितिकी को मजबूत कर सकता है. अगर योजना समय पर पूरी होती है, तो शहरी जीवन की भागदौड़ के बीच लोगों को प्रकृति से जुड़ने का बेहतर अवसर भी मिलेगा.</p>]]>
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                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 11:12:55 +0530</pubDate>
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