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                <title>kaptanganj basti news - Bhartiya Basti</title>
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                <description>kaptanganj basti news RSS Feed</description>
                
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                <title>बस्ती में मनरेगा के पैसों का बंदरबांट? नाबालिग बच्चों से भी कराया जा रहा है काम!</title>
                                    <description><![CDATA[MNREGA funds being distributed in the slum? Even minor children are being made to work!,  बस्ती में मनरेगा के पैसों का बंदरबांट? नाबालिग बच्चों से भी कराया जा रहा है काम!
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/mnrega-funds-being-distributed-in-the-slum--even-minor-children-are-being-made-to-work/article-17980"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-03/basti-news-(2)-(1).png" alt=""></a><br /><p>भारत जैसे देश में मनरेगा योजना गरीबों और जरूरतमंदों के लिए वरदान की तरह है। यह ग्रामीण लोगों को बेरोजगारी से लड़ने में मदद करती है। इसका उद्देश्य लगभग 52 मिलियन लोगों की सेवा करना और उनके परिवारों को आजीविका प्रदान करना है।</p>
<h6><strong>मनरेगा में फर्जीवाड़े की डीएम से शिकायत</strong></h6>
<p>इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन का रोजगार देकर उनकी आजीविका सुरक्षित करना है। इससे आजीविका मजबूत हुई है और गरीबों को संसाधन उपलब्ध हुए हैं। एक तिहाई नौकरियाँ महिलाओं को सुनिश्चित की गयी हैं। इसने सड़कें, तालाब, नहरें और कुएँ जैसी उत्पादक परिसंपत्तियाँ निर्मित की हैं। योजना का मकसद था किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना, यानी कि सरकार वैसे किसी भी अकुशल मजदूर को प्रत्येक वित्तीय साल में 220 रुपये की दिहाड़ी पर 100 दिनों तक का रोजगार देगी जो काम करने को इच्छुक हों। लेकिन ये योजना ज़मीन पर कितनी कारगर है, इसे समझने के लिए हमने पिछले एक महीने में जिला बस्ती में इसका गहन जायजा लिया। कप्तानगंज क्षेत्र के महुलानी के रहने वाले मो. नईम ने डीएम को शपथ पत्र के साथ मनरेगा में फर्जीवाड़ा करने की शिकायत की है। डीएम ने मामले की जांच के लिए डीपीआरओ को निर्देश दिया है। वहीं बिना काम कराए ही भुगतान लिया जा रहा है। गांव में एक ही चकमार्ग पर नाम बदलकर उस पर भुगतान किया जा रहा है। शिकायत पत्र में मो. नईम ने कहा है कि दुबौलिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत महुलानी बुजुर्ग गांव में मनरेगा का धन खपाने के लिए नया तरीका अपनाया जा रहा है। गांव में नाबालिग बच्चों से काम कराया जा रहा है।</p>
<h6><strong>अब मनरेगा में नहीं चलेगा भ्रष्‍टाचार</strong></h6>
<p>ऑनलाइन सिस्टम में सेंधमारी अगर हुई है तो ऐसा मुमकिन है कि मनरेगा में सेंधमारी बड़ा आसान है। कितना आसान है और सेंधमारी की पैठ कितनी मजबूत है। इस योजना से जुड़कर रोजगार पाने के लिए मजदूर का एक कार्ड बनता है, जिसे जॉब कार्ड कहा जाता है। इसी कार्ड में मजदूर की दैनिक हाजिरी सहित मजदूर को कितने दिन का रोजगार मिला है जैसी तमाम जानकारियों का लेखा-जोखा होता है। ये कार्ड कोई भी इच्छुक मजदूर पंचायत की सहायता से बनवा सकता है। इस योजना से जुड़कर रोजगार पाने के लिए मजदूर का एक कार्ड बनता हैए जिसे जॉब कार्ड कहा जाता है। इसी कार्ड में मजदूर की दैनिक हाजिरी सहित मजदूर को कितने दिन का रोजगार मिला है जैसी तमाम जानकारियों का लेखा-जोखा होता है। ये कार्ड कोई भी इच्छुक मजदूर पंचायत की सहायता से बनवा सकता है। यह निराशाजनक है कि जो लाखों श्रमिक काम कर रहे थे, अब वे खाली बैठ गए हैं। मनरेगा के माध्यम से प्रतिवर्ष ग्रामीण इलाकों में रोजगार का सृजन किया जाता है। इस योजना में सरकार हर वर्ष बड़ा निवेश करती है। वित्तवर्ष 2024-25 में ही छियासी हजार करोड़ रुपए की राशि आबंटित की गई। यह समझ से परे है कि इतना बड़ा बजट रखने के बावजूद इस योजना से जुड़े श्रमिक क्यों हटाए जा रहे हैं। जबकि संवैधानिक प्रतिबद्धता जताई गई है कि मनरेगा के जरिए ग्रामीण भारत के नागरिकों को देश के विकास से जोड़ा जाएगा। शहरों की तरह गांवों में भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 19:45:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shambhunath Gupta]]></dc:creator>
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                <title>बस्ती का गौर बनेगा तहसील? जानें पूरी बात</title>
                                    <description><![CDATA[Will Basti's Gaur become a tehsil? Know the full story,  बस्ती का गौर बनेगा तहसील? जानें पूरी बात
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/will-basti-s-gaur-become-a-tehsil--know-the-full-story/article-17915"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-02/basti-news-(1)4.png" alt=""></a><br /><h6>यूपी के बस्ती कप्तानगंज में बिजली कटौती एक आम समस्या बनती जा रही है। अब मानसून आ गया ऐसे में बिजली की मांग में कमी आई है, लेकिन बिजली कटौती की समस्या रुकने का नाम नहीं ले रही। सिर्फ शहरी ही नहीं ग्रामीण इलाकों में भी ऐसा ही हाल है। ऐसे में देशभर में बिजली कटौती के मामले कप्तानगंज में सबसे आगे है। यह पूरा मामला कप्तानगंज विधायक कविन्द्र चौधरी ने विधानसभा सदन में रखी। <br /> <br /><strong>भाजपा सरकार अब नहीं चाहिए, सपा का आरोप </strong></h6>
<p>बिजली कटौती की समस्या से आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर कर जोरदार प्रदर्शन कर रही है। वहीं जनता की नाराजगी को देखते हुए विधायक सदन में पहुंचे। उन्होेंने आगे कहा देश के कई हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी देखने को मिल रही है। ऐसे में अधिकांश राज्यों में बिजली की खपत बढ़ गई है। इससे आने वाले दिनों में बिजली कटौती की समस्या बढ़ सकती है। सरकारी सूत्रों का अनुमान है कि इस बार जून की तपती गर्मी में लोगों को ज्यादा परेशान झेलनी पड़ सकती है। जून में एक बार फिर बिजली संकट गहरा सकता है। इसकी वजह जलविद्युत उत्पादन में गिरावट और नए कोयला आधारित संयंत्रों के चालू होने में देरी है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यूपी की भाजपा सरकार ने किसानों को एक बार फिर धोखा दिया है। कहा कि गन्ना मूल्य वृद्धि न होने से किसानों पर आर्थिक संकट आएगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सरकार के इस गलत फैसले से किसान कर्ज में डूबेगा। उन्होंने कहा कि महंगाई और उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सरकार की यह नीति किसानों के साथ अन्याय है। इस साल उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल में रोगों के चलते पैदावार 10 से 15 फीसदी तक गिर गई है, जिसके चलते किसानों को नुकसान हुआ है। ऐसे में दाम न बढ़ने से किसान पर दोहरी मार पड़ी है। क्योंकि दाम तो बढ़ा नहीं बल्कि पैदावार घटने व लागत बढ़ने का घाटा भी उसे उठाना पड़ रहा है। उसके लिए सरकार ने कोई राहत नहीं दी है। भारतीय जनता पार्टी सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि 2021 में भाजपा नेताओं ने दावा किया था कि साल 2024 तक उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था एक ट्रिलियन डॉलर ;एक हजार अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी और अब वे कह रहे हैं कि यह 2024 तक नहीं हुआ है, यह 2029 तक यह संभव हो पाएगा। यह भी कहा कि जनता को न तो भाजपा की पिछली बातों पर भरोसा हुआ था और न ही इनके आगामी दावे पर भरोसा कर रही है, भाजपा अब पूरी तरह से झूठ का पर्याय बन चुकी है। राज्य की जनता कह रही है कि आज राज्य को बदलाव चाहिए, भाजपा सरकार अब नहीं चाहिए। भाजपा सरकार कभी भी समाजवादी पार्टी के विकास और जनहित के मुद्दों का मुकाबला नहीं कर सकती है। भाजपा केवल नफरत फैला सकती है और भेदभाव करती है, लेकिन सपा सरकार हमेशा जनता के लिए काम करती है। चौधरी ने आगे कहा बस्ती जनपद में हर्रैया तहसील है। जो प्रदेश की सबसे बड़ी तहसील है। जिसमें पन्द्रह से अधिक राजस्व गांव है। उन्होने मांग किया प्रदेश की सबसे बडी तहसील होने कारण जनहित की समस्याओ को निस्तारण करने में समस्या होती है। बस्ती विधानसभा में गौर को तहसील बनाया जाये। </p>
<h6><strong>सपा कविन्द्र चौधरी का बीजेपी पर सियासी हमला</strong></h6>
<p>प्रदेश में भाजपा की नीतियों ने आम जनता को नुकसान के अलावा कुछ नहीं दिया, भाजपा भ्रष्टाचार में पूरी तरह लिप्त है, जिससे स्वास्थ्य विभाग से लेकर हर क्षेत्र में अव्यवस्था फैली हुई है, पार्टी का आचरण खतरनाक है।  प्रदेश का दुर्भाग्य है कि योगी ईमानदार नहीं हैं, भाजपा सरकार के दौरान कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। महंगाई और भ्रष्टाचार ने आम आदमी का जीना मुश्किल कर दिया है, किसान, नौजवान, मजदूर, व्यापारी, शिक्षक और अधिवक्ता सभी लोग सरकार से त्रस्त हैं। सपा कविन्द्र ने कहा कि उनकी पार्टी के पास डॉ. राममनोहर लोहिया, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर और नेताजी मुलायम सिंह यादव के संघर्ष की विरासत है। उन्होंने जातीय जनगणना की वकालत करते हुए कहा कि इससे हर वर्ग को समानुपातिक भागीदारी मिलेगी, कहा कि समाजवादी पार्टी का जनता से भावनात्मक रिश्ता है और यह पार्टी हमेशा जनता के मुद्दों से जुड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि भाजपा दलितों और पिछड़ों के आरक्षण और उनके वोट के अधिकार को खत्म करने की योजना बना रही है, उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर कर रही है और चुनावों में प्रशासनिक तंत्र के बल पर धांधली करके लोकतंत्र की पवित्रता को नष्ट कर रही है। अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव में पीडीए ;पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक की सरकार बनाने का लक्ष्य तय किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें, उन्होंने विश्वास जताया कि जनता भाजपा की नीतियों से परेशान होकर बदलाव के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> Basti News </category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 15:47:44 +0530</pubDate>
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