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                <title>Sant Kabir Nagar - Bhartiya Basti</title>
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                <title>उत्तर प्रदेश के इस गांव को 28 वर्षों की प्रशासनिक भूल ने दो जिलों के बीच फंसा दिया, ग्रामीणों को हो रहा भारी नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[This village of Uttar Pradesh got stuck between two districts due to 28 years of administrative mistake, villagers are suffering huge losses, उत्तर प्रदेश के इस गांव को 28 वर्षों की प्रशासनिक भूल ने दो जिलों के बीच फंसा दिया, ग्रामीणों को हो रहा भारी नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/this-village-of-uttar-pradesh-has-been-implicated-by-28/article-20435"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-06/uttar-pradesh-news-_20250603_071330_0000.png" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>यूपी में स्थित बस्ती जनपद की सीमा से सटे भरवलिया उर्फ टिकुइया गांव पिछले 28 सालों से एक गंभीर प्रशासनिक भूल की वजह से विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है. गांव की स्थिति दो जिलों बस्ती और संतकबीरनगर के बीच उलझकर रह गई है, जिसके कारण यहां के लगभग 1000 से अधिक निवासियों को सरकारी योजनाओं, आधारभूत सुविधाओं और प्रमाण-पत्रों की प्राप्ति में भारी कठिनाई झेलनी पड़ रही है. बंटवारे के समय राजस्व विभाग की चूक से यह गांव राजस्व अभिलेखों में संतकबीरनगर जिले का हिस्सा बना, जबकि पंचायती और विकासीय योजनाओं में इसे बस्ती के कुदरहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत चकिया में दिखाया गया. इस असहजता के कारण गांव प्रशासनिक पेंच में फंसा रह गया है, और इसका खामियाजा आमजन भुगत रहा है.</p>
<p>भरवलिया गांव के निवासियों का कहना है कि जब देश में विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं, तब उनका गांव अब भी छप्पर के घरों में जीवन गुजारने को मजबूर है. यहां अब तक शौचालय, आवास, पक्के रास्ते जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं. ग्रामीण रामसवार, सुमित्रा देवी, राजबली और रोहित राजभर सहित कई लोगों ने बताया कि उनका आधार कार्ड बस्ती जिले का है, लेकिन जाति, निवास और आय प्रमाण-पत्र संतकबीरनगर के धनघटा तहसील से निर्गत होता है. यहां के लोग त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में बस्ती जिले में मतदान करते हैं, परंतु विधानसभा और लोकसभा चुनावों में संतकबीरनगर के प्रतिनिधियों को चुनते हैं. इस दोहरे प्रशासनिक नियंत्रण ने न सिर्फ योजनाओं के लाभ से गांव को दूर किया है, बल्कि रोजगार, भर्ती और प्रमाण-पत्र सत्यापन जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं भी जटिल बना दी हैं.</p>
<p>तकनीकी रूप से जब अधिकांश सरकारी योजनाएं जियो टैग और डिजिटल पहचान पर आधारित हो गई हैं, भरवलिया गांव का जियो टैग न होना यहां के विकास की सबसे बड़ी बाधा बन गया है. आवास योजना, मनरेगा, शौचालय निर्माण जैसी योजनाएं पूरी तरह बाधित हैं. गांव में लगभग 500 से ज्यादा मतदाता हैं, लेकिन फिर भी चुनाव के समय मिलने वाले वादे, आश्वासन और घोषणाएं कभी धरातल पर नहीं उतरतीं. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, आयुक्त और जिलाधिकारियों तक को पत्र सौंपे, लेकिन समाधान की बजाय यह मुद्दा फाइलों में ही दबा रहा. गांव के लोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए बस्ती और संतकबीरनगर दोनों जिलों के चक्कर लगाते हैं. किसान खेती के कामों के लिए धनघटा तहसील जाते हैं, तो योजनाओं और राशन कार्ड के लिए बस्ती ब्लॉक का रुख करना पड़ता है.</p>
<p>सन् 1997 में जिले के बंटवारे के साथ भरवलिया उर्फ टिकुइया गांव यह स्थिति बन गई. राजस्व, विकास और पुलिस प्रशासन की स्पष्टता न होने के कारण यह गांव एक भ्रमित पहचान के साथ जी रहा है. गांव के पूर्व प्रधान संतराम ने कहा कि अधिकारियों से लेकर नेताओं तक सभी को ज्ञापन सौंपा गया, परंतु इस पर विशेष ध्यान दिया ही नहीं गया. विधायक गणेश चौहान ने इस मामले में हस्तक्षेप का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह खुद गांव में जाकर स्थिति का जायजा लेंगे और शासन स्तर पर इसे उठाकर गांव को एक जिले में स्थायी रूप से शामिल कराने का प्रयास करेंगे. गांव की मांग अब केवल एक ही है इसे राजस्व, विकास और पुलिस प्रशासन की दृष्टि से पूरी तरह से किसी एक जिले में स्पष्ट रूप से सम्मिलित किया जाए, ताकि लोग विकास का वास्तविक लाभ पा सकें.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> Basti News </category>
                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 08:27:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
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                <title>खंडहर में जलती राधिका: एक रहस्य, जिसने बस्ती को झकझोर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[बस्ती जिले की एक खामोश सुबह उस वक्त हड़कंप में बदल गई जब शहर के एक खंडहर से उठते धुएं और बदबू ने सबका ध्यान खींचा। लेकिन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/radhika-a-mystery-burning-in-ruins-that-shook-the-township/article-20138"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-05/20250521_180157.jpg" alt=""></a><br /><p>बस्ती जिले की एक खामोश सुबह उस वक्त हड़कंप में बदल गई जब शहर के एक खंडहर से उठते धुएं और बदबू ने सबका ध्यान खींचा। लेकिन जब लोग वहां पहुंचे, तो जो मंजर सामने आया, उसने रूह तक हिला दी।</p>
<p>कूड़े के ढेर में अधजला शव पड़ा था — एक महिला का। देखते ही लोगों की रूह कांप गई। वो कोई और नहीं, राधिका यादव थी — वही राधिका, जो कभी अपनी खुशियों के लिए, अपने परिवार के अच्छे भविष्य के लिए घर से निकली थी।</p>
<p>सलटोवा गांव की रहने वाली राधिका की शादी संत कबीर नगर में हुई थी। लेकिन घर की जिम्मेदारियां, जरूरतें और सपने उसे बस्ती ले आए। वो यहां एक घर में काम करती थी — राम प्रकाश गुप्ता के यहां। अभी कुछ ही दिन हुए थे काम शुरू किए, लेकिन किसी को क्या पता था कि इतनी जल्दी उसकी जिंदगी यूं राख में तब्दील हो जाएगी।</p>
<h6><strong>भोर की वो भयावह सुबह</strong></h6>
<p>20 मई 2025, बुधवार। सुबह-सुबह पांडे बाजार के पास मौजूद एक सुनसान खंडहर से धुएं का गुब्बार उठा। साथ में उठी एक ऐसी बदबू जिसने वहां के लोगों को बेचैन कर दिया। किसी अनहोनी की आशंका से लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, तो जो देखा गया वो बेहद खौफनाक था — एक महिला का अधजला शव, पूरी तरह विकृत।</p>
<p>पहचान मुश्किल थी, लेकिन कुछ ही समय में पुष्टि हो गई कि शव राम प्रकाश गुप्ता के घर काम करने वाली राधिका यादव का है।</p>
<h6><strong>क्या हुआ राधिका के साथ?</strong></h6>
<p>अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राधिका वहां पहुंची कैसे? क्या वह खुद वहां गई थी? या किसी ने उसे जबरन वहां ले जाकर ये दरिंदगी की?</p>
<p>स्थानीय लोगों और पुलिस के मुताबिक, शव की हालत देखकर अंदेशा है कि उसे जिंदा जलाया गया हो सकता है। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कुछ बहुत भयानक भी हो सकता है।</p>
<p>राम प्रकाश गुप्ता, जिनके घर राधिका काम करती थी, ने ही पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में दुर्घटना की आशंका बताई जा रही है, लेकिन परिस्थितियां और शव की हालत कुछ और ही इशारा कर रही हैं।</p>
<h6><strong>पुलिस की जांच और उम्मीदें</strong></h6>
<p>फिलहाल पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के साथ साक्ष्य इकट्ठा किए हैं। राधिका के परिवार से बातचीत की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ तौर पर कहा जा सकेगा कि राधिका की मौत कैसे हुई — क्या ये वाकई एक हादसा था या किसी ने उसे जिंदा जलाया?</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का दावा है कि वो जल्द ही इस केस का खुलासा करेंगे और राधिका को इंसाफ दिलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने जनता से अपील की है कि अगर किसी के पास कोई भी जानकारी हो — कोई सुराग, कोई हलकी-सी भनक भी — तो बिना किसी डर के पुलिस से साझा करें। पहचान गोपनीय रखी जाएगी।</p>
<h6><strong>कब सुलझेगी ये गुत्थी?</strong></h6>
<p>हर कोई यही पूछ रहा है — आखिर कब खुलेगा इस रहस्य का पर्दा? कौन है वो जो राधिका को उस खंडहर तक लेकर गया? क्या यह कोई जान-पहचान वाला था या कोई अजनबी? और अगर ये हत्या है, तो आखिर वजह क्या थी? इस समय पूरा बस्ती जिला इस खबर से सकते में है। हर कोई यही चाहता है — सच सामने आए, राधिका को इंसाफ मिले। लेकिन तब तक, एक सवाल सबके मन में चुभता रहेगा — क्या सच में ये एक हादसा था... या एक साजिश, जो राख में बदल दी गई?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                            <category> Basti News </category>
                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 May 2025 18:02:45 +0530</pubDate>
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