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                <title>navratri 2021 - Bhartiya Basti</title>
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                <title>Durga Puja 2024: बस्ती के इस इलाके में दुर्गा पूजा में स्थापित होती है 10 फीट की प्रतिमा, दूर-दूर से देखने आते हैं लोग</title>
                                    <description><![CDATA[Durga Puja 2024: बस्ती के इस इलाके में दुर्गा पूजा में स्थापित होती है 10 फीट की प्रतिमा, दूर-दूर से देखने आते हैं लोग,Durga Puja 2024 10 feet tall idol installed in ​​Basti during Durga Pooja]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/basti-news-live-in-hindi/durga-puja-2024-10-feet-tall-idol-installed-in-%E2%80%8B%E2%80%8Bbasti-during-durga-pooja/article-15272"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2024-09/basti-durga-pooja.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Basti Durga Pooja News: </strong>उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में शारदीय नवराात्रि दुर्गा पूजा की धूमधाम से मनाई जाती है. इस भव्य उत्सव में बस्ती जिले में भव्य और विराट रूप पंडाल सजते है. आज हम बात करेगे बस्ती शहर के अस्पताल चौराहे के पास की, जहां पर दिव्य रूप में मां दुर्गा की प्रतिमा विराजमान होती है.</p>
<p>देश बन्धु नंदानाथ का जन्म संतकबीरनगर के महुली थाने के पास सन् 28/7/1949 में हुआ था. इनके पिता का नाम स्वः चन्द्रशेखर था. इनके पिता खेती बारी का काम करते थे. देश बन्धु नंदानाथ बनारस विश्वविद्यालय से आयुर्वेद से डिप्लोमा किया है.</p>
<p>18 साल की उम्र में नंदानाथ गोरखधाम मंन्दिर में चले गये. संतो के बीच में रहकर संतो की पोषक में रहने लगे. संत बनने के बाद मोह-माया को त्याग किया, अपने मन को मजबूत बनाया. उन्होंने अपने जीवन की जिम्मेदारी समझी.</p>
<p>संत बनने के बाद इन्होंने जीवन से जुड़ी कई परिक्षाओ को पार किया. इन्होंने ब्रहमचर्य का भी पालन किया, नंदानाथ सात्विक और शुद्ध भोजन करते है. वे दिन में एक बार भोजन करते है. वह घरों में बने भोजन को ही पसन्द करते है. वह नियम के मुताबिक भोेजन लेते है और नियम के मुताबिक न मिलने पर भोजन त्याग देते है.</p>
<p>देश बन्धु नंदानाथ सन् 1968 ई0 में बस्ती में आगमन हुआ. बस्ती में आकर श्री शिव धाम मन्दिर का निर्माण किया. बस्ती कांवारियां धर्मसंघ की शुरुआत की जो श्रावण मास तेरस में भदेश्वर नाथ में इनके नेतृत्व में विराट कार्यक्रम होता है. </p>
<p>सन् 1970 ई0 में यहां दुर्गापूजा का शुभारंभ हुआ. जिससे आज पूरे उत्तरप्रदेश में एक नामचीन नंदाबाबा दुर्गापूजा पंडाल के नाम से सुप्रसिद्ध हो चुका है. दुर्गा पूजा समिति बस्ती में मन्नत की देवी मां के नाम से विख्यात हुआ. इस मन्दिर में भगवान शिव का मन्दिर हैं. मां दुर्गा की प्रतिमा की भी स्थापना हुई.</p>
<p>भक्तों का मानना है मां के मन्दिर में मन्नत पूरी होती है. दुर्गा पूजा के वक्त यहां अधिक से अधिक भक्तों का तांता लगता है. दुर्गा पूजा में आश्वयकता वाली वस्तुएं बांस, बल्ली, कृपाल रस्सी हर प्रकार की सजावट का सामान सब संस्था का है. दुर्गा पंडाल के बाहर बड़े-बड़े और खूब विशालकाय दो आकर्षित द्वार गेट बनते है.</p>
<p>इस गेट की सुन्दरता बस्ती की खूबसूरती में चार-चांद में तब्दील करता है. दूर-दूर से लोग आकर इसको अपनी दृष्टि से देकर आंखो को खूब आनंद मिलता है. हैरानी की बात यह भी है. कृष्ण जन्मष्टमी से पूर्व ही यहां तैयारी जोरो शोरो से शुरूआत होने लगती है. क्योकि बस्ती जिले में सबसे बड़ा सुन्दरम दृश्य यही का होता है. नंदानाथ के पंडाल में 10 फीट की मां दुर्गा विराजमान होती है.</p>
<p><img src="https://bhartiyabasti.com/media/2024-09/nanda-baba-basti-durga-pooja.jpg" alt="nanda baba basti durga pooja" width="1280" height="720"></img></p>
<p>साथ-साथ में गणेश, लक्ष्मी, कार्तिक, और वीणा वादिनी मां स्वरसती विराजमान होती है. यहां पर दुर्गा पूजा का सुन्दरम् और मनोरम दृश्य होता है जिसे देखकर हर कोई खो जाता है. यहां पर खास बात ये है कि दिपावली के बाद यहां हर साल विशाल स्वादिष्ट व्यंजन का लंगर का आयोजन करवाया जाता है. इस प्रसाद को पाने के लिए भक्त लम्बी कतार लगाकर अपनी बारी का इतंजार करते नजर आते है.</p>
<p>नंदानाथ ने भारतीय बस्ती को जानकारी दी हर साल की भांति इस साल भी कई हजार भक्तो के दिपावली के बाद शुद्ध भोजन का अयोजन रखा जायेगा. लोग नए कपड़े पहनते हैं. स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेते हैं. और पंडालों में दर्शन के लिए जाते हैं. जिसके लिए युवा वर्ग काफी उत्साहित रहता है. अगर आप इस नवरात्रि देश के सबसे मशहूर और भव्य दुर्गा पूजा पंडालों के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो ये जान लें कि भारत देश के उत्तर प्रदेश बस्ती जिले में सबसे सुंदर दुर्गा पंडाल यहीं सजते हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category> Basti News </category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Sep 2024 08:08:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shambhunath Gupta]]></dc:creator>
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                <title>Shardiya Navratri 2024: मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप को क्यों कहते हैं ब्रह्मचारिणी? नहीं जानतें होंगे आप, जाने यहां</title>
                                    <description><![CDATA[Shardiya Navratri 2024: मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप को क्यों कहते हैं ब्रह्मचारिणी? नहीं जानतें होंगे आप. जान यहां,Shardiya Navratri 2024 Why second form of Maa Durga called Brahmacharini]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/shardiya-navratri-2024-why-second-form-of-maa-durga-called-brahmacharini/article-15232"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2024-09/shardiya-navratri-2024-brahmacharini.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Shardiya Navratri 2024: ब्रह्मचारिणी</strong><br />देवी माँ का दूसरा नाम ब्रह्मचारिणी है.</p>
<p>ब्रह्म का क्या अर्थ है?<br />जिसका न कोई अंत है, न किनारा और न ही शुरुआत; जो सर्वव्यापी है और जिसके परे कुछ भी नहीं है; वह परम और सर्वव्यापी है.</p>
<p>यदि आप अपनी आँखें बंद करके ध्यान करते हैं, तो आप महसूस करेंगे कि जब आपकी ऊर्जा चरम पर पहुँचती है, तो वह देवी माँ के साथ एक हो जाती है; वह देवी माँ की ऊर्जा में भीग जाती है. ईश्वर आपके भीतर है, कहीं बाहर नहीं.</p>
<p>आप यह नहीं कह सकते, "मैं इसे जानता हूँ", क्योंकि यह अनंत है. जिस क्षण आप इसे जानते हैं, यह सीमित हो जाता है. न ही आप यह कह सकते हैं कि "मैं इसे नहीं जानता", क्योंकि यह निश्चित रूप से वहाँ है. आप कैसे नहीं जान सकते? क्या आप कह सकते हैं कि "मैं अपना हाथ नहीं जानता"? आपका हाथ वहीं है. यह वहाँ है इसलिए आप इसे जानते हैं, और यह अनंत है इसलिए आप इसे नहीं जानते. ये दोनों अनुभूतियाँ एक साथ चलती हैं. क्या आप काफी भ्रमित हैं?</p>
<p>अगर कोई आपसे पूछे, "क्या आप देवी माँ को जानते हैं", तो आप चुप रह सकते हैं, क्योंकि अगर आप कहते हैं, "मैं नहीं जानता", तो यह सच नहीं है, और अगर मैं कहता हूँ, "मैं जानता हूँ", तो आप शब्दों और सीमित बुद्धि के माध्यम से उस 'जानने' को सीमित कर रहे हैं. यह अनंत है, और अनंत को समझा या समाहित नहीं किया जा सकता है.</p>
<p>"जानने" का अर्थ है किसी चीज़ को समाहित करना या सीमित करना. क्या आप अनंत को समाहित कर सकते हैं? अगर आप अनंत को समाहित करते हैं तो यह अनंत नहीं रह जाता. ब्रह्मचारिणी का अर्थ है वह जो अनंत में मौजूद है और गति करती है. वह ऐसी ऊर्जा है जो स्थिर या निष्क्रिय नहीं है, बल्कि अनंत में गति करती है.</p>
<p>यह समझने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है - एक है गति और दूसरा है उपस्थिति. ब्रह्मचर्य का यही अर्थ है. ब्रह्मचर्य का अर्थ है छोटी-छोटी चीजों में लिप्त न होना, छोटी-छोटी सीमित चीजों में न फंसना बल्कि समग्रता में लिप्त होना. ब्रह्मचर्य को ब्रह्मचर्य का पर्यायवाची भी कहा जाता है क्योंकि इसमें आप सीमित भागों के साथ नहीं बल्कि बड़े समग्र के साथ व्यवहार कर रहे होते हैं. वासना हमेशा टुकड़ों में होती है, यह चेतना की स्थानीय गति है. इसलिए ब्रह्मचारिणी वह चेतना है जो सर्वव्यापी है.</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 04:08:27 +0530</pubDate>
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