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                <title>Electricity Department - Bhartiya Basti</title>
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                <title>बिजली बिल भरकर भी बकायेदार? UP में अजीब गड़बड़</title>
                                    <description><![CDATA[Paying electricity bills but still in default? A strange mess in UP, बिजली बिल भरकर भी बकायेदार? UP में अजीब गड़बड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/gorakhpur/weird-glitch-in-defaulting-up-even-after-paying-electricity-bill/article-23626"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-11/uttar-pradesh-news-_20251104_164738_00001.png" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश:</strong> उत्तर प्रदेश में स्थित गोरखपुर जिले में बीते एक हफ्ते से बिजली उपभोक्ता ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. डिजिटल पेमेंट के दौर में जहां लोग मोबाइल से दो सेकंड में बिल चुका रहे थे, वहीं अब यही सुविधा लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है. सुबह-सुबह बिजली कार्यालयों के बाहर लंबी लाइनें, उपभोक्ताओं की घबराहट और इंजीनियरों की लाचारी, सभी हालात दिखा रही हैं कि तकनीक की एक खामी कितने बड़े संकट को जन्म दे सकती है.</p>
<h4><strong>क्यों बढ़ी परेशानी?</strong></h4>
<p>UPI से बिजली बिल चुकाने वाले हजारों उपभोक्ताओं के खाते से तो पैसे कट जा रहे हैं, लेकिन बिजली निगम के खाते में वह रकम समय पर नहीं पहुंच रही. नतीजा बिल बकाया दिख रहा, कई उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर से कनेक्शन तक कटने लगे, रोजाना शिकायतों की बाढ़. लोग हैरान हैं कि आखिर भुगतान करते वक्त आया ‘सक्सेसफुल’ मैसेज अब मायने क्यों नहीं रखता.</p>
<h4><strong>उपभोक्ताओं की आवाज: डर और नाराज़गी</strong></h4>
<p>शाहपुर के राहुल सिंह बताते हैं कि उनका बिल पहले 24 घंटे में अपडेट हो जाता था, लेकिन 15 नवंबर को किया भुगतान अब तक बकाया दिख रहा है.</p>
<p>मोहद्दीपुर के दिनेश यादव चिंतित हैं कि कहीं स्मार्ट मीटर से उनका कनेक्शन न कट जाए, जबकि वे नियमित भुगतान करते हैं. लोगों की शिकायत एक ही है कि जानकारी साफ नहीं है और समाधान कहीं नजर नहीं आता.</p>
<h4><strong>ऑटो-पेमेंट वालों की सबसे बड़ी समस्या</strong></h4>
<p>बहुत से उपभोक्ता बिल जनरेट होते ही ‘ऑटो मोड’ में UPI से पेमेंट कर देते हैं. पहले यह सिस्टम मिनटों में अपडेट हो जाता था, पर लगभग 10 दिन पहले अचानक गड़बड़ी शुरू हुई. कई लोगों की रकम अब तक निगम के खाते तक नहीं पहुंची और उनका मीटर लगातार ‘ड्यू अमाउंट’ दिखा रहा है.</p>
<h4><strong>इंजीनियर भी है परेशान</strong></h4>
<p>बिजली कार्यालयों में रोज नई भीड़ जुटती है. इंजीनियर जांच में यही निष्कर्ष निकाल रहे हैं कि “राशि बैंक खाते से कट तो रही है, पर निगम के खाते में देरी से पहुंच रही है.” टाउनहाल खंड के अधिशासी अभियंता अंकित कुमार मानते हैं कि UPI से भुगतान में तकनीकी दिक्कत जरूर है, मगर रकम कुछ दिन बाद आ जाती है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है.</p>
<h4><strong>ज़िम्मेदार कौन? सिस्टम कब ठीक होगा?</strong></h4>
<p>सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये इस तकनीकी खामी में अटक गए हैं, तो बिजली निगम ने UPI भुगतान अस्थायी रूप से बंद क्यों नहीं किया? निगम के पास न स्पष्ट निर्देश हैं, न उपभोक्ताओं को राहत देने की कोई तत्काल योजना.</p>
<ul>
<li>UPI से बिजली बिल भुगतान में तकनीकी गड़बड़ी चल रही है.</li>
<li>राशि उपभोक्ता के खाते से तुरंत कट जाती है, पर बिजली निगम के खाते में पहुंचने में कई दिनों की देरी हो रही है.</li>
<li>बिल अपडेट न होने से बकाया दिख रहा और कुछ उपभोक्ताओं का कनेक्शन भी कट चुका है.</li>
<li>निगम ने UPI भुगतान रोकने या वैकल्पिक समाधान की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है.</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                            <category>Gorakhpur news</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Nov 2025 21:38:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
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                <title>UP में स्मार्ट मीटर घोटाला? टेंडर पर उठे सवाल, अब CBI जांच की मांग तेज!</title>
                                    <description><![CDATA[Smart meter scam in UP? Questions raised over tender, demand for CBI investigation now intensifies!, UP में स्मार्ट मीटर घोटाला? टेंडर पर उठे सवाल, अब CBI जांच की मांग तेज!]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/questions-raised-on-smart-meter-scam-tender-in-up-now/article-23195"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-10/uttar-pradesh-news-_20251027_143004_0000.png" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एक ओर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद मीटर की कीमत को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन अपने फैसले को पूरी तरह नियमों के अनुसार बता रहा है. दोनों पक्षों के बीच यह टकराव अब खुलकर सामने आ गया है.</p>
<h4><strong>सीबीआई जांच की मांग</strong></h4>
<p>राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मीटर की कीमत को लेकर सीबीआई जांच की मांग की है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने स्मार्ट मीटर परियोजना की लागत 18,885 करोड़ रुपये तय की थी, जबकि इसका टेंडर 27,342 करोड़ रुपये में किया गया. परिषद ने यह भी बताया कि उपभोक्ताओं से एक मीटर के लिए 6,016 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह कीमत काफी कम है.</p>
<h4><strong>मीटर लगने की संख्या और वसूली</strong></h4>
<p>जानकारी के मुताबिक, 10 सितंबर से अब तक 20,243 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें 12,944 घरेलू कनेक्शन हैं. इनमें से 4,002 उपभोक्ताओं की बिजली खपत एक किलोवाट तक की है. परिषद के अनुसार, सिर्फ एक महीने में मीटर शुल्क के नाम पर करीब 13.20 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं, जो नियमों के विपरीत है.</p>
<h4><strong>अन्य राज्यों से तुलना</strong></h4>
<p>परिषद ने सवाल उठाया कि जब राजस्थान में स्मार्ट मीटर 2,500 रुपये में लगाए जा रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश में 6,016 रुपये क्यों वसूले जा रहे हैं? इसके अतिरिक्त, हरियाणा में ऐसे मीटर लगाने पर उपभोक्ताओं को 5% बिल छूट दी जाती है, जबकि यूपी में यह छूट केवल 2% है. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में इसी तरह की परियोजना में एक आईएएस अधिकारी को कंपनी द्वारा कार दी गई थी, जिसे ईडी ने जब्त किया था इसलिए उत्तर प्रदेश में भी उच्च स्तरीय जांच जरूरी है.</p>
<h4><strong>किस्तों में भुगतान की सुविधा</strong></h4>
<p>कॉर्पोरेशन ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं के लिए मीटर की कीमत किस्तों में चुकाने की व्यवस्था है. साथ ही, जो पुराने कनेक्शन हैं, उन्हें भारत सरकार की आरडीएसएस योजना के अंतर्गत स्मार्ट मीटर में मुफ्त रूप से बदला जा रहा है. इसके लिए किसी उपभोक्ता से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है.</p>
<h4><strong>गलत जानकारी से सावधान रहने की अपील</strong></h4>
<p>कॉर्पोरेशन ने कहा कि कुछ संगठन स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रामक बयान दे रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बन रही है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे गलत अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल विभागीय सूचना पर भरोसा करें.</p>
<h4><strong>कॉर्पोरेशन की सफाई</strong></h4>
<p>इस पूरे विवाद पर पावर कॉर्पोरेशन ने शनिवार को बयान जारी करते हुए बताया है कि नए कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ताओं को विद्युत प्रदाय संहिता-2005 के अंतर्गत कास्ट डेटा बुक (2019) के अनुसार शुल्क देना अनिवार्य है. इस बुक में प्रीपेड मीटर की दर 6,016 रुपये तय की गई है.</p>
<p>प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि पुराने मीटर में संचार की सुविधा नहीं थी, जबकि नए स्मार्ट मीटर में ऑनलाइन निगरानी और रिचार्ज की पूरी सुविधा है. उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में भी कीमतें इससे ज्यादा या बराबर हैं जैसे असम में 6,490 रुपये, हरियाणा में 8,415 रुपये और महाराष्ट्र में 5,210 रुपये प्रति मीटर निश्चित हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 14:38:53 +0530</pubDate>
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