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                <title>tech news in hindi - Bhartiya Basti</title>
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                <title>सोशल मीडिया पर छाई Ghibli-स्टाइल तस्वीरों से आपको हो सकता है यह नुकसान, जानते है आप ?</title>
                                    <description><![CDATA[Ghibli-style pictures trending on social media can cause you this harm, do you know?, सोशल मीडिया पर छाई Ghibli-स्टाइल तस्वीरों से आपको हो सकता है यह नुकसान, जानते है आप ?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/india-news/ghibli-style-pictures-trending-on-social-media-can-cause-you-this-harm--do-you-know/article-18747"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-03/ghibli--(2).png" alt=""></a><br /><p>आज कल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक (Facebook), इंस्टाग्राम (Instagram) और एक्स (X) पर Ghibli स्टाइल में बनाई गई तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग अपनी प्रोफाइल पिक्चर को इस अनोखे एनीमेशन लुक में बदलकर शेयर करने में व्यस्त हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आपकी निजता (Privacy) के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है? अगर नहीं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए काफी जरूरी है।</p>
<p><strong>कैसे बनती हैं Ghibli-स्टाइल की तस्वीरें?</strong></p>
<p>इस ट्रेंड के तहत लोग AI टूल्स पर अपनी तस्वीरें अपलोड करते हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आपकी फोटो को प्रोसेस कर उसे Ghibli स्टाइल में बदल देता है। यह तकनीक देखने में बेहद आकर्षक लगती है, लेकिन इसके पीछे कई साइबर सुरक्षा (Cyber Security) से जुड़े गंभीर खतरे भी छिपे होते हैं।</p>
<p><strong>आपकी तस्वीरों पर AI का कब्जा!</strong></p>
<p>आजकल लोग अपनी तस्वीरों के साथ-साथ अपने परिवार, दोस्तों और छोटे बच्चों की तस्वीरें भी इन टूल्स पर डाल रहे हैं, जो कि एक बड़ा जोखिम हो सकता है। AI इन तस्वीरों को स्टोर कर सकता है, और इनका गलत इस्तेमाल होने की संभावना बनी रहती है। कई बार यह डेटा लीक (Data Leak) हो सकता है या फिर किसी थर्ड-पार्टी को बेचा जा सकता है।</p>
<p>बीते वर्षों में AI कंपनियों द्वारा यूजर्स की निजता के उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं। उदाहरण के लिए, कुछ साल पहले Clearview AI नामक एक कंपनी पर बिना अनुमति के सोशल मीडिया और न्यूज़ वेबसाइट्स से 3 अरब से अधिक तस्वीरें इकट्ठा करने का आरोप लगा था। यह डेटा पुलिस और प्राइवेट कंपनियों को बेचा गया था, जिससे लोगों की निजता खतरे में पड़ गई थी।</p>
<p><strong>चेहरे की पहचान सबसे संवेदनशील डेटा!</strong></p>
<p>डेटा प्रोटेक्शन (Data Protection) आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। जब आप अपने फोन को अनलॉक करने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन (Facial Recognition) तकनीक का उपयोग करते हैं, तो AI कंपनियां आपका यह डेटा स्टोर कर सकती हैं। यह जानकारी आपके पासवर्ड (Password) या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) नंबर से भी ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि पासवर्ड बदले जा सकते हैं, लेकिन आपका चेहरा नहीं!</p>
<p>एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का बाजार लगभग 5.73 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि 2031 तक यह आंकड़ा 14.55 बिलियन डॉलर तक बढ़ने की संभावना है। गूगल (Google) और मेटा (Meta) जैसी कंपनियों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि वे यूजर्स की तस्वीरों का उपयोग अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए करती हैं।</p>
<p><strong>कैसे करें अपनी प्राइवेसी की रक्षा?</strong></p>
<p>अगर आप अपनी निजता को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो निम्नलिखित सावधानियां बरतें:</p>
<ul>
<li>1. AI टूल्स पर अपनी हाई-रिजॉल्यूशन (High-Resolution) तस्वीरें अपलोड करने से बचें।</li>
<li>2. सोशल मीडिया पर अपनी फोटो सेटिंग्स (Photo Settings) को प्राइवेट रखें, ताकि अनजान लोग आपकी तस्वीरें एक्सेस न कर सकें।</li>
<li>3. अपने फोन में फेस अनलॉक (Face Unlock) की बजाय पिन (PIN) या पासवर्ड (Password) का इस्तेमाल करें।</li>
<li>4. अगर किसी वेबसाइट या ऐप को आपकी तस्वीर की जरूरत हो, तो पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें।</li>
</ul>
<p>हालांकि, ये सभी उपाय अस्थायी हैं। जब तक सरकारें AI पर ठोस कानून नहीं बनातीं, तब तक आपकी निजी तस्वीरों का गलत इस्तेमाल पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता। AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियमों और कड़े साइबर कानूनों की जरूरत है। जब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक यह तकनीक हमारी सुविधा के साथ-साथ हमारी प्राइवेसी के लिए भी बड़ा खतरा बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Mar 2025 20:06:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी के रजि और साजिद अहमद ने बनाया खास मोबाइल फोन, बिना सिम कार्ड करेगा काम, 37 बार हुए फेल, अब हासिल किया मुकाम</title>
                                    <description><![CDATA[यूपी के रजि और साजिद अहमद ने बनाया खास मोबाइल फोन, बिना सिम कार्ड करेगा काम, 37 बार हुए फेल, अब हासिल किया मुकाम,UP News Raji and Sajid Ahmed of UP made a special mobile phone it will work without SIM card]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/up-news-raji-and-sajid-ahmed-of-up-made-a-special-mobile-phone-it-will-work-without-sim-card/article-16356"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2024-11/rasa-wireless.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>UP News: </strong>उत्तर प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. बस उन्हें उचित स्थान मिलने की जरूरत है. कुछ ऐसा ही किया है बलिया के दो लड़कों ने .बलिया स्थित बैरिया के चांदपुर गांव निवासी रजि अहमद और साजिद अहमद ने एक ऐसा मॉडल किया है जो बिना सिम कार्ड के काम करेगा. इस फोन  मॉडल के दो हिस्से हैं. एक हिस्से में सिम कार्ड होगा लेकिन दूसरा बिना सिम कार्ड के रिमोट की तरह काम करेगा. यह मॉडल पचास मीटर के भीतर काम करेगा. अगर फोन चोरी हो जाए और कोई उसे ऑफ करे तो दूसरे हिस्से फोन के पहले हिस्से को ऑन किया जाएगा. इस फोन को रासा वायरलेस डिवाइस नाम से जाना जाएगा.</p>
<p>इस डिवाइस को बनाने में दो साल सात महीने लगे हैं. इससे साइबर सुरक्षा में भी मदद मिलेगी. हिन्दी अखबार दैनिक जागरण के अनुसार रजि अहमद फिलहाल तमिलनाडु यूनिवर्सिटी में एरो स्पेस की पढ़ाई कर रहे हैं. दूसरी ओर साजिद ने गंव से ही प्राथमिक शिक्षा ली और अभी एक स्कूल  में पढ़ाते हैं. अभी दोनों गांव में ही रहते हैं.</p>
<p><strong>2200 रुपये हुए खर्च</strong><br />फोन का मॉडल बनाने के लिए कुछ सामान दिल्ली से मंगाए गए तो वहीं कुछ कबाड़ का भी इस्तेमाल किया गया. जानकारी के मुताबिक इस फोन को बनाने में 2200 रुपये का खर्च आया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रजि ने बताया कि इस फोन को बनाने में 37 बार कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी.  रजि और साजिद अहमद को इस फोन के मॉडल का पेटेंट भी मिल गया है. अगर कोई भी ऐसा मॉडल बनाना चाहेगा तो उसे इन दोनों की अनुमति लेनी होगी.</p>
<p><img src="https://bhartiyabasti.com/media/2024-11/rasa-wireless.jpg" alt="RASA WIRELESS" width="1099" height="580"></img></p>
<p>Patent Journal में दी गई जानकारी के अनुसार RASA वायरलेस डिवाइस एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जिससे संचार के दौरान सिम कार्ड की अनुपस्थिति में भी लगभग 60 सेकंड तक बात की जा सकती है. यह संचार, मनोरंजन और साइबर सुरक्षा जैसे कई तरह के कार्य करने में सक्षम है. RASA वायरलेस डिवाइस के मुख्य कंपोनेंट्स CPU, मेमोरी, स्टोरेज, डिस्प्ले, बैटरी, कैमरा, ऑपरेटिंग सिस्टम, सिम कार्ड, चार्जिंग पोर्ट, स्पीकर और माइक्रोफ़ोन हैं. इसे साइबर सुरक्षा, मनोरंजन और संचार के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है. RASA वायरलेस डिवाइस से सुरक्षा और सुविधा, संचार में आसानी, सूचना तक पहुँच और पोर्टेबिलिटी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 20:45:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vikas kumar]]></dc:creator>
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