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                <title>Azamgarh News - Bhartiya Basti</title>
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                <title>UP: 111 ग्राम पंचायतों ने श्रमदान से बदल दी तमसा नदी की तस्वीर, 89 KM तक सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[UP: 111 gram panchayats transformed the Tamsa River through voluntary labour, cleaning up an 89 km stretch, UP: 111 ग्राम पंचायतों ने श्रमदान से बदल दी तमसा नदी की तस्वीर, 89 KM तक सफाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/up-111-gram-panchayats-changed-the-picture-of-tamsa-river/article-24775"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-03/uttar-pradesh-news_20260307_102747_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>उत्तर प्रदेश में स्थित गंगा की सहायक नदियों में शामिल तमसा नदी पिछले कई वर्षों से प्रदूषण, कचरे और अतिक्रमण जैसी परेशानियों से जूझ रही थी. इन कारणों से नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार बिगड़ता जा रहा था और कई स्थानों पर यह केवल एक पतली व प्रदूषित नदी के रूप में रह गई थी.</p>
<p>इसी स्थिति को बदलने के लिए उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले में नदी को पुनर्जीवित करने की एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है. नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशासन और स्थानीय लोगों की संयुक्त भागीदारी से तमसा नदी की सफाई और संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है.</p>
<p>इस अभियान की खासियत यह है कि इसमें भारी मशीनों के बजाय लोगों की सहायता को प्राथमिकता दी गई है. स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, महिला स्वयं सहायता समूहों, मनरेगा श्रमिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने श्रमदान कर नदी की सफाई और उसके किनारों के सुधार में सक्रिय भूमिका निभाई है.</p>
<h4><strong>89 किलोमीटर क्षेत्र में चल रहा सफाई अभियान</strong></h4>
<p>सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज़मगढ़ जिले में लगभग 89 किलोमीटर लंबे नदी क्षेत्र में सफाई और सुधार का काम किया जा रहा है. इस अभियान में 100 से अधिक ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है.</p>
<p>नदी के उथले हिस्सों में जमी गंदगी को हटाने, नदी तटों से कचरा साफ करने और अवैध अतिक्रमण को चिन्हित करने जैसे कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं. इसके साथ ही नदी के किनारों को पर्यावरणीय दृष्टि से मजबूत बनाने के लिए पेड़ पौधे लगाने का अभियान भी चलाया जा रहा है.</p>
<h4><strong>नदी किनारे लगाए जा रहे फलदार पौधे</strong></h4>
<p>नदी संरक्षण के इस अभियान में वृक्षारोपण को भी विशेष महत्व दिया गया है. नदी के किनारों पर बड़ी संख्या में फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में यह क्षेत्र हरित पट्टी के रूप में विकसित हो सके. प्रशासन का मानना है कि इन पेड़ों से भविष्य में मिलने वाले फलों का उपयोग स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम पंचायतों द्वारा किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.</p>
<h4><strong>दो अलग-अलग तमसा नदियों को लेकर होता है भ्रम</strong></h4>
<p>भारत में तमसा नाम से दो नदियां प्रचलित हैं, जिसके कारण कई बार लोग इनके बारे में भ्रमित हो जाते हैं. एक तमसा नदी को टोंस नदी भी कहा जाता है, जिसका उद्गम मध्य प्रदेश के मैहर जिले में कैमूर पर्वतमाला के तमसा कुंड से माना जाता है.</p>
<p>यह नदी आगे चलकर उत्तर प्रदेश के कई जिलों से गुजरती हुई प्रयागराज के पास गंगा नदी में मिल जाती है. इसकी कुल लंबाई 265 किलोमीटर बताई जाती है.</p>
<p>वहीं दूसरी तमसा नदी, जिसके जीर्णोद्धार का अभियान चल रहा है, उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर क्षेत्र से निकलती है और मऊ होते हुए आगे बढ़ती है. इसे कई जगह छोटी सरयू के नाम से भी जाना जाता है.</p>
<h4><strong>गर्मियों में कम हो जाती है नदी की धारा</strong></h4>
<p>लेकिन तमसा नदी को सामान्य रूप से बारहमासी माना जाता है, लेकिन गर्मियों के दौरान इसका जलस्तर काफी कम हो जाता है. कई जगहों पर नदी केवल संकरी धारा के रूप में दिखाई देती है.</p>
<p>इसके विपरीत मानसून के मौसम में वर्षा के कारण नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और कई बार आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति भी बन जाती है. वर्ष 2005 में इसी नदी में आई बाढ़ ने आसपास के क्षेत्रों को काफी प्रभावित किया था.</p>
<h4><strong>पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व भी</strong></h4>
<p>तमसा नदी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी काफी पुराना माना जाता है. रामायण के अनुसार वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने पहली रात्रि इसी नदी के तट पर बिताई थी. वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में तमसा नदी का उल्लेख मिलता है, जहां भगवान राम अपने वनवास की शुरुआत के दौरान इस नदी के किनारे ठहरे थे.</p>
<p>महाकवि कालिदास ने भी अपने ग्रंथ रघुवंश में तमसा नदी का वर्णन किया है. माना जाता है कि इसी नदी के तट पर महर्षि वाल्मीकि ने क्रौंच पक्षी की मृत्यु से व्यथित होकर पहला संस्कृत श्लोक रचा था, जिससे आगे चलकर रामायण की रचना का मार्ग प्रशस्त हुआ.</p>
<h4><strong>सफाई से पहले काफी खराब हो चुकी थी स्थिति</strong></h4>
<p>अभियान शुरू होने से पहले तमसा नदी की स्थिति काफी चिंताजनक हो चुकी थी. नदी में जलकुंभी, प्लास्टिक कचरा और गाद के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया था. कई स्थानों पर पानी काला और बदबूदार हो चुका था, जिससे आसपास के लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.</p>
<h4><strong>जागरूकता अभियान से जुड़े लोग</strong></h4>
<p>नदी को स्वच्छ बनाने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया गया. स्कूलों, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से लोगों को नदी संरक्षण के महत्व के बारे में बताया गया.</p>
<p>इससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोग स्वेच्छा से श्रमदान के लिए आगे आए और नदी के किनारों से प्लास्टिक, पॉलीथीन और अन्य ठोस कचरे को हटाने में योगदान दिया. </p>
<p>यह ध्यान देने योग्य है कि इससे आसपास के कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की सिंचाई करने में सहायता मिलने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे किसानों को अच्छा उत्पादन मिल सकता है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 11:00:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी के इस जिले में 12 किमी फोरलेन बाइपास को मिली मंजूरी, जाम से मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[A 12-km four-lane bypass has been approved in this UP district, providing relief from traffic jams, यूपी के इस जिले में 12 किमी फोरलेन बाइपास को मिली मंजूरी, जाम से मिलेगी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/approval-for-12-km-four-lane-bypass-in-this-district/article-24346"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-02/uttar-pradesh-news-_20260204_171050_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>पूर्वांचल के विकास की रफ्तार अब और तेज होने वाली है. उत्तर प्रदेश में स्थित जौनपुर और आजमगढ़ में प्रस्तावित बाइपास परियोजनाएं न सिर्फ यातायात का दबाव कम करेंगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर भी बदल देंगी. लंबे समय से जाम और अव्यवस्थित ट्रैफिक से परेशान लोगों के लिए ये योजनाएं बड़ी राहत लेकर आ रही हैं.</p>
<h4><strong>जौनपुर में बदलेगा ट्रैफिक का नक्शा</strong></h4>
<p>जौनपुर शहर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. शहर के भीतर संकरी सड़कों और भीड़भाड़ के कारण रोजाना जाम की समस्या आम हो चुकी है. इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए 12.205 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाइपास के निर्माण को मंजूरी दी गई है. यह बाइपास शहर के बाहर से गुजरते हुए भारी वाहनों को डायवर्ट करेगा, जिससे अंदरूनी सड़कों पर दबाव कम होगा.</p>
<h4><strong>कहां से कहां तक बनेगा बाइपास</strong></h4>
<p>यह फोरलेन बाइपास वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसारतपुर के आगे से शुरू होकर पूर्वांचल विश्वविद्यालय, सिद्धीकपुर के पास जाकर समाप्त होगा. रास्ते में पैदल यात्रियों और छोटे वाहनों की सुविधा के लिए 2 बड़े और 3 छोटे अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को सड़क पार करने में दिक्कत न हो.</p>
<h4><strong>गोमती नदी पर बनेगा नया पुल</strong></h4>
<p>इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गोमती नदी पर बनने वाला करीब 200 मीटर लंबा पुल है. यह पुल दोनों किनारों को मजबूत तरीके से जोड़ेगा. इसके निर्मित हो जाने से आवागमन आसान होगा, साथ ही व्यापार और स्थानीय गतिविधियों को भी गति मिलेगी.</p>
<h4><strong>सर्विस रोड और इंटरचेंज की भी योजना</strong></h4>
<p>बाइपास के साथ-साथ 8.76 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड और करीब 7.2 किलोमीटर स्लिप रोड का निर्माण किया जाएगा. यातायात को और सुचारू बनाने के लिए फ्लाईओवर और एक बड़ा इंटरचेंज भी प्रस्तावित है, जिससे अलग-अलग दिशाओं में जाने वाले वाहनों को रुकना न पड़े.</p>
<h4><strong>व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा</strong></h4>
<p>बेहतर कनेक्टिविटी के कारण जौनपुर के व्यापारी अपना सामान वाराणसी, लखनऊ और आजमगढ़ जैसे बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे. निर्माण कार्य के दौरान और भविष्य में सड़क किनारे विकसित होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.</p>
<h4><strong>आजमगढ़ को भी जाम से मिलेगी राहत</strong></h4>
<p>पूर्वांचल के प्रमुख व्यापारिक केंद्र आजमगढ़ में भी ट्रैफिक की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने करीब 1279.13 करोड़ रुपये की लागत से 15 किलोमीटर लंबे फोरलेन बाइपास को मंजूरी दी है. यह बाइपास आजमगढ़ को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ेगा.</p>
<h4><strong>आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा बाइपास</strong></h4>
<p>रेलवे फाटक के कारण लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए एक आरओबी बनाया जाएगा. इसके अलावा एक बड़ा फ्लाईओवर और 2 आधुनिक इंटरचेंज तैयार किए जाएंगे. ग्रामीण इलाकों और छोटे वाहनों की सुरक्षा के लिए दो बड़े अंडरपास और 8 लाइट व्हीकल अंडरपास भी प्रस्तावित हैं. इनके पूरा होने के बाद सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा. साथ ही व्यापार, उद्योग और रोजगार को नई दिशा मिलेगी, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है.</p>
<h4><strong>रूट और कनेक्टिविटी</strong></h4>
<p>यह बाइपास एनएच-28 से जुड़ते हुए शहर से करीब 5 किलोमीटर पहले रानी की सराय से शुरू होगा और पूर्वी टेंपल क्षेत्र के पास, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नजदीक जाकर समाप्त होगा. इससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लंबी दूरी के वाहन बाहर से ही निकल जाएंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 17:19:26 +0530</pubDate>
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