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                <title>Uttar Pradesh Politics - Bhartiya Basti</title>
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                <title>Opinion: अखिलेश की मस्जिद बैठक या योगी की पुष्पवर्षा – क्या आस्था राजनीति का नया हथियार है?</title>
                                    <description><![CDATA[Opinion: Akhilesh's mosque meeting or Yogi's flower shower - is faith the new weapon of politics?, Opinion: अखिलेश की मस्जिद बैठक या योगी की पुष्पवर्षा – क्या आस्था राजनीति का नया हथियार है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/opinion-up-politics-2027-hara-vs-bhagwa/article-21735"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-07/uttar-pradesh-news-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div>उत्तर प्रदेश की राजनीति फिर से धार्मिक और सामाजिक रंगों में रंगती दिख रही है। यह कोई अचानक उभरा मुद्दा नहीं है, बल्कि सावन की सोंधी हवा में ‘हरा’ और ‘भगवा’ का टकराव पहले से कहीं अधिक तीखा हो चुका है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उनके सांसदों की संसद भवन के पास मस्जिद में हुई एक मुलाकात की तस्वीरों ने सियासी गलियारों में तूफान ला दिया है। वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कांवड़ यात्रियों पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं और हिंदुत्व की राजनीति को और प्रखर बना रहे हैं। ये घटनाएं इशारा कर रही हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अब पूरी ताकत के साथ शुरू हो चुकी है, और इसका थीम पहले से तय हो गया है ‘हरा बनाम भगवा’।23 जुलाई को संसद भवन के बगल की मस्जिद में अखिलेश यादव, मोहिबुल्ला नदवी, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव और जिया उर रहमान बर्क के साथ बैठते हुए तस्वीरें सामने आईं। तस्वीरों में दो महिलाएं भी नजर आईं, जिनमें से एक को मैनपुरी सांसद डिंपल यादव और दूसरी को कैराना सांसद इकरा हसन बताया गया। भाजपा ने तुरंत इस मुद्दे को तूल दिया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि अखिलेश ने संसद के बगल स्थित एक धार्मिक स्थल को राजनीतिक बैठक के लिए प्रयोग किया, जो संविधान का उल्लंघन है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्हें ‘नमाजवादी’ कह दिया और तीखा तंज कसा। उनका कहना था कि किसी भी धार्मिक स्थल का राजनीतिक इस्तेमाल संविधान के खिलाफ है और समाजवादी पार्टी बार-बार इसकी अनदेखी करती रही है।<br /><br />इतना ही नहीं, भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने डिंपल यादव के परिधान पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब मस्जिद में गई थीं तो उन्हें सिर ढंकना चाहिए था। इस बयान को सपा ने तूल देने की कोशिश बताया और इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की साजिश करार दिया। अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि आस्था का मतलब जोड़ना होता है, जबकि भाजपा समाज में दूरियां पैदा करना चाहती है। उन्होंने साफ किया कि यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि एक सामाजिक मुलाकात थी जिसमें मोहिबुल्ला नदवी की पत्नी भी मौजूद थीं।उधर, भाजपा ने मोर्चा खोलते हुए कहा कि मस्जिद को सपा कार्यालय बना दिया गया है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि मस्जिदें सिर्फ इबादत का स्थल हैं, उन्हें राजनीति का मंच नहीं बनाया जा सकता। वहीं कई मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर असहमति जताई और मोहिबुल्ला नदवी से इस्तीफे की मांग कर डाली। मस्जिद की राजनीति ने दोनों पक्षों को न सिर्फ आक्रामक बना दिया है, बल्कि अब धार्मिक संगठनों की नाराजगी भी सपा के लिए एक नई चुनौती बन गई है।<br /><br />इस विवाद के बीच योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सावन के महीने में कांवड़ यात्रा को भव्य रूप देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। हेलिकॉप्टर से कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की गई, जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए और विशेष पुलिस बंदोबस्त किए गए। मुख्यमंत्री ने मेरठ और मुजफ्फरनगर में हवाई निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कांवड़ियों पर फूल बरसाए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि कांवड़ यात्रा के नाम पर उपद्रव फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनकी पहचान सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके हिंदुत्व एजेंडे का विस्तार है।वहीं समाजवादी पार्टी ने इसे 'दिखावा' करार दिया है। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा पिछले 11 सालों से केंद्र में और 9 साल से यूपी में सरकार चला रही है, लेकिन कांवड़ियों के लिए कोई स्थायी ढांचा नहीं बना सकी। उन्होंने ऐलान किया कि सत्ता में आने पर सपा सरकार कांवड़ियों के लिए विशेष कॉरिडोर बनाएगी। इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी अब भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को चुनौती देने के लिए खुद मैदान में उतर आई है। कैराना की सांसद इकरा हसन कांवड़ सेवा शिविर में पहुंचीं और शिवभक्तों को प्रसाद वितरित किया। उनका भगवा पटका पहनकर प्रसाद बांटते हुए वीडियो वायरल हुआ। उन्होंने कहा कि देश की साझा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए वे हर धर्म का सम्मान करती हैं।<br /><br />इस धार्मिक और राजनीतिक खींचतान के बीच यूपी की राजनीति का 2027 मॉडल धीरे-धीरे आकार ले रहा है। सपा का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला और भाजपा का ‘हिंदुत्व + विकास’ का एजेंडा आमने-सामने खड़े हैं। समाजवादी पार्टी के नेता मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं तो भाजपा कांवड़ यात्रा को प्रशासनिक और धार्मिक दोनों स्तर पर भव्य बना रही है। इटावा में अखिलेश यादव ने केदारेश्वर महादेव मंदिर का उद्घाटन कर यह संकेत दिया है कि वे भी हिंदू आस्था के मैदान में कदम रख चुके हैं। वहीं भाजपा सरकार काशी, अयोध्या और मथुरा में कॉरिडोर निर्माण के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने भाजपा को झटका दिया। सपा ने 37 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 33 पर सिमट गई। अब अखिलेश यादव इस लय को विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना चाहते हैं। पीडीए समीकरण के तहत वह गैर-यादव पिछड़ी जातियों, दलितों और मुसलमानों को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर दांव लगाते हुए हिंदुत्व और विकास का दोहरा कार्ड खेल रही है।<br /><br />प्रदेश में भाजपा की राजनीति हमेशा हिंदुत्व केंद्रित रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फैसले, चाहे वह ढाबों के नाम बदलना हो या कांवड़ यात्रा को सरकारी संरक्षण देना इन सबका मकसद हिंदू वोट बैंक को अपने पक्ष में बनाए रखना है। वहीं समाजवादी पार्टी खुद को ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की पार्टी बताकर भाजपा की धर्म आधारित राजनीति का विकल्प बनाना चाहती है। यही वजह है कि एक तरफ डिंपल यादव मस्जिद में नजर आती हैं तो दूसरी ओर इकरा हसन भगवा पटका पहनकर कांवड़ियों की सेवा करती दिखती हैं।डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, प्रसाद मौर्य और अमित मालवीय जैसे नेताओं ने अखिलेश यादव को सोशल मीडिया पर घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। मौर्य ने तो यहां तक कह दिया कि अखिलेश मस्जिद गए, लेकिन सफेद जालीदार टोपी लगाना भूल गए। भाजपा के इन बयानों से साफ होता है कि वह अखिलेश को मुस्लिम तुष्टिकरण के चक्रव्यूह में फंसाने की तैयारी में है।जाहिर है, उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और आस्था अब केवल निजी भावना नहीं रह गई है, बल्कि यह रणनीति और एजेंडे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। मस्जिद से लेकर मंदिर, कांवड़ यात्रा से लेकर टोपी और पटके तक हर चीज का राजनीतिक मतलब निकाला जा रहा है। ‘हरा’ और ‘भगवा’ के बीच की यह लड़ाई अब केवल तस्वीरों और बयानों तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-देहात के मतदाता तक पहुंचने लगी है। 2027 का विधानसभा चुनाव जब भी होगा, उसकी सियासी जमीन आज तैयार हो चुकी है। और यह भी तय है कि इस बार की लड़ाई महज दलों की नहीं होगी, बल्कि विचारधाराओं की, प्रतीकों की और पहचान की होगी। - <strong>अजय कुमार,लखनऊ<br />वरिष्ठ पत्रकार</strong></div>
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                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 16:34:15 +0530</pubDate>
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                <title>UP Politics: कांग्रेस की नई चाल! यूपी में पिछड़ों को मिलेगा 60% हिस्सा, राहुल गांधी खुद करेंगे जांच</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने यूपी में अपनी जिला और शहर कार्यकारिणी में सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है। करीब 60% पद पिछड़े और दलित वर्ग को मिलेंगे, जबकि 20% महिलाओं को मौका मिलेगा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुद करेंगे जिलेवार समीक्षा। जानें पूरी रिपोर्ट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/congress-will-get-60-parts-of-congress-in-up-rahul/article-20865"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-06/uttar-pradesh--(6).jpg" alt=""></a><br /><p>UP Politics: कांग्रेस पार्टी की आने वाली जिला और शहर कार्यकारिणी में इस बार सामाजिक न्याय को खास महत्व दिया जाएगा. नई टीम में जातीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार करीब 60 फीसदी पद दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को दिए जाएंगे. साथ ही 20 फीसदी पदों पर महिलाओं को जगह मिलेगी. ऐसा माना जा रहा है कि 133 जिला और शहर कार्यकारिणी की घोषणा जून के आखिर या जुलाई के पहले हफ्ते में की जा सकती है.</p>
<h6><strong>कांग्रेस मुख्यालय में 6 दिन चला संगठन सृजन कार्यक्रम</strong></h6>
<p>कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में छह दिन तक संगठन सृजन कार्यक्रम चला. इस दौरान प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने जिलावार समीक्षा की. इस प्रक्रिया में वार रूम की रिपोर्ट के आधार पर कई जिलों और शहरों की कमेटियों में बदलाव किए गए.हर जिला और शहर अध्यक्ष से उनकी कार्यकारिणी में शामिल किए गए पदाधिकारियों के बारे में पूरी जानकारी ली गई.</p>
<h6><strong>नियमों को नजरअंदाज कर बनी कमेटियों में हुआ सुधार</strong></h6>
<p>जिन जिलों और शहरों में नियमों को नजरअंदाज करके कमेटियां बनाई गई थीं, वहां बदलाव किए गए हैं. साथ ही जिला और शहर अध्यक्षों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन न करें. पार्टी की ओर से यह भी साफ कर दिया गया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी खुद सभी जिला और शहर कार्यकारिणियों में जातिगत संतुलन की जांच करेंगे. ऐसे में अगर किसी ने मनमानी की, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है. फिलहाल प्रदेश मुख्यालय से सभी कार्यकारिणियों की सूची स्वीकृति के लिए दिल्ली भेज दी गई है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

                <link>https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/congress-will-get-60-parts-of-congress-in-up-rahul/article-20865</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 13:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Harsh Sharma  ]]></dc:creator>
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