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                <title>UP Defence Corridor - Bhartiya Basti</title>
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                <description>UP Defence Corridor RSS Feed</description>
                
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                <title>यूपी में बन रहा देश का सबसे लंबा डिफेंस कॉरिडोर, 325 किमी में फैला नेटवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[The country's longest defense corridor, a network spanning 325 km, is being built in UP, यूपी में बन रहा देश का सबसे लंबा डिफेंस कॉरिडोर, 325 किमी में फैला नेटवर्क]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/the-countrys-longest-defense-corridor-is-being-built-in-up/article-24292"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2026-01/uttar-pradesh-news-_20260124_151028_0000.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश:</strong> उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि और आबादी वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है. बीते कुछ सालों में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को लेकर जिस तरह से निवेश बढ़ा है, उसने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी है. इसी क्रम में उत्तर प्रदेश का डिफेंस कॉरिडोर अब एक बड़े औद्योगिक सर्किट का रूप लेता नजर आ रहा है.</p>
<h4><strong>डिफेंस कॉरिडोर का बढ़ता दायरा</strong></h4>
<p>प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है. पहले जहां कुछ चुनिंदा जिलों को ही इसमें शामिल किया गया था, वहीं अब इसका विस्तार और तेज हो गया है. झांसी, कानपुर और लखनऊ के बाद उन्नाव को भी इस नेटवर्क में जोड़ दिया गया है. इसके साथ ही यह कॉरिडोर लगभग 325 किलोमीटर लंबे सर्किट के रूप में सामने आ चुका है, जो देश का सबसे बड़ा रक्षा औद्योगिक क्षेत्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है.</p>
<h4><strong>उन्नाव बना नया रणनीतिक केंद्र</strong></h4>
<p>डिफेंस कॉरिडोर के सातवें नोड के रूप में उन्नाव का चयन कई मायनों में अहम माना जा रहा है. यहां करीब 230 हेक्टेयर भूमि पर रक्षा औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है. सराय कटियान, मुर्तजा नगर और ओरहर इलाके में बनने वाली इस परियोजना में हथियार, गोला-बारूद, ड्रोन, मशीन गन, बुलेट और बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे आधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण किया जाएगा. शुरुआती चरण में ही करीब 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.</p>
<h4><strong>रोजगार के नए अवसर</strong></h4>
<p>इस नए डिफेंस नोड से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीद है. सरकारी अनुमान के मुताबिक केवल उन्नाव में ही लगभग 15 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है. इससे न सिर्फ स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा, बल्कि आसपास के जिलों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.</p>
<h4><strong>कनेक्टिविटी ने बढ़ाया महत्व</strong></h4>
<p>उन्नाव को डिफेंस कॉरिडोर में शामिल करने के पीछे इसकी बेहतर कनेक्टिविटी भी एक बड़ी वजह है. यह क्षेत्र कानपुर-लखनऊ हाईवे से महज दो किलोमीटर दूर है. निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे से इसकी दूरी लगभग 100 मीटर है, जबकि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है. इस बेहतर सड़क नेटवर्क के चलते यहां बनने वाले रक्षा उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना आसान होगा.</p>
<h4><strong>निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी</strong></h4>
<p>डिफेंस कॉरिडोर में निजी कंपनियों की रुचि लगातार बढ़ रही है. झांसी, कानपुर, लखनऊ और उन्नाव को मिलाकर अब तक 62 से अधिक कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है. इनमें बड़ी और मध्यम स्तर की करीब 40 से ज्यादा कंपनियां सक्रिय रूप से निवेश प्रक्रिया में शामिल हैं. इससे साफ है कि उद्योग जगत उत्तर प्रदेश को एक भरोसेमंद डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देखने लगा है.</p>
<h4><strong>कानपुर और लखनऊ की अलग पहचान</strong></h4>
<p>कानपुर नोड को गोला-बारूद और अंतरिक्ष उपकरण निर्माण के केंद्र के रूप में निर्मित किया जा रहा है. यहां अदाणी डिफेंस लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित कर रही है. इसके अलावा अन्य कंपनियां आर्टिलरी शेल और सैटेलाइट से जुड़े उपकरणों के निर्माण में निवेश कर रही हैं. वहीं लखनऊ नोड में ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट के साथ-साथ उन्नत धातु और रक्षा तकनीक से जुड़ी इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं. यहां 4,800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव अब जमीन पर उतर चुके हैं.</p>
<h4><strong>झांसी बना सबसे बड़ा निवेश केंद्र</strong></h4>
<p>डिफेंस कॉरिडोर में झांसी इस समय सबसे बड़ा निवेश केंद्र बनकर उभरा है. यहां अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव सामने आ चुके हैं. गुडलक एस्ट्रा, रेडवुड ह्यूजेस, सिटाडेल और गुरुत्वा जैसी कंपनियां यहां बड़े पैमाने पर रक्षा उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं. अधिकारियों के अनुसार बड़े भूखंड मौजूद होने के कारण झांसी में परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी मिल रही है.</p>
<p>डिफेंस कॉरिडोर के इस विस्तार से उत्तर प्रदेश अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने को तैयार है. बड़े निवेश, बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर मिलकर प्रदेश को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के एक मजबूत केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं. आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर न केवल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि देश की सामरिक ताकत बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 15:15:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Shobhit Pandey]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूपी में डिफ़ेंस कॉरिडोर के लिए होगा इस जगह भूमि अधिग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[Land will be acquired at this place for Defense Corridor in UP, यूपी में डिफ़ेंस कॉरिडोर के लिए होगा इस जगह भूमि अधिग्रहण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/land-acquisition-will-be-done-for-defense-corridor-in-up/article-20042"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-05/uttar-pradesh-news-_20250516_121108_0000.png" alt=""></a><br /><p><strong>उत्तर प्रदेश: </strong>यूपी के आगरा जिले में रक्षा क्षेत्र के विकास को लेकर एक विशेष कदम उठाया गया है. यहां लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 123 हेक्टेयर भूमि पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक प्राधिकरण (UPEDA) जल्द ही अधिकार स्थापित करने जा रहा है. अब तक किसान इस ज़मीन पर खेती कर रहे थे, परंतु अब इसे डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के निर्माण के लिए सुरक्षित कर लिया गया है.</p>
<p>प्राधिकरण इस ज़मीन को पूरी तरह से घेरे में लेगा. चारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा और मुख्य द्वार पर स्वामित्व का सूचना बोर्ड लगाया जाएगा, जिससे साफ संकेत मिलेगा कि यह ज़मीन अब औद्योगिक विकास के लिए आरक्षित है. इसके बाद विभिन्न रक्षा उपकरण निर्माण कंपनियों को ज़मीन आवंटित की जाएगी, जिससे देश में रक्षा उत्पादन को तेजी मिल सके. यह ज़मीन आगरा की सदर तहसील के बिझामई गांव में स्थित है, जो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ी हुई है. यह स्थान कनेक्टिविटी के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है. अब तक 123 हेक्टेयर में से 112 हेक्टेयर भूमि की खरीद पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 11 हेक्टेयर को जल्द ही जिला प्रशासन के माध्यम से अधिग्रहित किया जाएगा.</p>
<p>इस डिफेंस कॉरिडोर का दायरा सिर्फ आगरा तक सीमित नहीं है. अलीगढ़, झांसी, चित्रकूट, कानपुर, लखनऊ और आगरा इन छह जिलों में यह प्रोजेक्ट फैला हुआ है. यह देश की सुरक्षा प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक विशेष कदम है. विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2018 में इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी. UPEDA के एसडीएम संजय सिंह ने जानकारी दी कि भूमि पर नियंत्रण की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. जैसे ही सरकार से मंजूरी मिलती है, काम तेजी से प्रारंभ कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस भूमि पर निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, सड़कें, बिजली और जल आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि रक्षा कंपनियों को यहाँ निवेश करने में किसी प्रकार की बाधा न हो. आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने भी कहा की डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की प्रगति को लेकर बुधवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी. डिफेंस कॉरिडोर का उद्देश्य केवल औद्योगिक विकास नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 May 2025 12:15:04 +0530</pubDate>
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