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                <title>Indian Army - Bhartiya Basti</title>
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                <title>सेना की जाति पर सियासत: नेताओं के विवादित बयान और चंद्रशेखर आज़ाद की दो टूक</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सेना, जो देश की सुरक्षा में चौबीसों घंटे डटी रहती है, इन दिनों नेताओं के विवादित बयानों की वजह से सियासी बहस का केंद्र बन गई है। सेना के अफसरों की जाति और धर्म को ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/disputed-statement-of-political-leaders-on-the-caste-of-the/article-20086"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-05/20250518_233147.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय सेना, जो देश की सुरक्षा में चौबीसों घंटे डटी रहती है, इन दिनों नेताओं के विवादित बयानों की वजह से सियासी बहस का केंद्र बन गई है। सेना के अफसरों की जाति और धर्म को लेकर कुछ नेताओं द्वारा दिए गए बयानों ने न केवल सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है, बल्कि लोगों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।</p>
<p>बीते दिनों मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने सेना की अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी पर बेहद विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें पाकिस्तानियों और आतंकवादियों की बहन तक कह दिया। इस बयान ने जबरदस्त विवाद खड़ा कर दिया और विरोध बढ़ने पर उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई।</p>
<p>इसके बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने मंच से भाषण देते हुए इस विवाद को और भड़काने वाला बयान दिया। उन्होंने न सिर्फ विजय शाह के बयान का हवाला दिया, बल्कि विंग कमांडर वमिका सिंह और एयर मार्शल अवधेश कुमार की जाति का उल्लेख कर विवाद को नई दिशा दे दी। रामगोपाल यादव ने वमिका सिंह को जाटव समुदाय से बताया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक अफसर को मुसलमान समझकर गाली दी गई, दूसरे को राजपूत समझकर छोड़ दिया गया, और तीसरे के बारे में जानकारी नहीं होने की वजह से उसे नजरअंदाज किया गया।</p>
<p>रामगोपाल यादव का यह कहना कि "तीनों अफसर तो पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) से थे", इस बात की ओर इशारा करता है कि बयान सिर्फ बयान नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश का हिस्सा हैं।</p>
<p>इन बयानों के बीच आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद का जवाब सबसे संतुलित और सटीक रहा। उन्होंने साफ कहा,</p>
<p>&gt; “सेना की कोई जाति नहीं होती, सेना का कोई धर्म नहीं होता। हमें अनजाने में भी सेना का अपमान नहीं करना चाहिए। सेना के जवान हमारे गौरव हैं। वे हमारी सुरक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात हैं और हम उनके बलिदान के कारण ही शांति से जीवन जी पा रहे हैं।”</p>
<p>इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या नेताओं को राजनीतिक लाभ के लिए सेना जैसे सम्मानित संस्थान को भी विवादों में घसीटना चाहिए? सेना हमेशा से धर्म, जाति और क्षेत्र से ऊपर उठकर सिर्फ देश के लिए काम करती है। अफसर किसी भी जाति, धर्म या वर्ग से हों, उनकी निष्ठा और समर्पण सिर्फ राष्ट्र के प्रति होता है।</p>
<p>जहां एक ओर राजनीतिक बयानबाजी सेना की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, वहीं चंद्रशेखर आज़ाद जैसे नेता समाज को यह याद दिला रहे हैं कि देश पहले है, और सेना हमारे गौरव का प्रतीक है, ना कि वोट बैंक की राजनीति का मोहरा।</p>
<p>अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या बाकी राजनीतिक दल और नेता भी इस विषय पर संयम बरतेंगे, या फिर जाति और धर्म की चादर में देश की सुरक्षा करने वालों को लपेटने का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 May 2025 23:32:35 +0530</pubDate>
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                <title>अखिलेश यादव के पोस्ट से उठा नया विवाद: क्या ऑपरेशन सिंदूर पर उठ रहे हैं सवाल?</title>
                                    <description><![CDATA[अखिलेश यादव अपने तीखे सवालों और सरकार को घेरने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस बार उनका निशाना बना है हाल ही में सुर्खियों में आया ऑपरेशन सिंदूर, जिसे भारतीय सेना ने आतंकियों]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/the-new-controversy-raised-from-akhilesh-yadavs-post-is-questioning/article-20016"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-05/20250514_232830.jpg" alt=""></a><br /><p>अखिलेश यादव अपने तीखे सवालों और सरकार को घेरने वाले बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस बार उनका निशाना बना है हाल ही में सुर्खियों में आया ऑपरेशन सिंदूर, जिसे भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ अंजाम दिया था। बताया गया था कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को खत्म करना था।</p>
<p>पहलगांव में हुए आतंकी हमले के बाद से ही बदले की मांग उठ रही थी और इसी सिलसिले में ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन की सफलता के बाद भारतीय सेना ने प्रेस ब्रीफिंग में इसके कई सबूत भी साझा किए, लेकिन एक बड़ा विवाद तब पैदा हुआ जब यह चर्चा सामने आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के बाद ही सीज फायर हुआ।</p>
<p>हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया और साफ किया कि ऑपरेशन सिंदूर और सीज फायर दोनों ही भारतीय सेना और सरकार के स्वतंत्र फैसले थे, इनमें अमेरिका का कोई हस्तक्षेप नहीं था।</p>
<p>इसी बीच अखिलेश यादव ने एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने लिखा:</p>
<p>&gt; "सरकार से आग्रह है कि वह बाहरी दावों की अंदरूनी सच्चाई बताएं।"</p>
<p>इस पोस्ट के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि अखिलेश यादव ऑपरेशन सिंदूर के प्रमाण मांग रहे हैं, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि वे अमेरिका की कथित मध्यस्थता को लेकर उठ रहे दावों की सच्चाई जानना चाह रहे हैं।</p>
<p>सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़</p>
<p>अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई।</p>
<p>एक्स यूजर सचिन राणा ने लिखा:</p>
<p>&gt; "भारत सरकार फर्जी बाहरी दावों की बजाय तथ्य और कार्रवाई में विश्वास रखती है। जहां जरूरत होती है, वहां जवाब जमीन पर दिया जाता है, प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं।"</p>
<p>वहीं अभय प्रताप सिंह ने लिखा:</p>
<p>&gt; "सर! आ गए सबूत मांगने? आपको बाहरी दावों पर भरोसा है या भारत के डीजीएमओ पर?"</p>
<p>इस पूरे मामले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या अखिलेश यादव सच में सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, या फिर ये बयान राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है — इस पर राजनीति गर्म हो चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                            <category> Basti News </category>
                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 May 2025 23:29:08 +0530</pubDate>
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