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                <title>India Pakistan Conflict - Bhartiya Basti</title>
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                <description>India Pakistan Conflict RSS Feed</description>
                
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                <title>कैसे यूपी का एक ठेले वाला बना ISI का आतंकवादी?</title>
                                    <description><![CDATA[एक वक्त था जब वह कैराना की गलियों में अपने पिता के साथ केले की ठेली लगाया करता था। एक मामूली लड़का, जिसके सपने आम लोगों जैसे थे – मेहनत कर परिवार पालना, कुछ कमाना। लेकिन वक्त बदला, सोच बदली और वही लड़का आज पाकिस्तान में ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/how-isi-terrorist-became-a-up-handed-up/article-20039"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-05/20250515_230149.jpg" alt=""></a><br /><p>एक वक्त था जब वह कैराना की गलियों में अपने पिता के साथ केले की ठेली लगाया करता था। एक मामूली लड़का, जिसके सपने आम लोगों जैसे थे – मेहनत कर परिवार पालना, कुछ कमाना। लेकिन वक्त बदला, सोच बदली और वही लड़का आज पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ साजिशों की जड़ बन गया। नाम है – इकबाल कान्हा, जो अब भारत का दुश्मन और आईएसआई का मोहरा बन चुका है।</p>
<p>हाल ही में हरियाणा के पानीपत से एक बड़ा खुलासा हुआ, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया। एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहा युवक नोमान इलाही अचानक खुफिया एजेंसियों की रडार पर आ गया। उसके मोबाइल की ट्रैकिंग से पता चला कि वह पाकिस्तान से संपर्क में है और भारत की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ भेज रहा है।</p>
<p>जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले राज खुलते गए।</p>
<p>नोमान इलाही, जिसकी उम्र केवल 24 साल है, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कैराना कस्बे का रहने वाला है। माता-पिता का देहांत हो चुका है, और वह अपनी बहन के साथ पानीपत में रहकर फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी करता था। ऊपर से सब सामान्य, लेकिन अंदर से वो देश के खिलाफ चल रही बड़ी साजिश का हिस्सा था।</p>
<p>जब पुलिस ने उसके मोबाइल और सोशल मीडिया की जांच की, तो सामने आया एक नाम – इकबाल कान्हा।</p>
<p>नोमान के जरिए पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारियाँ भेजी जा रही थीं। हवाला के जरिए पाकिस्तान से पैसा आता था, जिसे भारत में खुफिया जानकारी जुटाने और गड़बड़ी फैलाने में इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन नोमान असली साजिशकर्ता नहीं, बल्कि केवल एक प्यादा था। असली मास्टरमाइंड कोई और है – वही इकबाल कान्हा, जिसकी कहानी किसी फिल्मी खलनायक से कम नहीं है।</p>
<p>इकबाल की दास्तान: केले की ठेली से आतंक की दुनिया तक</p>
<p>1990 के दशक में कैराना की गलियों में केले बेचने वाला इकबाल सिर्फ फल नहीं बेचता था, वह सपने बेचता था – ताकत और पैसा पाने के। पहले तस्करी शुरू की, फिर सोने से लेकर नकली करेंसी तक और आखिर में हथियारों तक पहुँच गया।</p>
<p>1995 में जब उसका साथी हथियारों के साथ पकड़ा गया, तो इकबाल पाकिस्तान भाग गया और वहां आईएसआई से जुड़ गया। फिर वहीं से भारत के खिलाफ नेटवर्क खड़ा कर लिया।</p>
<p>2021 में दरभंगा रेलवे स्टेशन विस्फोट मामले में भी उसका नाम सामने आया था, जिसमें कैराना के ही दो युवक गिरफ्तार किए गए थे, जिनका इकबाल से सीधा संपर्क था।</p>
<p>अब सवाल उठता है – क्या नोमान जैसे लोग देश में और भी हैं? क्या इकबाल अकेला मास्टरमाइंड है, या उसके जैसे और भी लोग भारत में स्लीपर सेल बनाकर काम कर रहे हैं?</p>
<p>पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई</p>
<p>करनाल के एसपी के अनुसार, नोमान को पाकिस्तान से जानकारियाँ साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसका मोबाइल सीज कर लिया गया है और जांच की जा रही है कि वो किन-किन लोगों के संपर्क में था।</p>
<p>पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ही इस बात की पुष्टि हो गई थी कि वह संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा है, और सबूतों के आधार पर उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।</p>
<p>क्या ये शुरुआत है किसी बड़ी साजिश की?</p>
<p>देश की सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि दुश्मन अब सीमाओं के पार नहीं, बल्कि देश के अंदर हैं। नौमान इलाही जैसे लोग दिखते कुछ और हैं, लेकिन काम देश को अंदर से खोखला करने का कर रहे होते हैं। सवाल यह भी है कि क्या हमारे समाज में ऐसे और भी लोग हैं, जो इकबाल कान्हा जैसे आतंकियों के इशारों पर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं?</p>
<p>जांच अभी जारी है, लेकिन ये केस देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि आतंक अब चेहरा बदलकर सामने आ रहा है – ठेले वाला भी अब दुश्मन बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 May 2025 23:02:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Akash Varun]]></dc:creator>
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                <title>ना आतंकी मरे, ना सिर आया' – नेहा सिंह राठौर ने सरकार से मांगा हिसाब</title>
                                    <description><![CDATA[भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव आखिरकार थोड़ी देर के लिए थमता नजर आया जब 10 मई को शाम 5 बजे दोनों देशों ने सीजफायर का ऐलान किया। यह फैसला ऐसे समय में आया जब हाल ही में भारत ने आतंक के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://bhartiyabasti.com/uttar-pradesh-news-in-hindi/neither-terrorist-dead-nor-head-came-neha-singh-rathore/article-19948"><img src="https://bhartiyabasti.com/media/400/2025-05/20250512_172514.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव आखिरकार थोड़ी देर के लिए थमता नजर आया जब 10 मई को शाम 5 बजे दोनों देशों ने सीजफायर का ऐलान किया। यह फैसला ऐसे समय में आया जब हाल ही में भारत ने आतंक के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर पाकिस्तान को उसके घर में घुसकर करारा जवाब दिया था। इस कार्रवाई के बाद उम्मीद थी कि अब शायद शांति की दिशा में कुछ कदम बढ़ सकें, लेकिन पाकिस्तान अपनी पुरानी फितरत से बाज नहीं आया और सीजफायर के कुछ ही घंटों बाद उसने फिर से ड्रोन हमलों के जरिए अपनी नापाक हरकतें शुरू कर दीं।</p>
<p>भारतीय सेना ने इन ड्रोन हमलों का सफलतापूर्वक जवाब देते हुए उन्हें नष्ट कर दिया और एक बार फिर साफ कर दिया कि भारत की सीमाओं को पार करने की कोशिश करने वालों को हर बार पहले से भी कड़ा जवाब मिलेगा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और नाम चर्चा में आ गया – लोकगायिका नेहा सिंह राठौर।</p>
<p>नेहा सिंह राठौर एक बार फिर अपने सवालों के साथ सामने आई हैं। पहले भी उन्होंने कई बार सोशल मीडिया पर सरकार और सिस्टम से जुड़े सवाल उठाए हैं। इस बार उन्होंने सीधे-सीधे हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन को लेकर कुछ तीखे सवाल पूछे हैं, जो देशभर में चर्चा का विषय बन चुके हैं।</p>
<p>नेहा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा, "आतंकवादी ना पकड़े गए, ना उनका सिर आया, तो क्या गारंटी है कि दोबारा हमला नहीं होगा?" उन्होंने यह भी कहा कि 26 हत्याओं का बदला लेने की कोशिश में हमने 21 और जवानों की जान गंवाई, इसका जिम्मेदार कौन है?</p>
<p>नेहा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरा देश सीजफायर और भारत की जवाबी कार्रवाई की सराहना कर रहा था। लेकिन नेहा के सवालों ने एक नई बहस छेड़ दी है – क्या ऑपरेशन का उद्देश्य पूरा हुआ? क्या वाकई आतंकियों को खत्म किया गया या सिर्फ जवाबी कार्रवाई कर देने को ही संतोष मान लिया गया?</p>
<p>दरअसल, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद नेहा ने इस आतंकी घटना को बिहार चुनाव से जोड़ते हुए बयान दिया था, जिस पर उन्हें काफी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। उनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज की गई और काफी आलोचना भी हुई। इसके बाद नेहा ने कुछ समय के लिए चुप्पी साध ली थी, लेकिन अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद वह एक बार फिर से अपने सवालों के साथ लौट आई हैं।</p>
<p>उनका ताजा वीडियो एक बार फिर से यही दर्शाता है कि वे किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटतीं, चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी विरोध झेलना पड़े। इस बार उनका सवाल आतंकियों की गिरफ्तारी या मौत को लेकर है। वह जानना चाहती हैं कि अगर आतंकवादी ना तो पकड़े गए और ना ही उनके मारे जाने के पक्के सबूत सामने आए, तो फिर कैसे माना जाए कि यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा?</p>
<p>नेहा के इन सवालों ने सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। कुछ लोग जहां उन्हें हिम्मत वाली महिला बता रहे हैं जो बिना डरे सिस्टम से सवाल पूछ रही हैं, वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो इस तरह की बयानबाजी को देश की सुरक्षा व्यवस्था पर हमला मानते हैं।</p>
<p>भारत-पाकिस्तान के बीच जो सीजफायर हुआ है, वह खुद ही एक जटिल मसला है। पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि वह सीजफायर का उल्लंघन करता रहा है और भारत की ओर से संयम बरतने के बावजूद हर बार उसकी तरफ से उकसावे की कार्रवाई होती रही है। ऐसे में भारत को मजबूर होकर जवाबी कार्रवाई करनी पड़ती है, जिससे जवानों की जान भी जाती है और तनाव भी बढ़ता है।</p>
<p>नेहा का कहना है कि अगर अब भी आतंक का अंत नहीं हुआ, तो फिर इतने बड़े ऑपरेशन और जवानों की शहादत का क्या मतलब रहा? क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक कदम था या फिर वाकई में आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई?</p>
<p>इन सवालों का जवाब फिलहाल सरकार या सेना की ओर से नहीं आया है, लेकिन यह बात भी सच है कि भारत की सेना हर बार अपनी भूमिका मजबूती से निभाती आई है। कई बार ऑपरेशनों की पूरी जानकारी गोपनीय रखी जाती है ताकि दुश्मन देश को रणनीति का अंदाजा न लगे। लेकिन जनता और समाज के एक वर्ग की जिज्ञासा और सवाल भी स्वाभाविक हैं, खासकर जब मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।</p>
<p>नेहा सिंह राठौर का सवालों के साथ सामने आना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार उनके सवाल पहले से कहीं ज्यादा तीखे हैं और सीधे-सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित हैं। अब देखना यह है कि इस बार उनकी इस आलोचना पर सरकार, प्रशासन या आम जनता का रुख क्या होता है।</p>
<p>पाकिस्तान की ओर से हुई नापाक हरकतों के जवाब में भारत की कार्रवाई को बहादुरी भरा कदम कहा गया है, लेकिन क्या केवल जवाबी हमला ही पर्याप्त है? यह सवाल अब सिर्फ नेहा सिंह राठौर नहीं, बल्कि देश का हर जागरूक नागरिक पूछ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>India News</category>
                                            <category>Uttar Pradesh News in Hindi</category>
                                            <category>लखनऊ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 17:26:30 +0530</pubDate>
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