Basti News: शहर के तालाबों पर कब बरसेंगी अमृत सरोवर योजना की बूंदें
Basti News: - शहर के दो तालाब जुड़ेंगे योजना से - अभी तक शासन ने धन ही अवमुक्त नही किया
-भारतीय बस्ती संवाददाता-
बस्ती. शहरी क्षेत्र के ताल-पोखरों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है. विभागीय जिम्मेदारों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से ताल-पोखरों को अंधाधुंध पाटकर उन्हें ऊंचे दामों में बेचा जाता रहा है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश हो या सरकार का आदेश बस्ती में सब जमीन पर आते ही टांयटांय फिस्स हो जा रहा है.
सरकार की मंशा थी की प्रदेश में अमृत सरोवर योजना से तालाबों और पोखरों को जोड़कर भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाया जाएगा. सरकारी फरमान के बाद जागे प्रशासन ने बैठकों के माध्यम से गांव से लेकर शहरी क्षेत्र के तालाबों को अमृत सरोवर योजना से जोड़ने की मुहिम शुरू की. शुरूआत में अमृत सरोवर योजना पर तेजी से काम चला. मगर समय बीतने के साथ ही तालाबों के पुनरोद्धार का काम मंद पड़ चुका है.
सनद रहे की शहर के ताल-पोखर भूमाफियाओं और राजस्व महकमें की मिलीभगत से लगातार पाटे जा रहे है. शहर के नेबुड़वाताल, महदों ताल, पाण्डेय पोखरा, पिकौरा बख्श जैसे तमाम ताल-पोखरों पर अगल-बगल बसे लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है. कुछ जगहों पर तो बाकायदा लोगों को तालाबों की जमीन ही बेच दी गई है.
सूत्रों की मानें तो जमीनों पर अवैध कब्जे के खेल में लेखपालों से लेकर तहसीलों मे जमें बाबू, नगर पालिका कर्मचारियों से लेकर कुछ बड़े तक इस हमाम में शामिल है. ऐसे में अवैध कब्जों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा प्रशासन खुद सवालों के घेरे में आ चुका है. ऐसेू में शहर के ताल-पोखरों से अवैध कब्जों और अतिक्रमण हटा पाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है. लोगों का कहना है की गोरखपुर हो या अयोध्या दोनो जिलों में संुदरीकरण पर सरकार द्वारा जमकर पैसा बहाया जा रहा है. जबकि दोनों नगरों के बीच बसा हुआ बस्ती के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. इसमें लोग शासन के साथ ही स्थानीय नेताओं को भी बराबर को दोष दे रहे है.
यह भी पढ़ें: Basti News: सेवानिवृत्त शिक्षकों को दिया विदाईः अधिकारों के लिये एकजुट होकर संघर्ष पर जोरशहरी क्षेत्र में अब तक किसी तालाब पर अमृत सरोवर योजना से काम शुरू नहीं हो सका है. ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है की शहरी क्षेत्र के तालाबों के जीर्णोद्धार के प्रति जिम्मेदार कितने संवेदनशील है. शासन से इस मद में काम शुरू कराने के लिए धन तक नहीं भेजा गया है. जिससे काम की योजना धरातल पर मूर्त रूप नहीं ले पा रही है. शहरी क्षेत्र के दो तालाबों पर काम शुरू कराने के लिए कमर भले ही कसी जा रही हो मगर सरकार द्वारा जारी आदेशों की मानें तो 15 अगस्त तक अमृत सरोवर योजना के तालाबों का लोकार्पण होना था. जो धन के अभाव में अभी कागजों में बंद है.
Basti News: शहर के तालाबों पर कब बरसेंगी अमृत सरोवर योजना की बूंदें
Basti News: - शहर के दो तालाब जुड़ेंगे योजना से - अभी तक शासन ने धन ही अवमुक्त नही किया
-भारतीय बस्ती संवाददाता-
बस्ती. शहरी क्षेत्र के ताल-पोखरों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है. विभागीय जिम्मेदारों और भूमाफियाओं की मिलीभगत से ताल-पोखरों को अंधाधुंध पाटकर उन्हें ऊंचे दामों में बेचा जाता रहा है. सुप्रीम कोर्ट का आदेश हो या सरकार का आदेश बस्ती में सब जमीन पर आते ही टांयटांय फिस्स हो जा रहा है.
सरकार की मंशा थी की प्रदेश में अमृत सरोवर योजना से तालाबों और पोखरों को जोड़कर भूगर्भ जलस्तर को बढ़ाया जाएगा. सरकारी फरमान के बाद जागे प्रशासन ने बैठकों के माध्यम से गांव से लेकर शहरी क्षेत्र के तालाबों को अमृत सरोवर योजना से जोड़ने की मुहिम शुरू की. शुरूआत में अमृत सरोवर योजना पर तेजी से काम चला. मगर समय बीतने के साथ ही तालाबों के पुनरोद्धार का काम मंद पड़ चुका है.
सनद रहे की शहर के ताल-पोखर भूमाफियाओं और राजस्व महकमें की मिलीभगत से लगातार पाटे जा रहे है. शहर के नेबुड़वाताल, महदों ताल, पाण्डेय पोखरा, पिकौरा बख्श जैसे तमाम ताल-पोखरों पर अगल-बगल बसे लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है. कुछ जगहों पर तो बाकायदा लोगों को तालाबों की जमीन ही बेच दी गई है.
सूत्रों की मानें तो जमीनों पर अवैध कब्जे के खेल में लेखपालों से लेकर तहसीलों मे जमें बाबू, नगर पालिका कर्मचारियों से लेकर कुछ बड़े तक इस हमाम में शामिल है. ऐसे में अवैध कब्जों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा प्रशासन खुद सवालों के घेरे में आ चुका है. ऐसेू में शहर के ताल-पोखरों से अवैध कब्जों और अतिक्रमण हटा पाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है. लोगों का कहना है की गोरखपुर हो या अयोध्या दोनो जिलों में संुदरीकरण पर सरकार द्वारा जमकर पैसा बहाया जा रहा है. जबकि दोनों नगरों के बीच बसा हुआ बस्ती के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. इसमें लोग शासन के साथ ही स्थानीय नेताओं को भी बराबर को दोष दे रहे है.
शहरी क्षेत्र में अब तक किसी तालाब पर अमृत सरोवर योजना से काम शुरू नहीं हो सका है. ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है की शहरी क्षेत्र के तालाबों के जीर्णोद्धार के प्रति जिम्मेदार कितने संवेदनशील है. शासन से इस मद में काम शुरू कराने के लिए धन तक नहीं भेजा गया है. जिससे काम की योजना धरातल पर मूर्त रूप नहीं ले पा रही है. शहरी क्षेत्र के दो तालाबों पर काम शुरू कराने के लिए कमर भले ही कसी जा रही हो मगर सरकार द्वारा जारी आदेशों की मानें तो 15 अगस्त तक अमृत सरोवर योजना के तालाबों का लोकार्पण होना था. जो धन के अभाव में अभी कागजों में बंद है.
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अनूप मिश्रा, भारतीय बस्ती के पत्रकार है. बस्ती निवासी अनूप पत्रकारिता में परास्नातक हैं और अपनी शुरुआती शिक्षा दीक्षा गवर्नमेंट इंटर कॉलेज से पूरी की है.